उत्तर प्रदेश के वाराणसी जेल में हुआ हंगामा पुलिस व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाने के लिए कोई नया उदाहरण नहीं है बल्कि यहां के अन्य जिला कारागारों में हंगामा होता रहता है। बीते सालों में शायद ही ऐसा कोई साल गुजरा हो जब प्रदेश की किसी जेल में हंगामा न हुआ हो और जेल के अधिकारियों के साथ साथ जेल की संपत्ति को नुकसान न पहुंचा हो।
वाराणसी ही नहीं, यूपी की इन जेलों में भी हो चुका है बवाल
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जेल की दीवार पर चढ़े कैदी
- फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, वाराणसी
शनिवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित जिला जेल में हुए हंगामे से पूरा प्रशासन हलकान रहा। हंगामे की अब तक जो वजह सामने आई है उसे कैदियों से पेशी के वक्त जाते हुए रिश्वत मांगा माना जा रहा है। इस दौरान कैदियों ने डिप्टी जेलर अजय राय का सिर फोड़ दिया और जेल के अन्य अधिकारियों ने बैरकों में छुपकर किसी तरह से जान बचाई। कैदियों का कहना था कि उनसे पेशी पर जाते वक्त बंदी राइटर पैसे मांगता था और उन्होंने जेल का भोजन सुधारने, कई जेल अधिकारियों के निलंबन सहित कई अन्य मांगे की जिन्हें जिलाधिकारी राजमनि यादव ने मौका ए वारदात पर मान लिया। मौके पर प्रशासन के आला अधिकारी पहुंचे और कैदियों को मनाने में जुट गए लेकिन जब ये काम उनसे बनता हुआ नहीं दिखाई दिया तो स्थानीय मीडिया को अंदर जाने की अनुमति दी गई और उनके जरिए कैदियों की बात सुनी गई।
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शनिवार सुबह साढ़े नौ बजे से परेड के दौरान शुरू हुआ ये हंगामा शाम तक चलता रहा। कैदी जेल की दीवार तक चढ़ गए और बैरक नंबर 12 एवं 13 को लोहे के गेट को अंदर से बंद कर लिया। जिसे काटने के लिए राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (एनडीआरएफ) को बुलाया गया। शाम होते होते करीब 7 घंटे के हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद जेल अधीक्षक आशीष तिवारी और जेलर विजय राय कैदियों के कब्जे से छूट गए। हालांकि उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल की जिला जेलों में ये हंगामा कोई नई बात नहीं थी। इससे भी पहले यहां के बलिया, गाजीपुर, जौनपुर, बस्ती, इलाहाबाद में खासा बवाल हो चुका है जिसकी वजह से जेल में कई दिनों तक अशांति रही और प्रशासन हलकान रहा। अमूमन जो जेलों में जो भी हंगामा होता है उनमें आपसी गुटबाजी का बड़ा हाथ होता है।
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बलिया की जिला जेल में छह माह पूर्व कैदी व बंदी रक्षकों के बीच जमकर मारपीट हुई थी। इसके लिए जेल परिसर में बंदियों ने कई दिनों तक भूख हड़ताल की थी। ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि बंदियों के साथ भेदभाव करने, इलाज न कराने तथा भोजन में कटौती करने को लेकर किया था। इसके पूर्व दो चर्चित बंदियों के बीच मारपीट हुई थी। जिससे कई दिनों तक जेल अशांत रहा।
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जौनपुर स्थित जेल में बीते साल मई और जुलाई में बवाल हुआ था। 4 जुलाई को महिला बंदीरक्षक के साथ छेड़छाड़ की बात पर जेल प्रशासन ने लाठीचार्ज किया जिसमें एक बंदी श्यामा यादव की मौत हो गई। इस मामले में जेलर सहित दर्जन भर बंदीरक्षको के खिलाफ मृतक के परिवार वालों ने हत्या का केस दर्ज कराया था। मई में तलाशी की बात पर मारपीट हुई थी।