जिंदगी की भागदौड़ में छोटी-छोटी खुशियां ही दिन को खास बनाती हैं। कभी परिवार के साथ बैठकर चाय पीना, कभी किसी अपने की मजेदार बात सुनना, तो कभी बिना किसी वजह के हंस पड़ना, ये पल मन को हल्का कर देते हैं। परिवार में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिनमें हंसी-मजाक अपने आप शुरू हो जाता है। जीजा और साली का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही है। साली को जीजा की टांग खींचने का मौका चाहिए, तो जीजा भी अपने मजेदार जवाबों से उसे चुप कराने की कोशिश करते हैं। इसी रोजमर्रा की मस्ती को ध्यान में रखते हुए हम आपके लिए जीजा-साली के कुछ छोटे, साफ-सुथरे और मजेदार जोक्स लेकर आए हैं।
देसी जोक्स: साली- आपके पास पैसे हैं? जीजा ने दिया ऐसा मजेदार जवाब कि हंसते-हंसते हो जाएंगे लोटपोट
Desi Jokes: जीजा-साली के ये मजेदार जोक्स शॉपिंग, खाने, पैसों और परिवार की छोटी-छोटी बातों को हंसी के अंदाज में पेश करते हैं। मजेदार सवालों और हाजिरजवाबी से भरे ये चुटकुले रोजमर्रा की भागदौड़ के बीच मुस्कुराने का मौका देते हैं।
साली - जीजाजी, आप दीदी की हर बात कैसे मान लेते हैं?
जीजा - क्योंकि घर में शांति बनाए रखना जरूरी है।
साली - और अगर दीदी गलत हों तो?
जीजा - तब भी शांति जरूरी है।
साली - मतलब सही होने से ज्यादा जरूरी चुप रहना है?
जीजा - बेटा, शादी के बाद इंसान बहुत कुछ सीख जाता है!
साली - जीजाजी, आज खाना कैसा बना है?
जीजा - बहुत बढ़िया!
साली - सच में? आपको मेरी बनाई सब्जी पसंद आई?
जीजा - बिल्कुल!
साली - तो फिर आपने दोबारा क्यों नहीं ली?
जीजा - तारीफ दिल से की थी, पेट से नहीं!
साली - जीजाजी, आपके पास पैसे हैं?
जीजा - क्यों, क्या खरीदना है?
साली - कुछ नहीं, बस पूछ रही थी।
जीजा - अच्छा, फिर तो हैं!
साली - तो मुझे थोड़े दे दीजिए।
जीजा - अरे, सवाल पूछने और पैसे मांगने में इतना बड़ा फर्क कब से आ गया?
साली - जीजाजी, आपको सबसे ज्यादा खुशी किस बात से मिलती है?
जीजा - जब महीने की सैलरी आती है।
साली - और सबसे ज्यादा दुख?
जीजा - जब तुम्हारा शॉपिंग वाला मैसेज आता है!
साली - जीजाजी, मैं तो बस परिवार में खुशियां बांटती हूं।
जीजा - हां, और उन खुशियों का बिल मेरे पास भेज देती हो!
(डिस्क्लेमर- इस कैटिगरी में लगाए गए जोक्स और चुटकुले वॉट्सऐप व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वायरल कंटेंट से लिए गए हैं। इनका मकसद सिर्फ लोगों को हंसाना है। हमारा उद्देश्य किसी जाति, धर्म, मत, नस्ल, रंग या लिंग के आधार पर किसी का उपहास उड़ाना या उसे नीचा दिखाना या किसी पर टीका-टिप्पणी करना बिल्कुल नहीं है)