टीम इंडिया के ओपनर पृथ्वी शॉ ने सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग के साथ तुलना पर खामोशी तोड़ दी है। युवा बल्लेबाज ने कहा कि महान बल्लेबाजों से उनकी तुलना करना सही नहीं है। शॉ ने हालांकि साथ ही कहा कि इस तरह की तुलना नैसर्गिक है, लेकिन साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि वह उम्मीदों के भार में दबने वाले नहीं हैं।
18 वर्षीय शॉ ने अपनी डेब्यू सीरीज में मैन ऑफ द सीरीज का खिताब जीता। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज की तीन पारियों में कुल 237 रन बनाए। इसमें उनके करियर का डेब्यू शतक भी शामिल हैं। टीम इंडिया ने वेस्टइंडीज का 2-0 से क्लीन स्वीप किया।
एक खेल चैनल से बातचीत में शॉ ने कहा, 'मैं अपनी तुलना सचिन सर और सहवाग सर से नहीं कर सकता। जनता तुलना कर सकती है। लोग यह देखकर तुलना कर रहे हैं कि मैं किस तरह के शॉट्स खेल रहा हूं। मगर मेरी कोशिश जमीन से जुड़े रहने की है।'
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prithvi shaw sachin tendulkar
पृथ्वी ने आगे कहा, 'यह सच है कि सचिन तेंदुलकर सर मेरे आदर्श हैं। मैंने उन्हें काफी खेलते हुए देखा है। जब मैं 10 या 11 साल का था, तब तेंदुलकर सर ने मुझे बल्लेबाजी की टिप्स भी दी थीं। अब तक मेरी यात्रा काफी सुखद रही है। उम्मीदें अब बढ़ेंगी। मैं इसे चुनौती की तरह लूंगा और घबराउंगा नहीं।'
बकौल पृथ्वी, 'उम्मीदें हमेशा से रही हैं। स्कूल स्तर पर या अंडर19 स्तर पर जब भी मैं अर्धशतक जमाता था, तो लोग मुझसे शतक या दोहरे शतक की आस लगाए होते थे। मैं इस बारे में ज्यादा नहीं सोचता और अपने आप को अभिव्यक्त करता हूं। जितना बनता है उतने बेहतर तरीके से गेंद को खेलने का प्रयास करता हूं।'