चुनाव करीब आते ही राजनीतिक दलों के बीच मुद्दों को लेकर पहले जुबानी महामुकाबला होता है, फिर शुरू होता है आरोप-प्रत्यारोप का दौर। इसी बीच एक मुद्दा आता है वंशवाद का, जिसे लेकर तमाम राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे पर हमलावर नजर आती हैं। वंशवाद के मामले में भाजपा लगातार कांग्रेस को घेरती रही है। तो क्या भाजपा में वंशवाद नहीं है या दूर से नजर नहीं आता। आगे की तस्वीरों में देखिए कि कांग्रेस के वंशवाद पर सवाल खड़े करने वाली पार्टी खुद इससे कितनी अछूती है।
भाजपा की राजनीति में भी तनकर खड़ा है वंशवाद का बरगद, ये बड़े नेता हैं शामिल
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कल्याण सिंह-राजवीर सिंह
भाजपा में वंशवाद की बात करें तो सबसे पहले वरिष्ठ नेता और वर्तमान में राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह का नाम सामने आता है। कल्याण सिंह इससे पहले 1991 और 1997 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। उनकी दो संतानें हैं, एक पुत्र और एक पुत्री।
कल्याण सिंह के पुत्र राजवीर सिंह आगामी चुनावों में दूसरी बार एटा लोकसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर किस्मत आजमाएंगे। राजवीर 2014 में भी इसी सीट से चुनाव लड़ कर भारी अंतर से जीत चुके हैं। 2009 में यहीं से कल्याण सिंह लोकसभा पहुंचे थे। इस बार शुरू से ही राजवीर को टिकट मिलने की संभवना थी। कुछ दिन पहले कल्याण सिंह के एटा दौरे के बाद से ही तय हो गया था कि राजवीर इस बार भी एटा से ही मैदान में उतरने जा रहे हैं। एटा में बड़ी संख्या में कल्याण सिंह के समर्थक हैं, जिसका फायदा राजवीर को मिलता है।
वसुंधरा राजे- दुष्यंत सिंह
1984 में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का हिस्सा बनी वसुंधरा राजे, 1985-87 के बीच भाजपा युवा मोर्चा राजस्थान की उपाध्यक्ष भी रहीं। 1987 में वो राजस्थान प्रदेश भाजपा की उपाध्यक्ष और 1998-1999 में अटलबिहारी वाजपेयी मंत्रिमंडल में विदेश राज्यमंत्री बनीं। इसके बाद वो दिसंबर 2003 से दिसंबर 2008 तक और दिसंबर 2013 से 2018 तक राजस्थान की मुख्यमंत्री रहीं। उनके बेटे दुष्यंत 2004 में पहली बार झालावाड़ लोकसभा सीट से राजनीति मे मैदान में उतरे थे। उस समय इस सीट से लगातार पांच बार सांसद रह चुकीं उनकी मां वसुंधरा सूबे की मुख्यमंत्री थीं। उन्होंने कांग्रेस के संजय गुर्जर को 81 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। 2014 का चुनाव दुष्यंत सिंह के लिए बेहद आसान रहा। चुनाव प्रचार की कमान मां वसुंधरा राजे के हाथ में थी, जिसका नतीजा हुआ कि दुष्यंत 2 लाख 80 हजार के बड़े अंतर से चुनाव जीते।
राजनाथ सिंह-पंकज सिंह
भाजपा के लोकप्रिय चेहरे और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को भी अपने पिता की राजनीतिक पकड़ का फायदा मिलता रहा है। पंकज सिंह नोएडा से विधायक और भाजपा के उत्तर प्रदेश के महासचिव हैं। राजनाथ, पार्टी का बड़ा नाम और बड़ा चेहरा हैं। जिसका फायदा पंकज को भी मिलता रहा है।
प्रमोद महाजन- पूनम महाजन
महाराष्ट्र समेत भारत के पश्चिमी क्षेत्र में लोकप्रिय प्रमोद महाजन भाजपा के उन नेताओं में से एक थे जिन्होंने किसी राजनीतिक आधार के बिना ही खुद अपना राजनीतिक विकास किया। उन्होंने मुंबई उत्तर पश्चिम से सांसद, केन्द्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री और रक्षा मंत्री के तौर पर भी सेवाएं दी थीं। इसके अलावा उन्होंने दो बार संसदीय कार्य मंत्री का भी कार्यभार संभाला।
इन चुनावों में उनकी बेटी पूनम महाजन एक बार फिर मुंबई उत्तर-मध्य सीट से बतौर भाजपा उम्मीदवार मैदान में उतरने जा रही हैं। कांग्रेस की तरफ से इस सीट पर पूर्व राजनेता सुनील दत्त की बेटी प्रिया दत्त को उतारा गया है। 2014 के चुनाव में पूनम महाजन ने प्रिया दत्त को हरा कर इस सीट पर जीत हासिल की थी।