नासा के बाद अब यूरोपी स्पेस एजेंसी मंगल ग्रह पर जानें की तैयारी में है। इस मिशन को एक्सोमार्श नाम दिया गया है। बात देंं कि स्वीडन की हैबिट उपकरण अगले साल मंगल ग्रह पर भेजा जाएगा। इस मिशन में मंगल ग्रह पर पानी के तरल अवस्था में बरकरार रहने की संभावना के बारे में पता लगाया जाएगा। साथ ही मंगल ग्रह के वातावरण से जल तैयार करने की पुष्टि भी की जाएगी। इस मिशन के लिए अनुसंधान टीम में एक भारतीय मूल के एक वैज्ञानिक को भी शामिल किया गया है। आइए आपको उनके बारे में बताते हैं।
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anshuman bhardwaj
- फोटो : LTU.SE
भारतीय मूल के वैज्ञानिक डॉ. अंशुमान भारद्वाज को एक्सोमार्श मिशन के लिए चुना गया है। अंशुमान गोपालगंज जिले के कटेया प्रखंड के धरहरा मेला गांव के मूल निवासी हैं। उनकी स्कूली शिक्षा बेतिया के जवाहर नवोदय विद्यालय, वृन्दावन से हुई, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बायो मेडिकल से स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
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इसके बाद उनका चयन डीआरडीओ में वैज्ञानिक के रूप में हुआ। अभी वह स्वीडन के लूलिया यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। बता दें कि इस टीम में वे भारतीय मूल के सबसे कम उम्र के वैज्ञानिक होंगे।
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हैबिट उपकरण का अनुसंधान चौदह-पंद्रह वैज्ञानिकों की टीम करेगी। इस उपकरण को खास तरीके से डिजाइन किया गया है। उपकरण से भेजे गए संकेतों और डेटा के आधार पर वैज्ञानिकों की टीम विश्लेषण कर निष्कर्ष पर पहुंचेगी।
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अंशुमान के माता-पिता दोनों शिक्षक हैं। बता दें कि इससे पहले मंगल ग्रह के वातावरण और प्रकृति पर शोध के लिए साल 2018 में नासा ने इनसाइट लैंडर भेजा था। नासा का यह मिशन सफल रहा था। अब स्वीडन और अन्य यूरोपीय देश मंगल पर मानव जीवन की संभावनाओं का पता लगाने के लिए अगले साल यह मिशन भेज रहें है।
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