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नए सत्र में यूजीसी के ये नियम छात्रों को देंगे राहत

Fri, 16 Dec 2016 01:44 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 16 Dec 2016 01:44 PM IST
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ugc guideline will give relief to students
यूजीसी

12वीं के बाद नए सत्र के लिए दाखिलों का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए एक अच्छी खबर है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उनके लिए तीन नियम लागू किए हैं। नए सत्र से इन नियमों से छात्रों को फायदा होगा और उच्च शिक्षण संस्थानों को शोषण से मुक्ति मिलेगी। इसमें एडमिशन वापस लेने पर शुल्क वापसी का नियम भी शामिल है।

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यूजीसी - फोटो : demo

यूजीसी ने नए सत्र के लिए तय कर दिया है कि उच्च शिक्षण संस्थान अब किसी भी छात्र से उसके असली प्रमाण पत्र, मार्कशीट, लीविंग सर्टिफिकेट या अन्य कोई दस्तावेज जमा नहीं करा पाएंगे। उत्तराखंड में भी तमाम शिक्षण संस्थान ऐसे हैं, जहां छात्रों से उनके असली प्रमाण पत्र जमा कराए जाते हैं और कोर्स पूरा होने के बाद लौटाए जाते हैं।
 

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MPhil admission 2016 - फोटो : अमर उजाला

नए नियम के मुताबिक संस्थान दाखिले के समय प्रमाण पत्रों की फोटोकॉपी अपने पास रख सकते हैं और इनसे ही वेरिफिकेशन कर सकते हैं। इसके अलावा अब कोई भी संस्थान कोर्स के दौरान छात्र को प्रॉस्पेक्टस नहीं बेच सकता है। संस्थान केवल सेमेस्टर या उस साल की ही एडवांस फीस छात्रों से ले सकेंगे, जब वह पढ़ रहा होगा। यानी पूरे कोर्स की एक साथ एडवांस फीस नहीं ली जा सकती है।
 

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money

यूजीसी ने शुल्क वापसी के मामले में भी चार स्तर का नियम बनाया है। इसके तहत अहम बात यह है कि अगर छात्र ने एडमिशन लेने के 15 दिन के भीतर प्रवेश रद्द कराने का नोटिस संस्थान को दे दिया है तो जमा की गई फीस में से संस्थान दस प्रतिशत काटकर बाकी शुल्क लौटाएगा। इससे अधिक शुल्क नहीं काटा जा सकेगा। इससे छात्रों को फायदा होगा।
 

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एडमीशन

प्रदेश में हर साल कई ऐसे मामले आते हैं, जब निर्धारित समय सीमा में दाखिला रद्द कराने पर भी संस्थान बमुश्किल 50 प्रतिशत तक शुल्क ही लौटाते हैं। ऐसे तमाम मामलों के त्वरित निपटारे के लिए यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को एक शिकायत निपटारा समिति गठित करने का निर्देश दिया है। नियमों की अवहेलना करने पर संस्थान की मान्यता खत्म करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

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