दुनियाभर में कहर बरपाने वाली वैश्विक संक्रामक महामारी कोविड-19 का प्रकोप लगातार दूसरे साल चरम पर है। बीते साल दुनिया के कई देशों में विनाशलीला का तांडव मचाने वाले कोरोना वायरस से इन दिनों भारत सबसे ज्यादा प्रभावित मुल्क है।
इससे देश की बेहतरीन माने जाने वाली स्वास्थ्य सेवाएं भी चरमरा चुकी हैं। वहीं, अर्थव्यवस्था में गिरावट के दौर में है। हालांकि, कई देशों ने कोरोना संक्रमण के प्रसार को काबू कर पाने में सफलता पाई है। देश में भी कई शहरों ने सतर्कता और बेहतर प्रबंधन से अपने यहां महामारी के प्रसार को नियंत्रित किया है। इसलिए, सरकार की ओर से अब कोरोना प्रबंधन का तरीका कॉलेजों में पढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
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post Covid, Long Covid
- फोटो : Amar Ujala
इसी क्रम में महाराष्ट्र में सबसे पहले इस पाठ्यक्रम को शुरू करने की तैयारी की गई है। मराठवाड़ा क्षेत्र की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुविधाओं में से एक औरंगाबाद के सरकारी मेडिकल कॉलेज ने राज्य द्वारा संचालित मेडिकल कॉलेजों के लिए कोविड-19 रोकथाम और प्रबंधन में एक सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव दिया है।
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covid care center, women ward
- फोटो : रवि बत्रा
औरंगाबाद गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ कनबाला येलिकर ने प्रस्ताव में लिखा है कि पाठ्यक्रम उपचार केंद्रों में डॉक्टरों और अस्पताल सेवा कर्मियों के लिए आवश्यक जनशक्ति प्राप्त करने में मदद करेगा। मेडिकल कॉलेज के अधिकारी ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान निदेशक और महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलसचिव को गुरुवार को एक प्रस्ताव सौंपा गया था।
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वैक्सीन लगने के बाद भी बरतें ये सावधानियां
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प्रस्ताव में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी ने अस्पतालों और उनके प्रबंधन की स्थिति को उजागर कर दिया है, और यह भी सामने आया है कि मौद्रिक प्रोत्साहन प्रदान करने के बावजूद स्वास्थ्य कर्मियों की कमी देखी गई है। अधिकारी ने बताया कि योजनानुसार, एमबीबीएस, होम्योपैथी, आयुर्वेद और दंत चिकित्सा स्नातकों के लिए छह महीने का एक सर्टिफिकेट कोर्स प्रस्तावित किया गया है।
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कोरोना के सात नए लक्षण
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/संदीप भारद्वाज
प्रस्ताव के अनुसार, पाठ्यक्रम में वायरोलॉजी, सुरक्षा उपायों, गुणवत्ता नियंत्रण, संक्रामक रोगों से व्याधियां या विकृतियां, कोविड-19 निदान और प्रबंधन, वेंटिलेटर सपोर्ट अवेयरनेस और टीकाकरण की बुनियादी प्रयोगशाला तकनीक आदि विषय शामिल होंगे। डॉ येलिकर ने कहा, हम वर्तमान में कम मैनपावर के साथ काम कर रहे हैं।
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