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पृथ्वी शॉ मामले में नया मोड़, BCCI ने इन पर मढ़ा डोप रिपोर्ट का सारा दोष
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Published by: Rohit Ojha
Updated Fri, 02 Aug 2019 09:51 AM IST
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पृथ्वी शॉ
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युवा बल्लेबाज पृथ्वी शॉ के डोप टेस्ट में फेल होने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। शॉ की डोप टेस्ट रिपोर्ट को लेकर बीसीसीआई पर सवाल उठ रहे थे कि, आखिर उन्होंने इस पर इतनी लेटलतीफी क्यों की। डोप टेस्ट की जांच आईपीएल से पहले हुई थी, तो फिर पृथ्वी शॉ को आईपीएल में कैसे खेलने की इजाजत मिली। बीसीसीआई ने इस मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया है और इसका दोष किसी और पर मढ़ने की कोशिश में जुटा है।
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बीसीसीआई
बीसीसीआई का दावा है कि उन्हें पृथ्वी शॉ की डोप टेस्ट रिपोर्ट दो मई को मिली, जिसके चलते प्रक्रिया में देरी हुई, लेकिन हकीकत यह है कि अगर बोर्ड को रिपोर्ट मई में भी मिल गई थी, तो शॉ को आईपीएल के बाकी बचे मैचों और मुंबई प्रीमियर लीग में कैसे खेलने की अनुमति दी गई। साथ ही इस क्रिकेटर को नेशनल क्रिकेट अकादमी की सुविधाएं भी उठाने की छूट दी गई।
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पृथ्वी शॉ
- फोटो : Social media
बोर्ड की ओर से सैयद मुश्ताक अली ट्राफी के लिए एनडीटीएल से 10 दिन के अंदर डोप टेस्ट रिपोर्ट देने के लिए कहा गया था, लेकिन एथलीट गोमती की तरह लैब ने इस रिपोर्ट में भी देरी कर दी। हालांकि रिपोर्ट दो मई को मिलने के बावजूद बोर्ड इस मामले में तुरंत कार्रवाई कर सकता था। बोर्ड ने इस मामले पर कार्रवाई की प्रक्रिया 12 मई को आईपीएल बीत जाने के बाद शुरू की। फिर जो प्रावीजनल प्रतिबंध उसने शॉ पर 16 जुलाई को लगाया वह इस दौरान भी लगाया जा सकता था। ऐसे में शॉ आईपीएल, एमपीएल नहीं खेल पाते। यही नहीं शॉ इस दौरान एनसीए की सुविधाओं का भी लाभ उठाते रहे।
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पृथ्वी शॉ
वाडा नियमों के मुताबिक हियरिंग पैनल में एक खिलाड़ी, एक लीग कानून विशेषज्ञ और एक डॉक्टर का होना जरूरी है। किसी भी खिलाड़ी पर फैसला सुनाए जाने के आर्डर में इन तीनों विशेषज्ञों के हस्ताक्षर होते हैं। जब तक तीनों आर्डर पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं तब तक इसे जारी नहीं किया जाता है, लेकिन शॉ के आर्डर में सिर्फ डॉ. अभिषेक सॉल्वी के हस्ताक्षर हैं। इसका मतलब यह हुआ कि एक सदस्यीय पैनल ने इस मामले की सुनवाई की, जो की वाडा नियमों के खिलाफ है।
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