'तुम एक स्त्री हो तो तुम ज्यादा आजाद और स्वावलंबी जीवन जी सकती हो अगर तुम्हारे पास अपना पैसा है। तुम जीवन के बाकि दुखों से मुक्ति तो नहीं पा सकती, लेकिन उनसे ज्यादा आत्मसम्मान और आत्मविश्वास से लड़ सकती हो अगर तुम आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो।'
आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हों महिलाएं: जानिए मोदी सरकार की खास योजनाओं के बारे में
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वर्किंग वुमेन हॉस्टल स्कीम
देश में कई महिलाएं रोजगार की तलाश में अपने घर छोड़कर बड़े शहरों में रहती हैं। कामकाजी महिलाओं की परेशानियों को गंभीरता से समझते हुए सरकार लंबे समय से एक योजना चला रही है। योजना का नाम है 'वर्किंग वुमन हॉस्टल स्कीम'। इसका मकसद है महिलाओं को सुरक्षित और सस्ता आशियाना उपलब्ध कराना है, जिससे वह बिना किसी डर के रह सकें, आगे बढ़ सकें। इस हॉस्टल में तलाकशुदा, विधवा या अकेली रहने को मजबूर लड़कियां सुरक्षित रह सकती हैं। आवेदक की उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। योजना के तहत कामकाजी महिलाओं के बच्चों (लड़कियों को 18 वर्ष की आयु तक और लड़कों को पांच वर्ष की आयु तक) को अपनी मां के साथ समायोजित किया जा सकता है।
फ्री सिलाई मशीन योजना
फ्री सिलाई मशीन योजना का शुभारंभ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा देश की महिलाओं को रोजगार प्रदान करने के लिए किया गया है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार देश की गरीब और श्रमिक महिलाओं को मुफ्त में सिलाई मशीन उपलब्ध कराती है। इस फ्री सिलाई मशीन योजना से महिलाएं सिलाई मशीन प्राप्त करके घर बैठे अपना काम शुरू कर सकती हैं और अच्छी आमदनी अर्जित कर सकती हैं। इसका लाभ देश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं उठा सकती हैं। ध्यान रहे कि इस योजना के अंतर्गत सिर्फ 20 से 40 वर्ष की आयु की महिलाएं ही आवेदन कर सकती हैं।
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प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान भारत सरकार की पहल है, जिसके तहत प्रत्येक माह की निश्चित नौ तारीख को सभी गर्भवती महिलाओं को व्यापक और गुणवत्तायुक्त प्रसव पूर्व देखभाल प्रदान करना सुनिश्चित किया गया है। इस अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उनकी गर्भावस्था के दूसरी और तीसरी तिमाही की अवधि (गर्भावस्था के चार महीने के बाद) के दौरान प्रसव पूर्व देखभाल सेवाओं का न्यूनतम पैकेज प्रदान किया जाएगा। इसके तहत चिकित्सकों व विशेषज्ञों द्वारा दूसरी या तीसरी तिमाही की सभी गर्भवती महिलाओं को कम से कम एक प्रसव पूर्व जांच सुनिश्चित करना हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) देश में तीन करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व देखभाल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया है।
वन स्टॉप सेंटर स्कीम
भारत सरकार ने एक अप्रैल 2015 को पूर्णत: वित्तपोषित वन स्टॉप सेंटर योजना लागू की थी। हिंसा प्रभवित महिलाओं का समर्थन करने के लिए इसकी शुरुआत की गई। इस योजना को मूल रूप से 'सखी' नाम से जाना जाता है। महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा बनाई गई इस योजना के जरिए पूरे देश में सिलसिलेवार तरीके से निजी और सार्वजनिक दोनों स्थानों पर हिंसा से प्रभावित महिलाओं को एक ही जगह पर सबको लाकर समर्थन और सहायता देने के लिए कई वन स्टॉप सेंटर बनाए जा रहे हैं। यह एक ऐसी व्यवस्था जहां हिंसा से पीड़ित कोई भी महिला सभी तरह की मदद एक ही छत के नीचे पा सकती है। इन सेंटर्स को अस्पतालों में चलाया जाता है, जहां मेडिकल ऐड, लीगल ऐड, अस्थायी रूप से रहने के लिए जगह, केस फाइल करने के लिए मदद, आदि सब कुछ एक ही जगह पर उपलब्ध होती है।