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फुटबॉलर बनना चाहती थीं देश की 'गोल्डन' बेटी हिमा दास, Exclusive इंटरव्यू में कई खुलासे

Sun, 15 Jul 2018 05:28 PM IST
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 15 Jul 2018 05:28 PM IST
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 IAAF World U20 Championship gold medalist hima das exclusive interview
Hima Das

जागरूकता के अभाव में पूर्वोत्तर से कई प्रतिभाएं सामने नहीं आ पाती हैं। मैंने यह मुकाम हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की है। मगर मेरी यात्रा अभी शुरू ही हुई है। चलने के लिए मेरे पास एक लंबा रास्ता है। बचपन में मैं सारे खेल खेलती थी, लेकिन मेरे गांव वाले मुझसे फुटबॉल खेलने के लिए कहते। शायद इसके पीछे की वजह यही थी कि मेरे पिता भी अच्छे फुटबॉल खिलाड़ी रहे हैं। अट्ठारह साल पहले असम के नगांव जिले के एक छोटे से गांव धींग में मेरा जन्म हुआ था। धींग भारत के उन गांवों में शामिल है, जहां आज भी मोबाइल संचार बेहतर नहीं कहा जा सकता। मैं अपने पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी हूं। मेरे पिता धान की खेती करने वाले किसान हैं।

 IAAF World U20 Championship gold medalist hima das exclusive interview
hima das

बचपन में खेला है फुटबॉल
मेरा खेलों से जुड़ाव शुरू से ही रहा, पर न मैंने और न ही मेरे परिवार के किसी भी सदस्य ने एथलेटिक्स को कभी तवज्जो दी। मेरे पिता की आर्थिक हैसियत भी इतनी बेहतर नहीं थी कि वह मुझे खेलों में करियर बनाने के लिए जरूरी ट्रेनिंग मुहैया करा सकें। मैं फुटबॉल जरूर खेलती थी, लेकिन वह भी अपने गांव के स्कूल के बिना घास वाले मैदान पर। लड़के, लड़कियों, मैं हर किसी के साथ खेलती। थोड़ी बड़ी हुई, तो मैंने कुछ स्थानीय क्लबों के लिए भी फुटबॉल खेला और क्लबों के लिए खेलते हुए पहली दफा देश के लिए खेलने का भी ख्वाब देखा। 

 IAAF World U20 Championship gold medalist hima das exclusive interview
हिमा दास

किसे पता था कि देश के लिए खेलने का मेरा सपना तो जरूर पूरा होगा, लेकिन फुटबॉल नहीं, बल्कि किसी दूसरे खेल में। मुश्किल से दो साल पहले ही मैंने अपने शरीरिक शिक्षा अध्यापक की सलाह पर फुटबॉल को अलविदा कहकर एथलेटिक्स की व्यक्तिगत स्पर्धा में हाथ आजमाने लगी। मिट्टी के टर्फ पर कुछ महीनों तक अभ्यास करने के बाद मैंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता की सौ मीटर स्पर्धा में न सिर्फ भाग लिया, बल्कि कांस्य पदक भी जीता।

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 IAAF World U20 Championship gold medalist hima das exclusive interview
hima das

जब गुमनामी में बिखेरी चमक
जब मुझे जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए कोयंबटूर भेजा गया, तो मुझे जानने वाला कोई नहीं था। वहां जब मैंने फाइनल में जगह बनाई, तो किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि जिस लड़की को अभ्यास करने के लिए सिंथेटिक ट्रैक तक न नसीब हुआ हो, वह ऐसा प्रदर्शन कर सकती है। भले ही मुझे पदक नहीं मिला, मगर जब मैं वापस घर लौटी, मेरी दुनिया बदल चुकी थी। घरवालों की रजामंदी मिलते ही मेरे कोच निपॉन दास बेहतर ट्रेनिंग के लिए मुझे गुवाहाटी ले आए। मेरे पिता तो इसी बात से संतुष्ट थे कि ट्रेनिंग के बहाने उनकी बेटी को तीन वक्त अच्छा खाना मिल सकेगा।

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 IAAF World U20 Championship gold medalist hima das exclusive interview
hima das
पसंद हैं जुबिन दा के गाने
खाली वक्त में मैं प्रसिद्ध असमिया गायक जुबिन गर्ग को सुनना पसंद करती हूं। मैं जुबिन दा को व्यक्तिगत तौर पर भी जानती हूं और उन्होंने मुझे काफी प्रेरित किया है। दो साल पहले तक एथलेटिक्स से कोई वास्ता न रखने के बावजूद मैंने इसी वर्ष गोल्ड कोस्ट में आयोजित हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। मैं वहां पदक तो नहीं जीत सकी, लेकिन यह उम्मीद जरूर थी कि आज नहीं तो कल, मेरा वक्त जरूर आएगा!

-विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता के साक्षात्कारों पर आधारित
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