कोविड-19 लोकडाउन के बाद : वैश्विक परिदृश्य में कैसी होगी भारतीय अर्थव्यवस्था? कैसे होंगे बदलाव?
कोविड-19 के कारण वैश्विक स्वास्थ्य संकट भी एक अहम् मुद्दा बन गया है जिस पर गंभीरता से विचार-विमर्श कर समाधान निकालना अति आवश्यक है। लॉकडाउन होने के कारण संपूर्ण देश में अधिकांश लोग अपने अपने घरो में रहकर इस महामारी से सुरक्षित रहना ही वर्तमान में सबके हित में है और लोगों के पास भोजन, पानी ,दवाइंया और अनेक बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं।
ये सारी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार के आपसी सांंमजस्य से ही सार्थक हो पाया है परंतु इस चक्र का अहम किरदार हमारे देश के अनेक मेहनती किसान हैंं जिन्होंने अपनी लगन और मेहनत से हर तरह की फसल उगाने में सक्षम हैंं।
कृषि भारतीय अर्थववस्था का मुख्य आधार है जिसके चलते आज के इस चुनौती पूर्ण घड़ी में भी घर-घर में अनाज की उपलब्धता है और इंसान का जीवन सुचारु रूप से चल रहा है।
एक अध्ययन बताता है कि भारत में राष्ट्रीय जरूरत का तीन गुना से भी अधिक अनाज का भंडार होने के बाद भी 96 प्रतिशत प्रवासी मजदूरों को अनाज नहीं मिल पा रहा है। लॉकडाउन के चलते अनगिनत भूखे प्यासे मजदूूर हजारों किलोमीटर का सफर पैदल चलकर पूरा करने के लिए प्रयासरत् हैं कुछ इस कार्य में सफल रहे और कुछ लोगों ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
देश को आर्थिक संकट से निकालने में कृषि से संबंधित....
इस संकट की घड़ी में लोगों ने शहरों से गांवों की और अपना रुख किया जिसमें राज्य सरकार ने अथक प्रयास करते हुए उन्हें भोजन ,पानी और शिविर का प्रबंध किया वो प्रशंसनीय है परंतु इस घटना से कृषि से जुड़ी अनियमितताएं सामने आई।
देश को आर्थिक संकट से निकालने में कृषि से संबंधित अनियमितताओं जैसे किसानो को अनाज का सही मूल्य न मिलना, मुनाफाखोरों की दखलंदाजी, लोन की जटिल प्रक्रिया ,शिथिल आधारभूत ढांचा को दूर करने की जरूरत है।
अगर इन सारी कमजोरियों को दूर कर सही दिशा-निर्देश,सरकारी नीति-निर्माण, आधारभूत सुविधाएं, लोन संबंधी जानकारी से देश में कृषि के योगदान को बढ़ाया जा सकेगा।जिसके लिए किसानोंं को हर परिस्थिति में तरह तरह की फसल उगाने के लिए प्रोत्साहित करना ,कम कीमतों में बीज ,औजार और पानी की पूर्ण व्यवस्था करानी चाहिए कृषि के नए नए तकनीकों के बारे में समय समय पर अवगत कराए और उसके क्रियान्वयन को सुनिश्चित करेंं।
अधिकतर देखा गया है की किसान अनपढ़ होते हैंं जिसके चलते उनके कार्य को न सिर्फ समाज अपितु पूूरे देश में हीन भावना से देखा गया है और देश के विकास में कमतर ही आंंका गया है। जबकि सच्चाई कुछ और ही है। आज के युवा कृषि विषय को चुनकर बड़े अफसर के पद पर प्रतिष्ठित होना चाहते हैंं और इसकी धरातली गहराइयों को नहीं समझते और न ही खेती किसानी करने को लेकर इच्छुक रहते हैंं परन्तु किसान अपना तन मन धन से हर विषम परिस्थिति में भी अच्छे फसल उगाने में प्रयासरत रहते हैंं जिसके फलस्वरूप देश की जनता को दो वक्त का भोजन मिल पाता है।
लेकिन किसानोंं की इस दशा को नई दिशा प्रदान की जा सकती है, जैसे फसल कटाई के बाद भण्डारण के लिए अनाज मंडियों में सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक मुलभुत सुविधा होना, उचित मूल्य पर अनाज खरीदी बिक्री, अनाज का सुनियोजित माध्यम से वितरण कर अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचाना। इस पूूरे चक्र को कृषि आपूर्ति शृंखला के प्रबंधन के माध्यम से कृषि के पूर्ण उद्देश्योंं की प्राप्ति संभव है जिसके माध्यम से कृषि को देश के विकास की मुख्य इकाई के रूप में सामने लाया जा सकेंं।
अगर किसान, सीधे फूड प्रोसेसिंग कम्पनीज के संपर्क स्थापित करेंं जिससे वे अपने फल,सब्जियांं और अनाज को काम कीमतों में इनके लिए मुहैया करा पाए और अपने फसलों को ख़राब होने से रोक सके इसके लिए कृषि आपूर्ति श्रृंखला के प्रबंधन और क्रियान्वयन की आवशयकता होगी।
कृषि के साथ-साथ और कई विकल्प है, जैसे मछली पालन ,पशुपालन मशरूम की खेती, मधुमक्खी पालन है जो युवाओ को स्वयं का व्यवसाय शुरू करने में काफी सहायक होगा जिससे वो न सिर्फ देश में कृषि का विकास विस्तार करेंगे अपितु अनेक युवाओ को रोजगार उपलब्ध कराएंगे।
लॉकडाउन के बाद एक और चुनौती सामने आएगी, वो है युवाओं की बेरोजगारी.....
लॉकडाउन के बाद एक और चुनौती सामने आएगी वो है युवाओं की बेरोजगारी जिससे निपटने के लिए युवा वर्ग स्वयं ही सक्षम है। वर्तमान में माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा अनेक स्टार्टअप संबंधी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिसके माध्यम से युवाओ को स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए पूंजी प्रदान करता है। आजकल के युवाओं के पास नए-नए बिजनेस आइडियाज होते हैं परंतु पूंजी के आभाव में उनका पूर्ण रूप से क्रियान्वयन नहीं हो पाता है।
सुचना और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बहुत विकास हुआ है, जिसके तहत डिजिटल भारत का निर्माण संभव हुआ है ये सरकारी विभागों और भारतीय लोगोंं के एक साथ लाने का माध्यम है, जिससे लोगों को घर बैठे हुए ही सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करना, पैसे से संबंधित लेन-देन करना आदि शामिल है।
सूचना तकनीक के विकास से छोटे-बड़े उद्योग ,स्कूल,कॉलेज ,हॉस्पिटल सभी जगह ऑनलाइन माध्यम से कार्य किया जाता है जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है और इसका सकारात्मक प्रभाव उत्पादकता एवं गुणवत्ता पर भी होता है।
आज हर उपभोक्ता ई कॉमर्स और ई-कॉमर्स कम्पनीज से ऑनलाइन अपने दैनिक जीवन का लगभग अधिकांश सामान मंगवाते है और घर बैठे सुविधाओं का आनंद लेते हैं। ऑनलाइन सामान बेचने वाली ये कंपनिया सीधे उत्पादक से खरीद कर अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचाते हैंं, जिससे इन्हें काफी मुनाफा होता है।
आज हर कंपनी अपने कस्टमर्स के लिए हर तरह के सामान जैसे कपडे़, जूूते ,बर्तन, खाने पीने के खाद्य पदार्थ, खिलौने घर तक पहुंचा रही है। इसके साथ ही खाना घर-घर पहुचाने के लिए मोबाइल एप से ऑर्डर लेकर उपभोक्ता को मुहैया कराते हैं। ये कंपनियांं अपने बिजनेस को सुचारु रूप से चलाने के लिए अधिकांश युवाओ को नौकरी देती है जिससे काफी हद तक बेरोजगारी को दूर किया जा सकता है।
हमारे देश में होटल और रेस्तरां हर छोटे-बड़े शहरोंं में स्थित है और समाज के अधिकांश लोग यहां खाना-पीना पसंद करते हैं और ये उनकी दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुका है पर आज की विषम परिस्थिति में ये संभव नहीं है जिसके चलते इस क्षेत्र से जुड़े व्यापारियों ने होम डिलीवरी सुविधा शुरू की।
वर्क फ्रॉम होम कल्चर से आज के युवा अपनी पहचान बना पाएंगे...
प्राइवेट कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम का नया कल्चर शुरू किया जिससे युवा अपना कार्य घर पर ही रहकर कार्य कर सके और कंपनी का कार्य सुचारु रूप से हो सके। ऐसे में वर्क फ्रॉम होम कल्चर से आज के युवा अपनी पहचान बना पाएंगे और कंपनी के लिए भी कुछ बेहतर कर पाएंगे। जो अंततः देश के विकास में सहयोग देगा।
हमारे देश में उत्पादन करने वाली बहुत सारी ऐसी कंपनियां है जो केवल शहरो में ही अपने उत्पाद को बेचती है लेकिन लॉकडाउन के बाद ये कंपनियां शहरों के साथ साथ गांव की और रुख करे जिससे इन्हेंं अपने सामान को बेचने के लिए सही बाजार नए उपभोक्ता आसानी से मिल जाएंगे ये कंपनी की नीतियों पर निर्भर करता है की वे इन नए अवसरोंं का कितना लाभ ले सकते हैं।
विश्व के विकसित देशों में रिटेल सुपर बाजार से घरेलूू सामान खरीदने का चलन है। भारत में भी वैश्वीकरण के प्रभाव से कई देशी और विदेशी कंपनी के रिटेल मॉल और सुपर बाजार व्यापक रूप से छोटे और बड़े शहरों में फैले हुए हुए हैंं । उपभोक्ताओं को भी एक छत के नीचे सारा सामान उपलब्ध होने से सुपर बाज़ारोंं से खरीददारी करना पहली पसंद है।
लॉक डाउन के कारण सभी रिटेल माल्स बंद होने से यहांं व्यापारियों को काफी परेशानी आ रही है लेकिन वे इस दौरान अगर अपने उत्पादों को बेचने के लिए अपने कस्टमर्स को होम डिलीवरी की सुविधा दे जिससे उनके बिक्री में आई गिरावट को रोका जा सके। लेकिन अभी तक की स्थिति से भारतीय अर्थवयवस्था को बड़ा झड़का लगा है क्योकि यह क्षेत्र विदेशी निवेश कर निर्भर थी।
सर्विस सेक्टर में भी काफी बदलाव आए हैं। आजकल बैंकिंग सम्बन्धी लेनदेन ऑनलाइन माध्यम से किए जाते हैंं जिससे कस्टमर्स के समय की बचत होती है और वो पूरी तरह से आत्मनिर्भर होकर कार्य कर सकते हैंं। अब वो दिन गए जब छोटेे-छोटे लेंन-देन के लिए बैंक में जाकर लम्बी क़तार में रहकर काम कराया करते थे और बैंकिंग की जटिलताओं से होकर गुजरना करता पड़ता था।
लॉक डाउन के दौरान भी बैंक अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही है और अपने कस्टमर्स को हर संभव अच्छी सर्विसेज प्रदान कर रही है। जिससे उनके कस्टमर्स संतुस्ट हो और उनकी मार्केट में अच्छी छवि बनींं रहे।
शिक्षा प्रदान करने के ये नए विकल्प युवाओ को बेहतर रोजगार दिला सकते हैं....
भारतिय शिक्षा प्रणाली पूूरे विश्व में तीसरे स्थान पर है। शिक्षा से संबधित क्षेत्र भी इस वैश्विक महामारी से अछूता नहीं है। जहां लॉकडाउन के चलते स्कूल और कॉलेजों को पूरी तरह से बंद किया गया है, परंतु शिक्षा प्रदान करने के कई नए विकल्प सामने आए हैं जैसे शिक्षक घर पर ही रहकर अपने विद्यार्थियों को ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई करा रहे है, जिससे उनकी पढ़ाई बाधित न हो, जिसमें से प्रमुख रूप से ऑनलाइन वीडियो लेक्चर, ऑनलाइन नोट्स प्रदान करना, प्रमुख साइट्स और मोबाइल ऐप जैसे गूगल क्लासरूम, माइक्रोसॉफ्ट टीम, वेबिनार, कॉन्फ्रेंसिंग है।
शिक्षा प्रदान करने के ये नए विकल्प युवाओ को बेहतर रोजगार दिला सकते हैं। साथ ही भविष्य में स्वयं का व्यवसाय भी ऑनलाइन माध्यम से कर सकते हैं। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है की इ-लर्निंग के क्षेत्र में बहुत अवसर है और आगे चलकर ये देश की युवाओं को शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान करेगा।
सूचना तकनीकी के प्रभाव ने बैंकिंग कार्य को बहुत आसान बनाया है। आजकल मोबाइल के माध्यम से भी पैसें से संबंधी सारे लेन देन संभव है अब दूर बैठे अपने बच्चो औंर रिश्तेदारों को मिनटों में पैसें का लेन-देन घर बैठे ही हो जाता है।
हमारे देश में अनेक प्रकार के उद्योग और उनसे जुड़े व्यवसाय हैं जो लॉकडाउन के बाद भी सुचारू रूप से कार्य करके देश की अर्थवयवस्था में अपना योगदान देंगे। जैसे फास्ट मूविंग कंज्यूमर कंपनीज, फ़ूड प्रोसेसिंग कम्पनीज, फ्रूट्स, वेजटेबल्स, टेक्सटाइल्स ,मेडिसिन्स, ये कंपनी ऑनलाइन ऑर्डर से लोगोंं को घर पहुंच सेवा प्रदान करेगी जिससे ये कम्पनियांं मुनाफे में रहेगी और अपना बिजनेस सुचारू रूप से चला पाएंगी।
लॉकडाउन के कारण ऑटोमोबाइल सेक्टर में गिरावट देखने को मिली है, लेकिन सरकार ने इन कंपनियों को अपने उत्पाद बेचने के लिए ऑनलाइन माध्यम का रास्ता सुझाया है, जिससे ऑटोमोबाइल डीलर सीधे उपभोक्ता से संपर्क कर उनके सारे सवालों के जवाब दे पाएंगे और उनके संदेह को दूर कर सकेंगे।
कोरोना वायरस के प्रकोप से हमारे देश के लोग भी प्रभावित हुए हैंं पर सही मेडिकल सुविधाएं और सही समय पर लॉकडाउन होने के चलते इस परेशानी का समाधान करने का प्रयास जारी है लेकिन भविष्य में भारत में पब्लिक हेल्थ सेंटर की संख्या को न केवल बढ़ाना है बल्कि अत्याधुनिक मेडिकल तकनीक से लैस हॉस्पिटल का निर्माण करना होगा जिसके लिए सरकार को इस दिशा में फण्ड निवेश करना होगा। वर्तमान में कोरोना से निपटे के लिए बड़े पैमाने पर जांंच और इलाज आवश्यक है पर भारत में स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार करने की आवश्यकता है।
भारत का इतिहास, संस्कृति और प्रसिद्ध स्थान, मंदिर, इमारते इत्यादि भारत के पर्यटन का अभिन्न हिस्सा है, जिसमें भी काफी बदलाव देखने को मिलेंगे। पहले देश-विदेश से पर्यटक,सैलानी भारत के विभिन्न स्थानों की यात्रा करते थे जिससे यहां के होटल्स, रिसॉर्ट्स, स्थानीय निवासियों का भरण-पोषण होता चला आ रहा था लेकिन लॉकडाउन के बाद पर्यटन में कमी आएगी जिससे स्थानीय लोगों को नुकसान होगा लेकिन स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी और देश-विदेश के सैलानियों के आने से पर्यटन के क्षेत्र में फिर से गति आएगी और विकास होगा।
भारत के कई विकसित एवं विकासशील देशों के साथ व्यापार, ऊर्जा, उत्पादों के आयत-निर्यात, जैसे कई क्षेत्रों में जुड़े रहने के कारण अर्थव्यवस्था बहुत ही व्यापक रूप से केवल प्रभावित हुई है। हमारी अर्थव्यवस्था को संभलने में कुछ समय जरूर लगेगा परंतु धीरे- धीरे भारतीय अर्थवयवस्था पटरी पर आकर फिर से तेज गति से आगे बढ़ेगी और विश्व में नए कीर्तिमान स्थापित करेगी।
इस वैश्विक महामारी से निपटने के बाद देश की अर्थवयवस्था को पुर्नजीवित करने के लिए देश के हर नागरिक को सामने आना चाहिए और भारत को इस आर्थिक संकट से बाहर निकाल कर नए भारत के निर्माण की और अग्रसर रहेंगे।
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