अब तक 3 भारतीय फिल्मों ने Best Foreign Language Film की कैटेगरी में ऑस्कर नामांकन हासिल किया है। उसमें से एक है मदर इंडिया। विदेशी भाषा में बनी श्रेष्ठ फिल्म श्रेणी में भारत की ओर से 'मदर इंडिया' भेजी गई थी। फिल्म के तकनीकी पक्ष और निर्देशक द्वारा बनाई भावना की लहर से चयनकर्ता प्रभावित थे परंतु उन्हें यह बात खटक रही थी कि पति के पलायन के बाद महाजन द्वारा दिया गया शादी का प्रस्ताव वह क्यों अस्वीकार करती है जबकि सूदखोर महाजन उसके बच्चों का भी उत्तरदायित्व उठाना चाहता है।
दरअसल, चयनकर्ता को यह किसी ने नहीं स्पष्ट किया कि भारतीय नारी अपने सिंदूर के प्रति कितनी अधिक समर्पित होती है। फिल्म भारत के सदियों पुराने आदर्श के प्रति समर्पित थी। ऑस्कर जीतने के लिए फिल्म की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को स्पष्ट करने के लिए वहां एक प्रचार विभाग नियुक्त किया जाना चाहिए था।
फिल्म के अंतिम दृश्य में एक मां अपने सबसे अधिक प्रिय पुत्र को गोली मार देती है क्योंकि वह सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ अपहरण कर रहा था। बताया जाता है कि 'मदर इंडिया' नरगिस द्वारा सुझाया गया नाम था।
मदर इंडिया तीसरे पोल के बाद महज एक वोट से ऑस्कर अवॉर्ड जीतने से चूक गई थी। उस साल बेस्ट फॉरेन फिल्म का अवॉर्ड इटालियन प्रोड्यूसर डीनो डे लॉरेन्टिस की फिल्म 'नाइट्स ऑफ केबिरिया' को मिला था। इसके बाद जो फिल्म ऑस्कर्स में फाइनल पांच में पहुंच पाई थी उनमें 1988 में आई मीरा नायर की फिल्म सलाम बॉम्बे और आमिर खान की 2001 में आई फिल्म लगान थी।
बात करें इस बार के नॉमिनेशन्स की तो इस बार ऑस्कर नॉमिनेशंस में दो फिल्मों का सबसे ज्यादा बोलबाला रहा है। 'Roma' और 'The Favourite' को 10-10 नॉमिनेशंस मिले। सबसे ज्यादा चर्चा में रही ब्रैडली कूपर और लेडी गागा की 'अ स्टार इज बॉर्न' को 8 नॉमिनेशंस मिले। क्रिश्चियन बेल की 'वाइस' भी 9 कैटेगरी में नॉमिनेट हुई है। अब देखना है अवॉर्ड किसकी झोली में गिरता है।