"मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है,
पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है!"
ये पंक्तियां यूं ही नहीं लिखी गईं, बल्कि इनके पीछे बड़ा गहरा अर्थ छिपा है और इन पंक्तियों का अर्थ समझाते हैं पेटीएम के प्रमुख विजय शेखर शर्मा के हौसले।
आइडिया और वक्त की पहचान किस तरह किसी व्यक्ति को फर्श से अर्श पर पहुंचा सकती है, पेटीएम के प्रमुख विजय शेखर शर्मा आज इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। आईये जानें उस विजय शेखर शर्मा के बारे में जिन्होंने अपनी कामयाबी की इबारत जोश और जूनून से लिख दी है।
विजय शेखर शर्मा जीवन में एक दौर ऐसा भी आया था, जब उनके पास खाने के पैसे तक नहीं थे। पेटभर खाने के लिए वह बहाने बनाकर दोस्तों के पास पहुंच जाते थे और खाना खाते थे। इन सब दिक्कतों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और उनके हिम्मत न हारने का परिणाम आज हम सभी देख सकते हैं।
विजय शेखर के निजी जिंदगी की बात करें तो उनकी शिक्षा सरकारी हिंदी माध्यम के स्कूलों में हुई। दिल्ली के इंजीनियरिंग कॉलेज में अंग्रेजी नहीं बोल पाने की वजह से उन्हें कई बार बड़ी परेशानी हुई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। डिक्शनरी से हिंदी को अंग्रेजी में ट्रांसलेट करके पढ़ते थे और कुछ ही दिनों में फर्राटेदार अंग्रेजी बोलना भी सीख गए।
विजयशेखर शर्मा ने साल 2001 में 2 लाख रुपए लगाकर One-97 नाम की कंपनी की शुरुआत की, जो मोबाइल से जुड़ी वैल्यू ऐडेड सर्विसेस देती थी। कॉमर्स में ज्यादा अनुभव न होने के कारण कंपनी की हालत एक साल में ही खराब होने लगी।
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