भारतीय टीम के स्टार क्रिकेटर मोहम्मद शमी इन दिनों टखने की सर्जरी के बाद उबर रहे हैं। पिछले साल हुए वनडे विश्व कप के बाद से वे मैदान से बाहर हैं। प्रशंसकों की ही तरह उन्हें खुद भी वापसी का इंतजार है। मोहम्मद शमी जब अमर उजाला संवाद उत्तराखंड में पहुंचे तो उन्होंने अपनी रिकवरी, विश्व कप में उनके प्रदर्शन से पाकिस्तान को हुई ईर्ष्या और भविष्य की योजनाओं पर बात की। 'मैदान से शिखर तक' विषय पर हुई चर्चा में उन्होंने सवालों के जवाब दिए।
Mohammed Shami: क्या भविष्य में सियासी पारी शुरू करेंगे मोहम्मद शमी? पढ़िए अमर उजाला के मंच से उनका जवाब
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आप यूपी में जन्मे, फिर बंगाल से खेले। इस सफर के बारे में क्या कहेंगे?
मोहम्मद शमी: मैं भले ही अमरोहा का हूं, लेकिन खेल तो देश के लिए रहा हूं। आपका नसीब आपको जहां तक ले जाए...। आप अपना स्किल और लेवल इतने ऊपर ले जाएं कि कोई सवाल ही न उठा पाए।
वनडे विश्व कप फाइनल में मिली हार की कितनी कसक है?
मोहम्मद शमी: इस बारे में सोचकर मन में उदासी आ जाती है। विश्व कप में यह कहा जाता रहा कि भारत को हराने वाला कोई नहीं है। शायद फाइनल का दिन मेरा नहीं था। शायद उस दिन और विकेट मिल जाते तो बात कुछ और होती। मैं उसे किस्मत मानता हूं। 2024 में टी20 विश्व कप में हम जीते हैं। 2023 में हम जीत जाते तो और अच्छा होता।
आपके लिए गम और खुशी का सबसे बड़ा क्षण क्या था?
मोहम्मद शमी: जब हम छोटे होते हैं तो बड़ा सपना देखते हैं। खिलाड़ी का सपना होता है देश के लिए खेलना। दूसरा लक्ष्य आपका परिवार होता है। मेरे लिए मेरे पिता रोल मॉडल रहे हैं। जब मेरे पिता नहीं रहे तो वह मेरी जिंदगी का सबसे बुरा दौर था। मेरे माता-पिता ने मुझे कभी रोका या टोका नहीं। उन्हें मुझ पर पूरा भरोसा था। जलने वाले उनसे यही कहते रहे कि आप इसे बिगाड़ रहे हैं। जब मैं भारत के लिए पहली बार खेला तो पिता की आंखों में आंसू थे। वह मेरे लिए खुशी का पल था।
2024 के विश्व कप में आप नहीं थे। इस बारे में कुछ लगता है?
मोहम्मद शमी: हमेशा आप हर टीम का हिस्सा नहीं हो सकते। मेरी यही दुआ रहती है कि मेरी जगह जो खेले, वह अच्छा प्रदर्शन करे और देश जीते।
पाकिस्तान के लोग आपकी गेंदबाजी के बारे में कहते रहे कि गेंद में कुछ उपकरण लगा है या आपको अलग गेंद दी गई है। इस पर क्या कहेंगे।
मोहम्मद शमी: देखिए, ये राजनीति है। आप कुछ हासिल करें तो वह कलाकारी है, दूसरा हासिल करे तो जलन क्यों होती है? मुझे पाकिस्तान से जवाब आने का इंतजार है। वो जवाब देंगे, तब मैं उन्हें आगे जवाब दूंगा। आप दूसरे की कामयाबी पर खुश होते हैं तो आप बड़े इंसान हैं। मैंने वो बॉल अपने पास संभालकर रखी है। ऐसा ही संवाद कर लेंगे और उसे स्टेज पर रखकर बॉल को खोल देंगे।
भारत की पेस बैटरी की अलग पहचान रही है, इसका आगे क्या भविष्य है?
मोहम्मद शमी: किसी भी खेल या कारोबार में देखें तो भविष्य होता नहीं है, भविष्य बनाया जाता है। जब आप बनाने बैठेंगे, तभी नतीजे पर पहुंचेगे। अस्सी के दशक में भारत में लोगों को क्रिकेट के बारे में कम पता होता था। 2005 तक भारत की बल्लेबाजी की बात होती थी। कहा जाता था कि भारत के सामने 400 रन भी बना लें तो वह लक्ष्य हासिल कर लेगा। यानी भारत 400 रन लुटा सकता था। आज यही कहते हैं कि हमने 200 रन भी बना दिए तो भारत के गेंदबाज हमें रोक देंगे। यह संस्कृति बदली है। मौजूदा दौर के हम पांच-छह गेंदबाजों ने सारे रिकॉर्ड तोड़े हैं।
क्रिकेट में पहले खेल भावना महत्वपूर्ण थी, अब प्रोफेशनिज्म है तो क्या पैसा खेल पर हावी हो गया है?
मोहम्मद शमी: ये सोच हो सकती है, लेकिन जो पैसा देख रहा है, वही ऐसा सोच सकता है। जिनकी नजर में आईपीएल जिंदगी सुधारने का प्लेटफॉर्म है तो बात अलग है। जिसकी प्राथमिकता भारतीय टीम के लिए खेलना है तो बात अलग हो जाती है। आपके पास हुनर है तो पैसा आपको नहीं बदल सकता। आप हुनर पर भरोसा रखेंगे तो कामयाब हो जाएंगे। जिन्होंने पैसा देखा, वो बाहर हो गए। हां, आईपीएल आया तो लोगों की जिंदगी बदली भी, लेकिन खराब भी हुई। मेरा सवाल है कि अगर आज क्रिकेट में इतना पैसा है तो उससे दोगुना फोकस आप अपने क्रिकेट पर क्यों नहीं करते?
जब बंगाल से आप खेलते हैं तो सवाल आता है कि क्या कभी राजनीति में भी जाएंगे?
मोहम्मद शमी: मैं ऐसे परिवार से हूं, जिसने हमेशा लोगों की मदद करने की कोशिश की है। देखिए, जिंदगीभर तो क्रिकेट नहीं खेल पाऊंगा। कुछ न कुछ तो बनना पड़ेगा। अब देखिए समय क्या बताता है। आप कहीं भी ले जाएं, आपमें दमखम होना चाहिए कि आप लोगों का भविष्य बना सकें। बड़ा नेता बनना जरूरी नहीं है, इतना दम रखिए कि दो-चार लोगों की जिंदगी बदल सकें।
अब आप सोशल मीडिया पर भी आने लगे हैं।
मोहम्मद शमी: यह आइडिया दोस्तों का था। जहां तक हम नहीं पहुंच पाते, वहां बच्चों को सिखा सकूं। मैं भविष्य में ऐसा कुछ प्लेटफॉर्म चाहता हूं कि जहां जो बच्चे मुझ तक नहीं पहुंच सकें, वो ऑनलाइन क्लासेस के जरिए मेरी बात सुन सकें।
बच्चों को क्या संदेश देना चाहते हैं?
मोहम्मद शमी: मैं गांव से आता हूं जहां सिर्फ खेती होती है, प्रैक्टिस करने दूर जाना पड़ता है। मुझे तीन बसें बदलकर प्रैक्टिस के लिए जाना पड़ता था। परिवार के लोग मुझे रात को हाईवे पर लेने आते थे। जिनमें क्षमताएं हैं, वो अगर पांच-छह गांवों को मिलाकर एक अच्छी सुविधा दे सकें तो युवाओं को बड़ा मौका मिलेगा। आप ऑनलाइन भी काफी चीजें सीख सकते हैं।
मोहम्मद शमी के साथ रैपिड फायर
आपकी पसंदीदा फिल्म?
थ्री इडिएट।
आपको खाने में सबसे ज्यादा क्या पसंद है?
मटन।
पढ़ने में क्या पसंद है?
स्पोर्ट्स से जुड़ी किताबें।
बचपन का कोई किस्सा याद है?
पेड़ से गिरना।
कोई ख्वाहिश, जो बाकी है?
हंसी-खुशी जिंदगी बीते और जितना क्रिकेट बचा है, उतना देश के लिए खेलें।
आप क्रिकेटर नहीं होते तो क्या होते?
(हंसते हुए) पॉलिटिशियन। जब घर के लोग इस क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं तो मुझे इसमें परेशानी नहीं है।
किसी एक बल्लेबाज को आउट नहीं कर पाने का मलाल है?
एलेस्टेयर कुक।
घूमने कहां जाना चाहेंगे?
उत्तराखंड और हिमाचल के हिल स्टेशन।
युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?
आप मेहनत करते रहें, खुद के लिए वफादार रहें, आपको कामयाबी जरूर मिलेगी।