क्या बिहार में बदलेगा सीएम का चेहरा, हो सकता है भाजपा का मुख्यमंत्री?
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बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे तीन दिन पहले आए एग्जिट पोल के एकदम उलट आ रहे हैं। मौजूदा परिवेश में पिछले दो-तीन महीने से संभावना यह जताई जा रही थी कि बिहार में इस बार एंटी-इनकंबेंसी फैक्टर काम कर रहा है और नीतीश कुमार दोबोरा मुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं ले पाएंगे। इसके बावजूद एनडीए यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गंठबंधन ने नीतीश के नेतृत्व में चुनाव लड़ने का जोखिम उठाया। कहा जा रहा है कि एनडीए की कामयाबी का श्रेय केवल और केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को है।
इस विधानसभा चुनाव में अपना जनाधार गंवा रहे नीतीश कुमार के आगे नरेंद्र मोदी ढाल बनकर खड़े हो गए। हमेशा की तरह धुआंधार चुनावी रैलियां की। मोदी ने केवल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रतिष्ठा को नहीं बचाया, बल्कि खुद भाजपा को राज्य में बिग ब्रदर की भूमिका में खड़ा कर दिया। जाहिर है इस बार चुनाव के नतीजों ने नीतीश कुमार के कद को घटा दिया है। इसके बावजूद अगर वह मुख्यमंत्री बने तो कमजोर या कठपुतली सीएम के रूप में ही कुर्सी पर बैठेंगे।
चुनाव परिणाम का रुझान देखकर भाजपा नेताओं के सुर भी बदल गए हैं। केंद्रीय मंत्री से लेकर प्रवक्ता तक बार-बार यही रट लगा रहे हैं, “हम बाबू नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री बनाएंगे। हम बाबू नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री बनाएंगे।” मजेदार बात यह है कि यह वाक्य अमूमन हर भाजपा नेता कई-कई बार बोल रहा है।
दरअसल, इस वाक्य के ज़रिए भाजपा के लोग महाराष्ट्र की शिवसेना को संदेश दे रहे हैं कि आपने भले गठबंधन का धर्म नहीं निभाया और देवेंद्र फड़णवीस के नेतृत्व में चुनाव लड़ा, लेकिन सत्ता के लिए अपने सिद्धांत से समझौता कर लिया और चुनाव से पहले हुए समझौते को तोड़ दिया, लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे, जिसके नेतृत्व में चुनाव लड़े हैं, उसी को सीएम बनाएंगे।
भाजपा नेताओं के इस वाक्य में 'बनाएंगे' शब्द में बहुत गूढ़ अर्थ छिपा हुआ है। इस वाक्य के साथ नीतीश कुमार को अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश दिया जा रहा है कि इस बार आप अपने दम पर मुख्यमंत्री नहीं बन रहे, क्योंकि आपकी सीटे कम हो गई हैं। इस बार हमारी सीटें बढ़ गई हैं, फिर भी हम आपको आपको मुख्यमंत्री बना रहे हैं। यह ध्यान रखिए कि आपको सीएम बनाया जा रहा है। आप खुद सीएम नहीं बन रहे हैं। यह नीतीश कुमार पर एक तरह का मनौवैज्ञानिक दबाव होगा, जिसका इस्तेमाल भाजपा भविष्य में कर सकती है।
बिहार विधान सभा चुनाव में भाजपा का यह अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। या कहें कि 2015 के चुनाव में जितनी सीटें जनता दल यूनाइटेड ने जीता था, उतनी सीट भाजपा जीतती दिख रही है। इससे इस बात की भी सुगबुगाहट होने लगी है कि निकट भविष्य में बिहार को भाजपा का अपना मुख्यमंत्री बनाने का बहुप्रतीक्षित सपना फलीभूत हो सकता है। भाजपा नीतीश कुमार को केंद्र सरकार में बड़ा पद ऑफर करके दिल्ली बुला सकती है, क्योंकि रामविलास पासवान के निधन से एक बर्थ तो मोदी सरकार में रिक्त ही है। भविष्य में उस बर्थ को नीतीश को दे दिया जाए तो हैरानी नहीं होगी।
जनतांत्रिक गंठबंधन का हिस्सा रहे दूसरे दल लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान पहले से ही नीतीश कुमार का विरोध कर रहे है और कहते रहे हैं कि नीतीश को वह मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे। इसी मुद्दे पर उन्होंने एनडीए के साथ चुनाव नहीं लड़ा। उन्होंने चुनाव प्रचार में नरेंद्र मोदी या अमित शाह के बारे में कोई नकारात्मक बात नहीं की। इसीलिए अगर नीतीश को अंकुश में रखने के लिए भाजपा चिराग का इस्तेमाल करे तो कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए।
भाजपा के चाणक्य अमित शाह अपने खराब स्वास्थ्य के चलते इस बार बिहार चुनाव प्रचार में उतने सक्रिय नहीं थे। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी कमी महसूस नहीं होने दी और इस चुनाव में कई रैलियों को संबोधित किया। उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि भाजपा और साथी दलों के नेताओं को चुनाव जीताने का दमखम रखते हैं, क्योंकि मतदाताओं को खींचने का उनका जादू अब भी बरकरार है।
नीतीश की अलोकप्रियता के बावजूद एनडीए को को एक और बार सत्ता दिलाने का काम केवल और केवल मोदी ही कर सकते हैं। यही वजह है कि कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल यूनाइटेड को आजमा चुकी बिहार की जनता अब भाजपा से उम्मीद लगा रही है। मंगलवार शाम पांच बजे तक वोटों की गिनती पूरी नहीं हुई थी, इसलिए कोई पक्ष पूरे दावे के साथ कुछ नहीं कह सकता था कि वही जीतेगा। लेकिन आमतौर पर यही माना जाता रहा है कि शुरुआती चार-पांच घंटे जिस दल या गठबंधन को जिस तरह का जनादेश मिलता है, वह जनादेश लगभग बरकरार रहता है।
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