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दो कमरे के इस घर से शुरू हुई थी फ्लिपकार्ट, अब वॉलमार्ट का मिला साथ, जानिए पूरी कहानी

Thu, 10 May 2018 12:16 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 10 May 2018 12:16 PM IST
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this is how flipkart become the leading ecommerce company in india
देश में ई-कॉमर्स सेक्टर की दिग्गज कंपनी फ्लिपकार्ट इस बात का प्रमाण है कि सपने देखने और उन्हें पूरा करने की योग्यता और क्षमता हो तो कुछ भी संभव है। यह पहली कंपनी है जो स्टार्टअप के रूप में शुरू हुई और एक अरब डॉलर से ज्यादा के कारोबार का लक्ष्य हासिल किया और निरंतर आगे बढ़ती जा रही है। लेकिन यह बहुतों को मालूम नहीं होगा कि इसकी शुरुआत दो बेडरूम के फ्लैट से हुई थी। 

 

2007 में हुई थी स्थापना

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आईआईटी दिल्ली से ग्रेजुएट 24 साल के सचिन बंसल और 23 साल के बिन्नी बंसल ने 2007 में बंगलूरू में इसकी स्थापना की थी। हालांकि दोनों चंडीगढ़ के रहने वाले हैं लेकिन इससे पहले दोनों कभी मिले नहीं। आईआईटी सचिन सीनियर थे और बिन्नी जूनियर। बंसल बंधुओं में एक समानता यह है कि दोनों साथ में अमेजॉन में काम कर चुके थे।

शुरुआत में बेचते थे किताबें

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शुरुआत में यह ई-कॉमर्स कंपनी सिर्फ किताबें बेचती थी। जापान के सॉफ्टबैंक द्वारा इसकी 20 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के बाद कंपनी के सपनों को सचमुच में पंख लगे। 2017 तक इस कंपनी का राजस्व 198.55 अरब रुपये हो गया। अब यह साबुन से लेकर स्मार्टफोन तक सब कुछ ऑनलाइन बेचती है। ऑनलाइन रिटेल बाजार में इसकी हिस्सेदारी 38.5 फीसदी है।
 
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एक के बाद एक अधिग्रहण

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इसने 2014 में परिधान क्षेत्र की ई-कॉमर्स कंपनी मिंत्रा का अधिग्रहण किया था। मिंत्रा ने बाद में फैशन ई-कॉमर्स कंपनी को जबोंग को खरीद लिया। 2016 में इसने भुगतान क्षत्र की स्टार्टअप कंपनी फोन पे को खरीदा। अप्रैल 2017 में ईबे के भारतीय ऑपरेशन का अधिग्रहण किया। हालांकि पिछले साल इसने प्रतिद्वंद्वी ई-कॉमर्स कंपनी स्नैपडील को खरीदने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुई।  
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एक संस्थापक की विदाई, दूसरे बने रहेंगे

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flipkart
वॉलमार्ट ने यह सौदा गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट के साथ मिलकर अंजाम दिया है। इसमें वॉलमार्ट की हिस्सेदारी 60 फीसदी और अल्फाबेट की 15 फीसदी होगी। फ्लिपकार्ट की माली हैसियत 18 से 20 अरब डॉलर आंकी गई है। इसके सह संस्थापक और नौ साल से सीईओ सचिन बंसल ने अपनी 5.5 फीसदी इक्विटी वालमार्ट को बेचकर कंपनी को अलविदा कह दिया है। दूसरे संस्थापक बिन्नी बंसल कंपनी बतौर सीईओ बने रहेंगे। उन्हें एक्जीक्यूटिव चेयरमैन की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी जा सकती है।
 
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