वो कहते हैं न कि अगर हौसलें हो तो इंसान क्या कुछ नहीं कर सकता। ऐसा ही कुछ कारनामा कर दिखाया है ढाका के मोहम्मद अबदुल्ला ने। बचपन में ही अपने दोनों पैर गंवा चुके अबदुल्ला बिना पैरों के ही ऐसे फुटबॉल खेलते हैं कि बड़े-गड़े खिलाड़ी भी मात खा जाएं।
वैसे तो इस खेल में पैरों का खास महत्व है लेकिन जब आप इस शख्स का पैरों के बिना खेल देखेंगे तो इसकी तारीफ करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे। जिंदगी ने हमेशा दुख ही दिया। मां बचपन में ही छोड़कर चली गई थी। सौतेली मां का व्यवहार उनके प्रति कुछ अच्छा नहीं था इसलिए घर तक छोड़ना पड़ा।
अब्दुल्ला कई दिनों तक सड़कों पर रहे और भीख मांग कर अपना गुजारा करने लगे। फिर अपनी दादी के पास रहने के लिए चले आए। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 2001 में चलती ट्रेन पकड़ने की कोशिश में फिसल गए और उनका पैर ट्रेन के पहियों के नीचे आ गया। लोगों ने ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती करवा दिया। लेकिन डॉक्टर उनके पैर बचा नहीं पाए।
घर वालों ने भी उनके बार में जानने की कोशिश नहीं की। जब इलाज पूरा हो गया तो रेल अधिकारियों ने उन्हें अनाथालय छोड़ दिया। वहां उनका दाखिला बैरिसल यूसुफ स्कूल में कर दिया गया। एक दिन वो अनाथालय से भी भाग निकले।
भीख मांग कर अपनी जिंदगी काटनी शुरू कर दी। लेकिन ऐसा करना भी उन्हें कुछ रास नहीं आया। उन्होंने अखबार बेचना शुरू कर दिया। जब भी वो लड़कों को सड़क पर फुटबॉल खेलते देखते फुटबाल के प्रति उनके मन में दबा प्यार जाग उठता। कुछ लोगों ने उन्हें एक एनजीओ में भेज दिया जहां उन्हें व्हीलचेयर दिया गया। लेकिन अब्दुल्ला बिना किसी सहारे के चलना चाहते थे।
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