अपनी कमजोरी से लड़कर कुछ ही लोग आगे बढ़ पाते हैं। ये वह लोग होते हैं जिनमें कुछ कर गुजरने का जूनून होता है। राह में भले ही कितनी भी मुश्किलें आएं, यह पीछे नहीं हटते। ऐसे ही जूनून और जज्बे की कहानी है जैक चेन की जिन्होंने अपने हौसले से सबके लिए मिसाल पेश की है।
जैक चेन न्यूयार्क शहर के रहने वाले हैं। बचपन से ही उनकी नजरें कमजोर थीं। वह केवल रोशनी को पहचान पाते थे और रंगों को थोड़ा बहुत समझ पाते थे। जैक कहते हैं, "मैं कारें नहीं देख पाता था इसलिए मुझे आवाजों पर निर्भर रहना पड़ता था। तब इलेक्ट्रिक कारें ज्यादा लोकप्रिय नहीं थीं।"
जैक की अभी तक कई सर्जरी हो चुकी थीं। 16 साल की उम्र में जैक की आंखों की आठवीं सर्जरी हुई। इस सर्जरी से उम्मीद की गई कि जैक अब देखने लगेंगे लेकिन सर्जरी के दौरान जैक की बची हुई आईसाइट भी चली गई।
लेकिन दृष्टिबाधित होना उन्होंने अपनी कमजोरी नहीं बनाया। जैक ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और बहुप्रतिष्ठित हावर्ड और बर्कले यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में डिग्री ली। एक मल्टीनेशनल कंपनी में इंटर्न लगने के बाद उन्होंने और कई बड़ी कंपनी में काम किया।
2010 में उन्होंने गूगल ज्वाइन किया। पिछले छह सालों से वह इस कंपनी में असोसिएट पेटेंट काउंसल के तौर पर काम कर रहे हैं। गूगल में काम करना जैक के लिए आसान नहीं है। वह रोजाना बाकी कर्मचारियों से ज्यादा मेहनत करते हैं।
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