कश्मीर की हसीन वादियों में पिछले दो महीने से भड़की हिंसा और विरोध प्रदर्शन के बीच वहां का पर्यटन कारोबार पूरी तरह से चौपट हो गया है। स्थिति यहां तक बिगड़ गई है कि पर्यटन उद्योग में काम करने वाले लोग रोजगार की तलाश में घाटी से पलायन करने लगे हैं।
हिंसा से बेहाल कश्मीर में कैसे चौपट हो रहा पर्यटन कारोबार
जम्मू कश्मीर के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक वहां पर्यटकों की आवक एकदम से थम गई है। उनका कहना है कि राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में करीब 30 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाले पर्यटन क्षेत्र में अब कुशल कामगारों का भी संकट हो जाएगा क्योंकि लोग वहां से पलायन करने लगे हैं। ऐसा आखिर क्यों न हो, क्योंकि पिछले कई टूरिस्ट सीजन में यहां काम ठीक से चल नहीं रहा है।
हिंसा से बेहाल कश्मीर में कैसे चौपट हो रहा पर्यटन कारोबार
ज्ञात हो कि पिछले साल कश्मीर का सबसे पीक सीजन 2014 में आयी बाढ़ की वजह से प्रभावित हो गया था। इस साल वहां के कारोबारी उम्मीद लगाकर बैठे थे लेकिन श्रीनगर में चल रही हिंसा की घटनाओं की वजह से अप्रैल, मई और जून का भी टूरिस्ट सीजन यूं ही निकल गया। इसके बाद अगस्त, सितंबर और अक्टूबर का मौसम भी बिना पर्यटकों के निकल रहा है।
हिंसा से बेहाल कश्मीर में कैसे चौपट हो रहा पर्यटन कारोबार
इस मौसम में वहां सेब की तुड़ाई होती है जबकि वादी में फूल भी खिलने का यही मौसम है जिसे पर्यटक बड़े चाव से देखते हैं। हाउसबोट ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गुलाम रसूल शिया ने बताया कि इस साल गर्मी के मौसम में शिकारे की रिकार्डतोड़ बुकिंग हुई थी लेकिन अधिकतर बुकिंग कैंसिल हो गई। अभी तो और बुरे हालात हैं क्योंकि शत-प्रतिशत बुकिंग रद्द हो रही है।
हिंसा से बेहाल कश्मीर में कैसे चौपट हो रहा पर्यटन कारोबार
उनके मुताबिक भूले-भटके एक-आध पर्यटक जो यहां आते हैं, वह श्रीनगर के दो चार जगह घूम कर ही वापस लौट जाते हैं। जब वे गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग आदि घूमने की बात करते हैं तो उन्हें घुमाने से मना कर दिया जाता है। कौन जाने, कहां उनके साथ कोई हादसा हो जाए।