DUSU चुनाव में NOTA ने कैसे बिगाड़ा छात्र संगठनों का समीकरण, पढिए रिपोर्ट
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दरअसल, राजनीति से नाराज होकर छात्रों ने इस चुनाव में जमकर नोटा का बटन दबाया है। बीते साल पहली बार डूसू चुनाव में नोटा बटन को शामिल किया गया था। बीते साल ही 17,712 मतदाता ऐसे थे जिन्हें अपना प्रत्याशी पंसद नहीं आया। ऐसे में उन्होंने प्रत्याशी को ना कहने में हिचकिचाहट नहीं दिखाई।
डूसू चुनाव में इस बार सबसे ज्यादा 29,765 नोटा बटन का इस्तेमाल हुआ। हैरान करने वाला यह है कि यह आइसा को चारों सीटों पर मिले मतों से भी ज्यादा है। आइसा को चारों सीटों पर 29,354 वोट मिले हैं। नोटा बटन दबाने से एबीवीपी व एनएसयूआई को कम लेकिन आइसा को सबसे अधिक नुकसान हुआ।
इस कारण से आइसा का काफी वोट कटा। अध्यक्ष पद पर 5162 नोटा बटन दबा जबकि आइसा की अध्यक्ष पद की उम्मीदवार को 4895 वोट मिले। वहीं उपाध्यक्ष पद पर 7684 नोटा बटन दबाया गया। हालांकि इस पद पर आइसा को नोटा से थोड़े ज्यादा 7765 वोट मिले हैं।
नोटा ने यह साबित किया कि छात्र कैंपस वोट देने तो आए लेकिन उन्होंने किसी भी संगठन को वोट देना मुनासिब नहीं समझा। सचिव पद 7891 नोटा बटन दबाया गया। सबसे हैरान करने वाली बात सहसचिव पद पर है।