सोनी चौरसिया ने विश्व कीर्तिमान यूं ही नहीं बना दिया। इस सपने को सच करने के लिए महीनों पहले से व्यापक रणनीति बनाने के साथ ही लंबी दिमागी कसरत भी की गई थी। सोनी के खानपान का ध्यान रखने से लेकर उन्हें लगातार पांच दिन और पांच रातों तक मंच पर बनाए रखने के लिए तीन थिंक टैंक लगे हुए थे।
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सोनी चौरसिया
- फोटो : amar ujala bureau
सोनी के साथ 20 से अधिक लोगों ने इस अवधि को जागते हुए बिताया। अंतत: आंखों पर पानी के छींटे मार-मार कर बिना थकान के वह त्रिचूर के हेमलता कमंडलु के विश्व रिकॉर्ड को तोड़ने में कामयाब हुईं। इस दौरान उन्होंने योग-प्राणायाम का भरपूर सहारा लिया। खानपान में तरल पदार्थों की संतुलित मात्रा और जड़ी-बूटियों के जरिए उसकी मांसपेशियों में न खिंचाव आने दिया गया न चेहरे पर तनाव।
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सोनी चौरसिया
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पिछली गलतियों से सबक लेकर इस बार सोनी चौरसिया ने चिकित्सकों और योग गुरुओं की मदद से बड़ी कामयाबी हासिल की। उन्हे मंच पर लगातार खड़ा रखने में अहम भूमिका निभाने वालों में से एक डॉं. नीरज खन्ना ने बड़ी सावधानी और नए प्रयोगों के साथ उन्हें कामयाबी की मंजिल तक पहुंचाने में योगदान दिया। विश्व रिकॉर्ड कायम होने के बाद नीरज ने अपने अनुभव साझा किए।
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सोनी चौरसिया
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मंच पर लगातार चार घंटे नृत्य के बाद जब सोनी गिनीज बुक के नियमों के अनुसार ठहराव लेती थीं। 41.8 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले मौसम में उन्हें फिट रख पाना बड़ी चुनौती थी। बावजूद इसके डॉ. नीरज ने सोनी की चिकित्सा और सेहत का ध्यान रखने की जिम्मेदारी संभाली। नीरज बताते हैं कि उनकी मांसपेशियों में जब दर्द होता था तब पता चल जाता था कि पानी और नमक की कमी होने लगी है। तीन चिकित्सकों की टीम बनाई गई थी। डॉ. अजिताभ कुमार, डॉ. अरुण सिंह, डॉ. एसएस सोनी इसमें शामिल थे। सोनी की नाड़ी, ब्लड प्रेशर और शुगर की नियमित जांच की जा रही थी।
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नींद न आने देने के लिए दो प्रयोग किए गए। गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड का जो नियम है उसका अक्षरश: पालन करते हुए हर चार घंटे पर 20 मिनट का रेस्ट लिया गया। पिछली बार वह आठ-10 घंटे नृत्य कर के आखिरी क्षणों के लिए समय बचा रही थी, जो कारगर साबित नहीं हुई। इस ब्रेक के दौरान इसकी फिजियोथिरेपी, साइकोलाजिकल मोटिवेशन को शीर्षासन और योग निद्रा के सहारे पूरा किया गया। साइकोलॉजिकल मोटिवेशन के द्वारा उसे उसके संकल्प की लगातार याद दिलाई जा रही थी।