नाट्स शास्त्र में अभिनय को कुल नौ रसों में बांटा गया है। सभी रसों में बिना पारंगत हुए कोई भी उत्तम अभिनेता/अभिनेत्री की श्रेणी में शामिल नहीं हो सकता है। हालांकि हिंदी सिनेमा जगत में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा के बीच नए कलाकारों में यह तथ्य कुछ खो सा गया है। उनका मानना है कि इंडस्ट्री में अपना पैर जमाने के लिए किसी एक जॉनर को पकड़कर रखना पड़े तो उसमें कुछ भी गलत नहीं है। हालांकि चंद फिल्मों के बाद ही उन्हें अहसास हो जाता है कि ये पब्लिक है सब जानती है, जिसे खुश रखने के लिए अपनी सुविधा क्षेत्र से बाहर निकलना ही होगा। ऐसा ही कुछ विद्युत जामवाल के साथ भी हो रहा है।
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Vidyut Jammwal
- फोटो : amar ujala, mumbai
विद्युत पिछले 15 सालों में आधा दर्जन के करीब हिंदी एक्शन फिल्मों में नजर आ चुके हैं। कुछ नया न आजमाने के सवाल पर वह अक्सर यह कहकर निकल जाते हैं कि अगर उन्हें एक्शन हीरो के तौर पर पहचाना जाता है तो वह इससे खुश हैं। हालांकि मन ही मन विद्युत को यह भी पता है कि सिर्फ एक्शन हीरो की छवि के साथ वह लंबे समय तक नहीं टिक सकते हैं। इसी के चलते उनकी अगली फिल्म 'खुदा हाफिज' पूरी तरह से एक रोमांटिक फिल्म होने जा रही है।
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Vidyut Jammwal
- फोटो : amar ujala mumbai
गौरतलब है कि एक्शन हीरो का तमगा रखने वाले विद्युत पहले अभिनेता नहीं है जो किस्मत बदलने के लिए दूसरा जॉनर आजमाने जा रहे हैं। इससे पहले मौजूदा समय में विद्युत के सबसे बड़े प्रतिद्वंदी टाइगर श्रॉफ भी कई साक्षात्कार में यह कह चुके हैं कि वह एक डांस और सिंगिग आधारित फिल्म करने के इच्छुक हैं। वहीं थोड़ा और पहले जाए तो यह समझ आता है कि हिंदी सिनेमा जगत में खालिस एक्शन हीरो का तमगा लंबे समय तक सफल नहीं रहता है।
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अक्षय कुमार
- फोटो : सोशल मीडिया
इसी वजह से अक्षय कुमार से लेकर अजय देवगन, जॉन अब्राहम, सलमान खान, संजय दत्त और सुनील शेट्टी ने एक्शन फिल्मों से शोहरत बटोरने के साथ ही दूसरे जॉनर जैसे कॉमेडी, रोमांटिक, डांस में हाथ आजमाने की कोशिश की। वहीं दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की छवि भी पहले एक्शन हीरो के तौर पर ही स्थापित थी। जिसके बाद उन्होंने हवा का रुख पहचानते हुए 'प्यार झुकता नहीं' और 'प्रेम प्रतिज्ञा' जैसी फिल्में की।
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Vidyut Jammwal
- फोटो : social media
विद्युत जामवाल की आने वाली फिल्म 'खुदा हाफिज' की बात करें यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो एक लड़की (शिवालिका ओबेरॉय) से शिद्दत से प्यार करता है और मंदी के दौरान यानी कि 2009 में शादी कर लेता है। वे विदेश चले जाते हैं और वहां उसे नौकरी मिल जाती है। कहानी में रोचक मोड़ तब आता है जब वह लड़की उससे दूर चली जाती है कि वह फिर उसे वापस लाता है। जानकारी के अनुसार फिल्म की शूटिंग मुंबई, लखनऊ और उज्बेकिस्तान में हुई है। फिल्म के निर्देशक फारुक कबीर हैं। वहीं कुमार मंगत और अभिषेक पाठक इसे प्रोड्यूस कर रहे हैं।