फिल्म इंडस्ट्री में निर्माताओं के पसंदीदा रहे जगदीप उर्फ सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी का 81 साल की उम्र में निधन हो गया है। कई लोग उन्हें उनके चर्चित किरदार सूरमा भोपाली के नाम से भी जानते हैं। कॉमेडी में जगदीप ने खुद को इस तरह स्थापित किया था कि शायद ही कोई दूसरा कलाकार उनकी जगह ले पाए। वो उन सहायक कलाकारों में से थे, जिन्हें देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सम्मानित भी किया था। भले ही आज जगदीप हमारे बीच न रहे हों लेकिन उनके निभाए ये 10 किरदार हमेशा याद किए जाएंगे।
कभी शोले के 'सूरमा भोपाली' तो कभी बने पुराना मंदिर के 'मच्छर सिंह', अमर हो गए जगदीप के ये 10 किरदार
किरदार : लालू उस्ताद
फिल्म : दो बीघा जमीन (1953)
उस समय जगदीप एक बाल कलाकार के रूप में काम करते थे। निर्देशक बिमल रॉय ने फणि मजुमदार की फिल्म धोबी डॉक्टर में उन्हें रोते हुए देखा। वहीं से बिमल रॉय ने जगदीप को पसंद किया, और अपनी इस फिल्म में एक जूते पॉलिश करने वाले का किरदार दिया। यह एक कॉमेडी किरदार था, जिसमें जगदीप लोगों को चुटीले संवाद बोलकर जूते पोलिश करवाने के लिए बुलाते हैं। साथ ही अपनी बिरादरी वालों पर रौब भी जमाते हैं।
किरदार : इलाइची
फिल्म : आर पार (1954)
अजीब से नाम से ही अंदाजा हो गया होगा कि जगदीप ने इसमें भी एक कॉमेडियन का किरदार ही किया है। गुरु दत्त के निर्देशन में बनी इस फिल्म में जगदीप ने गुरु दत्त के ही पार्टनर का किरदार निभाया है। शुरुआत से लेकर अंत तक दोनों एक साथ रहते हैं। उनके किरदार की खास बात यह है कि गुरु दत्त पूरे वयस्क हैं, और जगदीप एक बालक। फिर भी बुजुर्गों जैसी बात करते हैं। यही बात उनके किरदार को बड़ा बनाती है।
किरदार : महमूद
फिल्म : हम पंछी एक डाल के (1957)
बच्चों के बेहतरीन काम की वजह से सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का फिल्मफेयर जीतने वाली इस फिल्म में जगदीप ने मुख्य किरदार राजेंद्र मेहरा (मास्टर रोमी) के सहपाठी का किरदार निभाया है। कई और दोस्तों के साथ मिलकर राजेंद्र और महमूद (जगदीप) बाहर घूमने चले जाते हैं। राजेंद्र घर से रूठकर आया था, तो महमूद ऐसा दोस्त था जो उसे बुजुर्गों की तरह समझाया करता था। इस किरदार के लिए जगदीप की बहुत तारीफ हुई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने उन्हें खुद पुरस्कृत भी किया था।
किरदार : सूरमा भोपाली
फिल्म : शोले (1975)
रमेश सिप्पी की प्रतिष्ठित फिल्म 'शोले' का तो हर किरदार लोगों को जुबानी याद हैं। यहां से ही जगदीप को सूरमा भोपाली के नाम से ही जाना जाने लगा था। बहुत से लोगों को शायद आज भी नहीं पता होगा कि सूरमा भोपाली का असली नाम जगदीप है। फिल्म में एक फेंकू लकड़ी बेचने वाले के रूप में जगदीप के किस्से सुनने बहुत से लोग जमा रहते हैं। वह डींगें हांकते रहते हैं, और लोग सुनते रहते हैं। जगदीप का यह रूप लोगों की बहुत पसंद आया।