हम आने वाले सालों में एक नया विश्व देखेंगे। इस नए विश्व में आर्थिक वृद्धि से लेकर वैश्विक शक्ति संतुलन तक सबकुछ बदल जाएगा। यहां तक कि देशों की आबादी में परिवर्तन होगा, जिससे कार्यशीलता प्रभावित होगी। इस वजह से कुछ देश नई वैश्विक शक्ति के रूप में उभरेंगे। यह पूर्वानुमान है वैज्ञानिकों का।
एक नया विश्व : 2048 में भारत की आबादी हो सकती है 1.6 अरब, फिर 2100 में घटेगी
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भारत की आबादी का आकलन
इस नए विश्व के लिए वैज्ञानिकों ने पूर्वानुमान व्यक्त किया है कि भारत में 2048 में आबादी बढ़कर करीब 1.6 अरब हो सकती है। इसके बाद साल 2100 में इसमें 32 प्रतिशत तक की गिरावट आएगी और यह घटकर लगभग 1.09 अरब रह सकती है।
पत्रिका द लैंसेंट में प्रकाशित अध्ययन में ग्लोबल बर्डन ऑफ डिसीज स्टडी से लिए गए आंकड़े का इस्तेमाल किया गया है। इसमें भारत, अमेरिका, चीन और जापान सहित करीब 183 देशों के लिए वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय आबादी, उनकी मृत्यु दर, जन्म दर तथा प्रवासन दर का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है।
बहुध्रुवीय हो सकता है विश्व
अनुसंधानकर्ताओं के अध्ययन के मुताबिक भारत और चीन जैसे देशों में कार्यशील आबादी में नाटकीय रूप से कमी आ सकती है। इसकी वजह से इन देशों की आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है। साथ ही वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस सदी के अंत तक विश्व बहुध्रुवीय हो सकता है और भारत, नाइजीरिया, चीन तथा अमेरिका प्रभावी शक्तियां हो सकती हैं।
भारत पर यह पड़ेगा असर
वैज्ञानिकों का कहना है सच में यह एक नया विश्व होगा। ताजा अध्ययन के अनुसार भारत में 2017 में काम करने की उम्र वाले वयस्कों की आबादी 76.2 करोड़ थी, जो 2100 में घटकर करीब 57.8 करोड़ रह जाएगी। इसी प्रकार से चीन में भी काम करने की उम्र वाले वयस्कों की आबादी 2017 में 95 करोड़ थी, जो 2100 में घटकर 35.7 करोड़ रह जाएगी।
वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत 2020 के मध्य में श्रमशक्ति आबादी के मामले चीन से आगे निकल सकता है। सिर्फ यही नहीं भारत सकल घरेलू उत्पाद में उभार के मामले में यह सातवें से तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है।