भारतीय सिनेमा में गुरु दत्त बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने फिल्म निर्माण से लेकर निर्देशन, कोरियोग्राफी और एक्टिंग तक में अपना लोहा मनवाया। गुरु दत्त का जन्म 9 जुलाई 1925 को बेंगलुरु में हुआ था। उनका असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था। गुरु दत्त का जन्म बेहद गरीबी और तकलीफों में बीता था। तो वहीं गुरुदत्त का अंत भी काफी दुखद हुआ था। उनकी शादीशुदा जिंदगी बेहद खुशनुमा बीत रही थी। लेकिन उनकी जिंदगी में एक अभिनेत्री आईं जिसकी वजह से उनकी शादीशुदा जिंदगी में दरार आ गई...
गुरुदत्त और गीता की मुलाकात फिल्म 'बाजी' के सेट पर हुई थी। उस समय गीता रॉय एक पार्श्व गायिका के रूप में मशहूर हो चुकी थीं। उनके पास एक लंबी गाड़ी हुआ करती थी, वो गुरुदत्त से मिलने उनके माटुंगा वाले फ्लैट पर आया करती थीं। सरल इतनी थीं कि रसोई में सब्जी काटने बैठ जाती थीं। अपने घर से वो ये कह कर निकलती थीं कि वो गुरु दत्त की बहन से मिलने जा रही हैं।
उस दौरान राज खोसला गुरु दत्त के असिस्टेंट हुआ करते थे। उन्हें गाने का बहुत शौक था। गुरु दत्त के यहां होने वाली बैठकों में राज खोसला और गीता रॉय डुएट गाया करते थे और पूरा दत्त परिवार बैठ कर उनके गाने सुनता था। गुरु दत्त की छोटी बहन ललिता, गुरु दत्त और गीता के प्रेम पत्र एक दूसरे के लिए ले जाया करती थीं। दोनों का प्यार परवान चढ़ चुका था और 1953 में गुरु दत्त और गीता रॉय विवाह बंधन में बंध गए।
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गुरु दत्त और गीता
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दोनों की जिंदगी काफी खुशनुमा चल रही थी। अचानक ही 'प्यासा' बनने के दौरान गीता और उनके बीच दूरियां आनी शुरू हो गईं। कारण था उनकी अपनी हीरोइन वहीदा रहमान से बढ़ती नजदीकियां। दोनों के बीच शक इस हद तक बढ़ गया कि एक दिन गुरु दत्त को एक चिट्ठी मिली। उसमें लिखा गया था कि, 'मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती। अगर तुम मुझे चाहते हो तो आज शाम को साढ़े छह बजे मुझसे मिलने नारीमन प्वॉइंट पर आओ। तुम्हारी वहीदा।'
जब गुरु दत्त ने ये चिट्ठी अपने दोस्त अबरार को दिखाई तो उन्होंने कहा कि मुझे ये नहीं लगता कि ये चिट्ठी वहीदा ने लिखी है। दोनों ने इस चिट्ठी का रहस्य जानने की योजना बनाई। अबरार अपनी फिएट कार में नारीमन प्वॉइंट पहुंचे और उन्होंने अपनी कार सीसीआई के पास एक गली में पार्क कर दी। उन्होंने देखा कि गीता दत्त और उनकी दोस्त स्मृति बिस्वास एक कार की पिछली सीट पर बैठी किसी को खोजने की कोशिश कर रही हैं। पास की बिल्डिंग से गुरु दत्त भी ये सारा नजारा देख रहे थे। घर पहुंचकर दोनों में इस बात पर जबरदस्त झगड़ा हुआ और दोनों के बीच बातचीत तक बंद हो गई।