फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   world biodiversity day 2020 biological terrorism bioterrorism agents weapons preparation highest risk history

कोरोना महामारी : जैविक आतंकवाद और मनुष्य सभ्यता

Thu, 29 Oct 2020 01:52 PM IST
Dr.Naaz Parveen डॉ. नाज परवीन
Updated Thu, 29 Oct 2020 01:52 PM IST
सार

  • जैविक आतंकवाद मानवता के लिए खतरा बन गया है।
  • सन् 1972 में बायोलॉजिकल विपेन कन्वेंशन की स्थापना हुई।
  • आने वाला समय दुनिया के लिए चुनौतियों भरा है।
  • चीन के वुहान से फैला वायरस दुनिया के अधिकांश देशों को अपनी चपेट में ले चुका है।

विज्ञापन
world biodiversity day 2020 biological terrorism bioterrorism agents weapons preparation highest risk history
मानव जीवन पर महासंकट जैविक आतंकवाद के रूप में उभरकर आ रहा है! - फोटो : Social Media

विस्तार

मानव सभ्यता के विकास का इतिहास युद्ध और विस्तार की नीति पर आधारित रहा है। बाजार और व्यापार की प्रतिस्पर्धा मानवता से ज्यादा बाजार को तरजीह देने वाली जान पड़ती है, जिसका व्यापक विस्तार आज की सदी में देखा जा सकता है।

विज्ञापन


दुनिया भर के देशों के द्वारा बडे-बडे हथियार, गन, टैंक, मिसाइल आदि का भंडार शांति की तैयारी के लिए तो नहीं किए गए होंगे। मानव सभ्यता की विस्तार नीति लगातार जारी है। बाजार और व्यापार की इस नीति ने एक कदम आगे की राह पकड़ हथियारों की सैन्य ताकतों के साथ-साथ नवीनतम रूप जैविक हथियार के रूप में बढ़ा  दिया है। जिसने दुनिया में जैविक आतंकवाद के द्वार खोल दिए हैं।
विज्ञापन


जैविक आतंकवाद जहां मानवता के लिए खतरा बन गया है, वहीं दुनिया के लिए किसी चुनौती से कम नहीं हैं। 21वीं सदी में मानव जीवन पर महासंकट जैविक आतंकवाद के रूप में उभरकर आ रहा है, जो दुनिया के लिए खतरे का संकेत है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जैविक आतंक मानव निर्मित सर्वाधिक प्राचीन होने के साथ विनाशकारी हथियारों में से है। यह ऐसा हथियार है जिनके द्वारा कम खर्च में युद्ध की बड़ी से बड़ी सेना को भी नष्ट किया जा सकता था। यह विनाशकारी हथियार विषाणु, कीटाणु, वायरस या फफूंद जैसे संक्रमणकारी तत्वों से निर्मित किए जाते हैं। जो सदियों से युद्ध का कूटनीतिक हिस्सा रहे हैं।

युद्ध में विरोधी सेना को बीमार करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है। मानव की विस्तारवादी नीति इन महामारियों का कारण बनती रही है।

ईसा पूर्व छठवीं शताब्दी में मेसोपोटामिया के अस्सूर साम्राज्य के लोगों ने अपने शत्रुओं को मारने के लिए उनके पानी के कुओं में जहरीला कवक डलवा दिया। जिससे सैंकड़ो लोग मारे गए। संभवतः यह इतिहास के प्राचीनतम उदाहरणों में से एक है, जब जैविक हथियार का प्रयोग किया गया था।

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मन सैनिक द्वारा एंथ्रेक्स तथा ग्लैंडर्स के जीवाणुओं का प्रयोग विकसित जैविक हथियारों की श्रेणी में आता है। जापान-चीन युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध में प्लेग, हैजा जैसी बीमारी से लोगों में संक्रमण फैलाने का प्रयास किया जाना आदि भी इसी तरह के आतंक में शामिल थे।

जैविक हथियारों का प्रयोग भारी भरकम तकनीकि से नहीं बल्कि छोटे-मोटे जीव-जंतु, जानवरों, पक्षियों और मनुष्यों के माध्यम से हवा, पानी में आसानी से फैलाया जा सकता है। विश्व के जिन देशों में इनका हमला हुआ है, वहां दशकों तक इसका असर देखा जा सकता है।

 

जैविक आतंकवाद दुनिया में फैलने से रोका जा सके, इसके लिए.....

world biodiversity day 2020 biological terrorism bioterrorism agents weapons preparation highest risk history
दुनिया के वैज्ञानिकों को इस खतरे से निपटने के लिए तैयार रहना होगा - फोटो : सोशल मीडिया

सबसे चर्चित जैविक हथियार के रूप में एंथ्रेक्स बीमारी फैलाने वाला बेसिलस एंथ्रेसिस बैक्टीरिया है इसे आसानी से जैविक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। सन् 2001 में अमेरिका मे एक पोस्ट के जरिए आतंकवादियों ने इसे फैलाने की कोशिश की थी जिससे लाखों अमेरिकी दहशत में आ गए थे। यदि हमारे पास इन बीमारियों का एंटीडोज नहीं है तो इनको रोकना दुनिया के लिए गंभीर संकट वाला साबित हो सकता है। 

जैविक आतंकवाद दुनिया में फैलने से रोका जा सके, इसके लिए कई विश्व सम्मेलन किए गए हैं। सर्वप्रथम 1925 में जिनेवा प्रोटोकॉल के तहत दुनिया के कई देशों ने जैविक हथियारों के खतरे एवं नियंत्रण पर बातचीत प्रारंभ की थी।

सन् 1972 में बायोलॉजिकल विपेन कन्वेंशन की स्थापना हुई। भारत इसका सदस्य 1973 में बना। आज लगभग 182 देश इसके सदस्य देशों में शामिल है। 10 अप्रैल, 1972 को चीन ने संधि पर हस्ताक्षर किए और 9 फरवरी 1973 को इसकी पुष्टि की। जैव हथियार के वाहक के रूप में लगभग 200 प्रकार के वायरस, बैक्टीरिया, फंगस हमारे पर्यावरण में उपस्थित हैं।

आतंकवाद के इस नवीन रूप से निपटने के लिए दुनिया को अपनी तैयारी में और तेजी लाने की आवश्यकता है। भारत में डर और आतंक के इस जैविक रूप से निपटने के लिए गृह मंत्रालय एक नोडल एजेंसी है साथ ही रक्षा मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय, डीआरडीओ इत्यादि मुस्तैदी से निपटने का कार्य कर रहीं है।

आने वाला समय दुनिया के लिए चुनौतियों भरा है। दुनिया के वैज्ञानिकों को इस खतरे से निपटने के लिए तैयार रहना होगा। दुनियाभर की सरकारों को वाइल्ड लाइफ हेल्थ सेण्टर, फॉरेंसिक सेण्टर, पर्यावरण स्वास्थ्य के साथ औषधियों और टीकों पर और अधिक शोध की आवश्यकता है। 

संकट की इस घडी़ में जब पूरी दुनिया कोविड-19 जैसी जानलेवा महामारी से जूझ रही है....

world biodiversity day 2020 biological terrorism bioterrorism agents weapons preparation highest risk history
संक्रमण के फैलाव को रोकना दुनिया के लिए एक चुनौती बन चुकी है। - फोटो : pixabay

मानवता को ताक पर रख कर यदि हम शांति की कामना करते हैं, तो वह व्यर्थ ही साबित होती है। आज भी चेचक, हैजे, प्लेग जैसी बीमारियों को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सका है। इस तरह के संक्रमण से लड़ने के लिए सेना और चिकित्सा सेवाओं को और मुस्तैद रहने की जरूरत है।

नए और जटिल तरह के इन युद्धों से भयावह स्थिति पैदा हो सकती है। जीन इंजीनियरिंग इनके विकास में प्रयोग की जाती है। संकट की इस घडी़ में जब पूरी दुनिया कोविड-19 जैसी जानलेवा महामारी से जूझ रही है। लाखों लोग अपनों को खो चुके हैं। संक्रमण के फैलाव को रोकना दुनिया के लिए एक चुनौती बन चुकी है।

दुनिया भर के लोग इस महामारी के रहस्य को जानने के कयासों में लगे हैं। कभी अमेरिका चीन पर, कभी चीन अमेरिका पर अपनी धाक जमाने की कोशिशों में लगा हैं। कोरोना महासंकट को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है।

चीन के वुहान से फैला वायरस दुनिया के अधिकांश देशों को अपनी चपेट में ले चुका है। यही कारण है कि दुनिया को यह सोचने पर विवश होना पडा है कि कही यह वायरस कोई जैविक हथियार की तैयारियों का परिणाम तो नहीं जो दुनिया को खतरे में डालने वाला है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन भी दुनिया को इन वायरस, बैक्टीरिया या फंगस के तौर पर जैविक हथियार की मौजूदगी के बारे में पहले भी आगाह कर चुका है। हालांकि यह कहना कि कोविड-19 एक जैविक हथियार है, थोड़ी जल्दबाजी होगी।

दुनिया के लिए यह गंभीर चिंतन का विषय है। इस तरह के जैविक खतरों से निपटने के लिए पूरे देश को एकजुटता के साथ काम करना होगा। सरकार का सहयोग एवं समर्थन करना होगा, ताकि सब मिलकर आने वाले ऐसे मानवीय संकटों से बाहर आने में सक्षम हो सके। जिससे विकास का बाजार कब विनाश के बाजार में तबदील हो जाता है पता ही नहीं चलता। जैविक आतंकवाद न केवल मानव जाति के अस्तित्व के लिए अपितु सम्पूर्ण मानवता के लिए भी खतरा है।

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed