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लोकसभा चुनाव 2019 : ये जातीय समीकरण बिगाड़ सकते हैं बिहार की इन 5 सीटों का गणित, 18 अप्रैल को वोटिंग
Mon, 15 Apr 2019 07:04 PM IST
Trainee Trainee
चुनाव डेस्क,अमर उजाला,नई दिल्ली
चुनाव डेस्क,अमर उजाला,नई दिल्ली
Published by: Trainee Trainee
Updated Mon, 15 Apr 2019 07:04 PM IST
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बिहार की राजनीति
लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में बिहार की पांच लोकसभा सीट भागलपुर, बांका, पूर्णिया,कटिहार और किशनगंज पर 18 अप्रैल को मतदान होगा। ये पांचों लोकसभा की सीटें बिहार की राजनीति में जातिय मतदाताओं के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। दूसरे चरण की पांचों लोकसभा सीटों पर मुकाबला महागठबंधन बनाम नीतीश कुमार की पार्टी जदयू से है। जिससे प्रदेश की राजनीति में महौल और भी गर्म हो गया है। एनडीए और महागठबंधन दोनों की ओर से जीत के लिए जातिगत समीकरण को साधने की कोशिश की जा रही है।पांचों सीटों पर महागठबंधन बनाम जदयू का मुकाबला कांटे का है। आइए जानते हैं बिहार की उन सीटों के बारे में जिनपर 18 अप्रैल को मतदाता मतदान करेंगे।
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जयप्रकाश नारायण- गिरधारी यादव
- फोटो : Social Media
बांका लोकसभा सीट- इस सीट पर सीधा मुकाबला राजद के जयप्रकाश नारायण यादव बनाम जदयू के गिराधारी यादव के बीच है। दोनों ही प्रत्याशी यादव समुदाय से आते हैं। अपने जातीय समीकरण को साधने के लिए दोनों के बीच होड़ है। 2014 के लोकसभा चुनाव में राजद प्रत्याशी जयप्रकाश नारायण ने निर्दलीय उम्मीदवार पुतुल कुमारी को महज 10 हजार वोटों से हाराया था। इसबार का भी मुकाबला कड़ा माना जा रहा क्योंकि बांका में यादव वोटर 3 लाख के करीब हैं और 2 लाख मुस्लिम वोटर हैं। एक लाख कुर्मी और करीब 80 हजार कोइरी जाति के मतदाता हैं। यादव-मुस्लिम गोलबंदी के अलावा दोनों दलों के नेता पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को साधने के प्रयास में हैं। क्योंकि वो निर्णायक साबित हो सकते हैं।
उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह- संतोष कुशवाहा
- फोटो : Social Media
पूर्णिया सीट: इस सीट पर मुकाबला जदयू से वर्तमान सांसद संतोष कुशवाहा और कांग्रेस के उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह के बीच है। संतोष कुशवाहा ने 2014 में उदय सिंह को हराया था तब उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। पूर्णिया की सीट पर मुस्लिम यादव वाला माय फैक्टर चल सकता है। मुस्लिम यादव गोलबंद हो सकते हैं। हालंकि, पिछड़े वर्ग के वोटरों की तादात काफी है, जिनकी भूमिका इस चुनाव में अहम मानी जा रही है। ब्राम्हण और राजपूत मतदाता भी चुनावी खेल का रुख बदलने के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।
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महमूद अशरफ-डॉ.जावेद
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किशनगंज लोकसभा सीट पर दो मुस्लिम उम्मीदवारों में मुकाबला है। कांग्रेस ने अपने पुराने नेता डॉ. जावेद को यहां से जदयू के महमूद अशरफ के सामने मैदान में उतारा है। मुस्लिम बहुल इलाका होने के कारण किशनगंज के मुस्लिम मतदाता ही सांसद तय करते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में ये सीट कांग्रेस के खाते में गई थी। मौलाना असरारुल हक यहां से जीते थे। करीब 16 लाख वोटरों वाले इस सीट पर 70 फीसदी मतादाता मुस्लिम हैं और 30 फीसदी हिंदु वोटर हैं। जाहिर है दोनों उम्मीदवारों का एक ही समुदाय से होने की वजह से जातिय गणित को साधने के लिए टक्कर जबरदस्त होगी।
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शैलेश मंडल-अजय मंडल
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भागलपुर लोकसभा सीट पर सीधी टक्कर राजद के शैलश कुमार उर्फ बुलो मंडल और जदयू प्रत्याशी अजय कुमार मंडल के बीच है।भागलपुर में मंडल जाति के मतदाता अधिक हैं। जिसकी वजह से दोनों पार्टियों ने अपने उम्मीदवार मंडल जाति से उतारे हैं। इनके अलावा भूमिहार ब्राम्हण के जाति के मतदाता काफी संख्या में हैं। भागलपुर भाजपा के लिए राजनीतिक रुप से उपजाऊ जमीन रही है। लेकिन इस बार शहनवाज हुसैन के मैदान में नहीं होने सीट जनता दल यूनाइटेड के खाते में गई है। भाजपा के प्रत्याशी नहीं होने से पार्टी के कार्यकर्ता कई धड़ों में बंट चुके हैं। जिससे यहां का मुकाबला राजद बनाम जेडीयू हो गया है।