सपा अखिलेश की: अब क्या करें मुलायम-शिवपाल, ये 5 विकल्प
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पहला रास्ता तो यही है कि मुलायम को बेटे अखिलेश का साथ देना चाहिए। साथ ही, अपने समर्थकों से अखिलेश का सहयोग करने की अपील करनी चाहिए। अखिलेश खुद आज मुलायम को पार्टी का असली चेहरा बता चुके हैं। ऐसे में पार्टी भी मजबूत होगी और उनका राजनैतिक महत्व भी बरकरार रहेगा।
अगर मुलायम साइकिल लेने की जिद पर कायम रहते हैं तो वे चाहें तो कोर्ट मे चुनाव आयोग के फैसले को चैलेंज कर सकते हैं। ऐसे में पहले चरण की नोटिफिकेशन के चलते मुलायम को तुरंत राहत नहीं मिलेगी। हालांकि साइकिल का निशान फ्रीज हो सकता है, लेकिन दोनों चुनाव आयोग के फैसले को मान्य बता चुके हैं।
अगर मुलायम को चुनाव लड़ना ही है तो वे उन्हें अपने समर्थकों के साथ ई पार्टी और चुनाव चिह्न के लिए चुनाव आयोग में गुहार लगानी होगी। हालांकि इतना तय है कि अगर ऐसा हुआ तो चुनाव में उन्हें और उनके बेटे को नुकसान होना तय है। राजनीतिक विशलेक्षक भी यही मानते हैं।
अखिलेश की नाराजगी पिता मुलायम की बजाय चाचा शिवपाल के साथ रही है। अखिलेश यादव पहले उन्हें कैबिनेट मंत्रिमंडल से और राष्ट्रीय अधिवेशन में प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा चुके हैं। ऐसे में उनके पास विकल्प अब केंद्रीय राजनीति में जाने का बचा है। ऐसे में वे अपने कद से इंसाफ कर पाएंगे।