जलवायु परिवर्तन ने बदला ऋतु चक्र, अमेरिका छोड़ रहे पक्षी
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हाल ही में किए गए दो अलग-अलग अध्ययन जलवायु परिवर्तन को लेकर हमें काफी सचेत करने वाले हैं। एक अध्ययन जहां यह बताता है कि अमेरिका में तापमान बढ़ने से प्रवासी पक्षी तेजी से समय पूर्व अपना बसेरा छोड़ रहे हैं, जबकि दूसरा अलग शोध इस शोध के दावे की लगभग पुष्टि करता हुआ बताता है कि जलवायु परिवर्तन समय से पहले वसंत ला रहा है, जिससे ग्रीष्मकाल और अधिक शुष्क हो सकता है।
क्या कहती है रिसर्च?
विगत् माह नेचर पत्रिका में यूएसए की फोर्ट कॉलिन्स, स्थित कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी, के मछली, वन्यजीव और संरक्षण जीवविज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर काइल जी. हॉर्टन के नेतृत्व में प्रकाशित शोध के मुताबिक यह बात सामने आई है कि संयुक्त राज्य अमेरिका से पक्षियों का बहुत तेजी से समय पूर्व पलायन हो रहा है।
हाल के दशकों में पक्षी पहले से अधिक पलायन कर रहे हैं, जो भोजन और घोंसले के निर्माण चक्र को बाधित कर सकता है। शोधकर्ताओं का दावा है कि इसका कारण जलवायु परिवर्तन हो सकता है। पक्षियों का यह पलायन संभवत: उच्च तापमान के कारण है, जो प्रति दशक औसतन आधा डिग्री सेल्सियस के आसपास बढ़ गया है।
विगत् 24 वर्षों के डाटा का अध्ययन करने पर शोधकर्ताओें ने पाया कि गर्म मौसम के चलते समय पूर्व पलायन का अनुमान लगाया जाता है। जलवायु परिवर्तन ने प्राथमिक उत्पादकता में फेनोलॉजिकल बदलावों को प्रेरित किया, जिससे कई जीवों के लिए पारिस्थितिकी तंत्र संरचना और कार्य पर व्यापक प्रभाव डालने वाले पौष्टिकता संबंधी मिसमैच होते हैं।
शोधकर्ताओं ने तापमान में परिवर्तन करने के लिए सन्निहित संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर एक रात के समय एवियन प्रवासन प्रणाली की प्रतिक्रिया को निर्धारित करने के लिए मौसम निगरानी रडार द्वारा एकत्र किए गए 24 वर्षों का दूरस्थ सेंसर्ड डेटा का उपयोग किया।
शोधकर्ताओं ने पाया कि औसत देशांतर गमन का समय सर्वाधिक वसंत और शरद ऋतु में उन्नत हुआ, और ये परिवर्तन आमतौर पर उच्च अक्षांशों पर अधिक तेजी से होते थे।
क्या हो रहा है असर?
वसंत और शरद ऋतु के दौरान बढ़ी गर्मी पक्षियों के समय पूर्व देशांतर गमन की भावी सूचक थी। एक अन्य शोध में यह बात सामने आई है कि जलवायु परिवर्तन समय से पहले वसंत ला रहा है, जिससे ग्रीष्मकाल और अधिक शुष्क हो सकता है।
सिनो-फ्रेंच इंस्टीट्यूट फॉर अर्थ सिस्टम साइंस, कॉलेज ऑफ अर्बन एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज, पेकिंग यूनिवर्सिटी, बीजिंग के जू लियान के नेतृत्व में हुआ यह शोध साइंस एडवांसेस पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
अध्ययन में कहा गया है कि लंबे समय तक मौसम बढ़ने से मिट्टी की नमी वाष्पीकरण के माध्यम से खो जाती है। जलवायु परिवर्तन के चलते कैलेंडर वर्ष में वसंत की शुरुआत जल्दी हो रही है, जिससे पौधे लंबे समय तक विकसित हो सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप उत्तरी गोलार्ध के अधिकांश भाग में अधिक सूखी मिट्टी और गर्म ग्रीष्मकाल हो सकता है।
जैसे-जैसे सर्दी कम होती जाती है, वैसे वैसे पेड़ों की शाखाओं से पत्तियां बाहर निकलने लगती हैं, पेड़ तेजी से मिट्टी से पानी खींचते हैं और इसे आकाश में ले जाते हैं - इस प्रक्रिया को वाष्पीकरण के रूप में जाना जाता है। लेकिन जब यह हरियाली कैलेंडर वर्ष में पहले शुरू होती है, तो वैज्ञानिकों को चिंता होती है कि पेड़ मिट्टी से अधिक नमी चूस सकते हैं।
मिट्टी की नमी में कमी सतह की ऊर्जा संतुलन को बदलकर हीटवेव की आवृत्ति और तीव्रता को बढ़ा सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि समय पूर्व पेड़ों पर हरियाली का संकेत निकलता है कि गर्मियों की मिट्टी और सूखी हो सकती है। जो इस बात का भी सूचक है कि गर्मियों की सतही हवा का तापमान में परिवर्तन अधिक गर्मी बढाएगा।
शोधकर्ताओं ने वर्ष 1982-2011 के दौरान उत्तरी गोलार्ध में वनस्पति आवरण को बढ़ाने वाले अवलोकन प्रमाण प्रदान किए हैं, जिनसे मालूम पड़ता है मिट्टी की अतिरिक्त नमी की कमी हो आगे गर्मी बढ़ाती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।