लंबे समय से बीमार रहने के बाद दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार का निधन हो गया। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार का बुधवार (7 जुलाई) को सुबह 7 बजकर 30 मिनट में निधन हो गया। अभिनेता पिछले कुछ दिनों से उम्र से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे थे और उन्हें कई बार अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें 30 जून को मुंबई के हिंदुजा अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती कराया गया था। अभिनेता की पत्नी सायरा बानो पूरे समय उनके साथ थीं और उन्होंने प्रशंसकों को आश्वासन दिया था कि उनकी हालत स्थिर है। दिलीप कुमार के निधन से उनके फैंस के बीच शोक की लहर दौड़ गई है। बॉलीवुड हस्तियों ने भी सोशल मीडिया पर दिलीप के निधन पर शोक जताया है।
दिलीप कुमार: महज पच्चीस वर्ष की उम्र में बने महानायक, जानिए 'ट्रेजेडी किंग' के बेहतरीन किरदारों के बारे में
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इस फिल्म में दिलीप कुमार ने शंकर का किरदार निभाया है जो अपनी विधवा मां के साथ गरीबी में जीवन जी रहा है। खिलौने बेचकर वह अपना जीवन यापन करता। उसे शराब पीने की लत पड़ जाती है। वह पार्वती (निम्मी ) को अपना दिल दे बैठता है। अपनी मां से बहस करने के बाद वह अपना जीवन बदलने का फैसला करता है।हालांकि उसके अतीत के दुश्मन उसके भविष्य को लगातार प्रभावित करते हैं। इस फिल्म का निर्देशन अमिय चक्रवर्ती ने किया है। इस फिल्म के लिए दिलीप कुमार ने अपने करियर का पहला सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का किरदार जीता था।
1955 मे बनी यह फिल्म शरतचंद्र चटोपाध्याय के उपन्यास 'देवदास' पर आधारीत है। फिल्म में दिलीप कुमार ने देवदास का किरदार निभाया था जो एक आकर्षक युवक होता है जो शराब के शिकंजे में फंस जाता है। फिल्म को बहुत अधिक सफलता मिली थी। देवदास हिंदी फिल्म जगत की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में एक है। दिलीप कुमार के साथ ही साथ पारो और चंद्रमुखी का किरदार निभाने वाली सुचित्रा सेन और वैजयंती माला के अभिनय को भी समीक्षकों द्वारा सराहा गया। इस फिल्म के जरिए दिलीप कुमार को सिनेमा जगत में एक सशक्त अभिनेता के तौर पर पहचान मिली।
एस० एम० श्रीरामुलु नायडू निर्देशित इस फिल्म में दिलीप कुमार ने एक अमीर व्यक्ति और कुख्यात डाकू आजाद का किरदार निभाया है। फिल्म में शोभा (मीनाकुमारी) अगवा कर ली जाती हैं। उनके करीबी उन्हें ढूंढने की पूरी कोशिश करते हैं लेकिन उनका पता नहीं चलता है। फिर कुछ समय बाद जब शोभा वापस आती है और बताती है कि उसे आजाद ने बचाया और उसका काफी ख्याल रखा। वह आजाद से शादी करना चाहती है। हालांकि शोभा का परिवार इसके खिलाफ होता है।
आजादी के बाद की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म की कहानी, गानें और एक्टिंग लोगों को खूब पसंद आई थी। बी. आर चोपड़ा निर्देशित इस फिल्म में दिलीप कुमार ने शंकर नामक एक तांगेवाले की भूमिका अदा की है जो बस की वजह से तांगेवालों की जीविका खत्म होने के खिलाफ लड़ता है। फिल्म में वैजयंती माला, अजीत और जीवन भी मुख्य किरदार में हैं।