देशभर में लाखों युवा हर साल इंजीनियर बनने का ख्वाब देखते हैं। इनमें से कईं जेईई समेत अन्य दाखिला परीक्षाओं में अपना शीर्ष संस्थानों में एडमिशन पाने के लिए अपनी किस्मत भी आजमाते हैं। हजारों युवा इसमें सफल भी होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं देश के हजारों युवा ऐसे भी हैं जो सिर्फ अंग्रेजी भाषा की अच्छी पकड़ न होने या अंग्रेजी लिखना-पढ़ना न जानने के कारण इंजीनियरिंग डिग्री पाठ्यक्रमों की पढ़ाई नहीं कर पाते हैं।
पहल : अब हिंदी समेत आठ भाषाओं में कर सकेंगे इंजीनियरिंग, एआईसीटीई ने दी स्वीकृति
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दरअसल, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने कॉलेजों को नए शैक्षणिक वर्ष (2020-21) से हिंदी सहित आठ क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं में इंजीनियरिंग की डिग्री देने की अनुमति दी है। अन्य भाषाएं जिनमें यह उपलब्ध होगा, वे हैं मराठी, बंगाली, तेलुगु, तमिल, गुजराती, कन्नड़ और मलयालम। इस कदम से विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के उम्मीदवारों को अपने सपनों को साकार करने में मदद मिलेगी।
आज तक कई मेधावी छात्र अंग्रेजी के डर से इन पाठ्यक्रमों से दूर रहते थे। उल्लेखनीय है कि जर्मनी, फ्रांस, रूस, जापान और चीन जैसे कई उन्नत देश अपनी आधिकारिक भाषाओं में पूरी शिक्षा प्रदान करते हैं। भारत सरकार की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी इस संबंध में प्रावधान सुनिश्चित किए गए थे। नई शिक्षा नीति के तहत स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक भारतीय भाषाओं में पढ़ाई को प्राथमिकता दी गई है।
लगभग 500 आवेदन प्राप्त हुए
हिंदी सहित आठ क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं में इंजीनियरिंग की डिग्री देने की अनुमति देने की घोषणा करते हुए एआईसीटीई के अध्यक्ष अनिल सहस्त्रबुद्धे ने कहा, इसका उद्देश्य छात्रों को उनकी मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा प्रदान करना है ताकि वे बुनियादी बातों को बेहतर तरीके से समझ सकें। हमें पूरे देश से लगभग 500 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
11 और भाषाओं में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम शुरू होंगे
सहस्त्रबुद्धे ने कहा, हमने भविष्य में 11 और भाषाओं में इंजीनियरिंग स्नातक पाठ्यक्रम पेश करने की योजना बनाई है। एआईसीटीई इन सभी भाषाओं में पाठ्यक्रम सामग्री की पेशकश कर रहा है और स्वयं पोर्टल के तहत पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रमों और बड़े पैमाने पर खुले ऑनलाइन पाठ्यक्रम (एमओओसी) पोर्टलों का अनुवाद भी कर रहा है।
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