लोकसभा चुनाव के परिणामों के बाद देश ने सालों बाद किसी एक पार्टी को इतने बड़े बहुमत से सरकार बनाते हुए देखा। देश की युवा पीढ़ी के लिए शायद ये ऐसा पहला मौका होगा जब कोई ऐसा ऐतिहासिक घटनाक्रम इनकी आंखों के सामने हो रहा था। जिसके बनने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाचन शैली का बड़ा हाथ था। अब मोदी सरकार के लगभग तीन साल पूरे हो गए हैं और आज हम आपको बता रहे हैं कैसे आप नरेंद्र मोदी से सीख सकते हैं एक अच्छा वक्ता होना। आगे पढ़ें...
मोदी सरकार@3: नरेंद्र मोदी का ये 'खास गुण' हर भारतीय को सीखना चाहिए
2. बोलने से पहले मुद्दे की जानकारीः अगर आपको वाकई शौक है कि आप एक अच्छे वक्तता बने तो इसके लिए सबसे जरूरी है कि आपको जिस मुद्दे पर बात करनी है उसकी तह तक जानकारी आपके पास होनी चाहिए। प्रधानमंत्री की ये बहुत बड़ी खासियत है कि वो किसी मुद्दे पर बोलते हुए सतही बात नहीं करते, अपनी बात के साथ वो उससे जुड़ा साक्ष्य या इतिहास के किसी किस्से के साथ उसे जोड़ कर बताते हैं। जब तक आप मुद्दे को तह तक नहीं जानेंगे तो आप खुल कर बोल ही नहीं पाएंगे।
3. शब्दों का पूरा उच्चारणः भाषण देना या बड़ी ऑडियंस के सामने बोलना हो तो आपको सुनने वाले की रुची का भी ख्याल रखना होता है। आप अगर अपनी बात रखते हुए शब्दों को आघा अधूरा बाहर निकालेंगे तो ऑडियंस आपसे धीरे-धीरे बोर होने लगती है और वो आपसे कटने लगती है।
4. गले से नहीं पेट से आवाज निकालनाः कभी जोर से जोर से चीख कर अपनी बात ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करने वाले को ध्यान से सुनिएगा वो गले से नहीं बल्कि पेट से बोलता है। इससे फायदा ये होता है कि आवाज साफ और तेज निकलती है। इसके अलावे आवाज में वजन आता है।
5. आवाज मॉड्यूलेट करनाः जैसे ही आप चौथे नंबर की टेकनीक से खुद को वाकिफ करा लेते हैं ठीक उसी वक्त आपका अपनी आवाज पर कंट्रोल हो जाता है। फिर अपनी जरूरत के हिसाब से और मौके की नजाकत को ध्यान में रख कर उस अंदाज में अपनी बात पेश करते हैं। इससे जनता या सुननेवाला आपकी तरफ सम्मोहित होने लगता है। शायद अब आपको पता ही हो कि जब नरेंद्र मोदी अपनी बात रख रहे होते हैं तो जनता क्यों तालियां पीटती रहती है।
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