'वैशाली एस' आज एक जाना-माना फैशन लेबल है। दुनिया में चंदेरी के कपड़ों को उसने अलग ही पहचान दी है। विद्या बालन से लेकर सोना मोहापात्रा, इस लेबल की दीवानी हैं। लेकिन इस कंपनी को खड़ा करने वाली लड़की ने कैसे लड़ी समाज से लड़ाई और कैसे बनाई अपनी पहचान, हम बताते हैं।
इस ब्रैंड को खड़ा करने वाली वैशाली शादी से बचने के लिए 18 साल की उम्र में घर से भाग आईं थी। स्टेशन पर जो पहली ट्रेन मिली, वह उसी में चढ़ गई और किस्मत उन्हें भोपाल ले आई। उनके पास बिलकुल भी पैसे नहीं थे, नौकरी भी उन्हें एक दोस्त ने दिलवाई।
वैशाली को हमेशा से फैशन डिजाइनिंग में काफी रुचि थी। 1999 में वो भोपाल से मुंबई आ गईं और एक एक्सपोर्ट हाउस में नौकरी करने लगी। लेकिन वो फिटनेस सेंटर में नौकरी का ऑफर था जिसने उन्हें फैशन में जाने के लिए प्रेरित किया।
वैशाली ने लोन लेकर कुछ टेलरों के साथ अपनी दुकान खोली। कुछ ही सालों में उनकी दुकान अच्छी चलने लगी और एक छोटे सी दुकान से मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में तब्दील हो गई। इसी दौरान वैशाली ने दिल्ली आ कर फैशन डिजाइनिंग में दो साल का कोर्स भी किया।
वैशाली के ब्रांड 'वैशाली एस' को 2011 में मुंबई के लैक्मे फैशन वीक के दौरान काफी पसंद किया गया। आज उनके फैशन लेबल के कई दीवाने हैं। हाल ही में उन्होंने न्यूयॉर्क फैशन वीक में अपना कलेक्शन लोगों के सामने पेश किया जिसे काफी सराहना भी मिली।
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