जिंदगी में खुश रहने के लिए हमेशा किसी बड़े मौके का इंतजार नहीं करना पड़ता। कभी सुबह की चाय के साथ परिवार की हंसी-मजाक भरी बातें दिन बना देती हैं तो कभी बाजार में किसी अनजान शख्स से हुई छोटी-सी मजेदार बातचीत चेहरे पर मुस्कान ले आती है। हमारे आसपास रोज कई ऐसे लोग मिलते हैं, जिनसे बातचीत के दौरान कुछ न कुछ दिलचस्प हो ही जाता है। कबाड़ीवाला भी उन्हीं में से एक है। घर में रखे पुराने अखबार, खाली बोतलें और बेकार पड़ा सामान बेचने के लिए जब हम उसे बुलाते हैं, तो असली मजा सामान के भाव पर होने वाली बातचीत में आता है। ग्राहक चाहता है कि उसके पुराने सामान के अच्छे पैसे मिल जाएं, जबकि कबाड़ीवाला हर चीज का हिसाब अपने अंदाज में लगाता है। कभी ग्राहक ज्यादा भाव मांगता है तो कभी कबाड़ीवाला ऐसा जवाब देता है कि सुनने वाला अपनी हंसी नहीं रोक पाता। आइए पढ़ते हैं कबाड़ीवाले और ग्राहक के बीच होने वाली ऐसी ही कुछ मजेदार बातचीत।
जोक: ग्राहक ने पुराने सामान का मांगा ज्यादा भाव, कबाड़ीवाले ने दिया ऐसा जवाब कि पेट पकड़ कर हसेंगे आप
Jokes: कबाड़ीवाले और ग्राहक के बीच सामान के भाव को लेकर होने वाली बातचीत कभी-कभी बेहद मजेदार हो जाती है। ग्राहक अपने पुराने सामान को कीमती समझता है, जबकि कबाड़ीवाला उसका भाव लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ता। इन दोनों की ऐसी ही नोकझोंक पर बने ये जोक्स पढ़कर आपका भी मूड अच्छा हो जाएगा।
भैया, ये पुराना टीवी कितने का ले जाओगे?
कबाड़ीवाला - सौ रुपये।
ग्राहक - अरे! इसमें तो अभी भी आवाज आती है।
कबाड़ीवाला - तभी तो सौ रुपये दे रहा हूं, वरना आवाज बंद होती तो कबाड़ के भाव ले जाता।
कबाड़ीवाला - भैया, घर में कुछ पुराना सामान है?
ग्राहक - हां, बहुत कुछ है।
कबाड़ीवाला - तो निकाल दीजिए।
ग्राहक - पहले पत्नी से पूछना पड़ेगा, कहीं वह मुझे ही पुराना सामान समझकर न दे दे।
ग्राहक - भैया, ये लोहे की कुर्सी कितने में लोगे?
कबाड़ीवाला - पचास रुपये।
ग्राहक - इतनी कम! इस पर बैठकर मैंने कई साल काम किया है।
कबाड़ीवाला - तो फिर आप ही रखिए, इसकी यादें तो आपके पास हैं।
कबाड़ीवाला - स्क्रीन टूटी है, बैटरी खराब है, ज्यादा से ज्यादा बीस रुपये।
ग्राहक - लेकिन इसमें मेरी बहुत सारी यादें हैं।
कबाड़ीवाला - तो फिर यादें संभालकर रखिए, मोबाइल मुझे दे दीजिए।
(डिस्क्लेमर- इस कैटिगरी में लगाए गए जोक्स और चुटकुले वॉट्सऐप व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वायरल कंटेंट से लिए गए हैं। इनका मकसद सिर्फ लोगों को हंसाना है। हमारा उद्देश्य किसी जाति, धर्म, मत, नस्ल, रंग या लिंग के आधार पर किसी का उपहास उड़ाना या उसे नीचा दिखाना या किसी पर टीका-टिप्पणी करना बिल्कुल नहीं है)