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यहां इंसानों का नहीं किसी और का होता है इलाज
Tue, 03 May 2016 01:17 PM IST
टीम डीजिटल/ अमर उजाला
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Updated Tue, 03 May 2016 01:17 PM IST
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अब तक आपने इंसानो और जानवरों के हॉस्पिटल देखे होंगे लेकिन क्या कभी आपने सुना है डॉल्स के हॉस्पिटल के बारे में, अगर नही तो ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में एक ऐसा हॉस्पिटल है जहां केवल गुड़ियों का इलाज होता है। यहां पर खराब, टूटी-फूटी डॉल्स को रिपेयर किया जाता हैं। यदि आप यह सोच रहे हैं कि इस डॉल्स हॉस्पिटल में कौन आता होगा तो फिर आप भी चौंक जाएंगे क्योंकि पिछले 101 सालो में इस हॉस्पिटल में 30 लाख से ज्यादा डॉल्स का इलाज हो चुका है।
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ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में इस हॉस्पिटल की शुरुआत 1913 में हारोल्ड चैपमैन ने की थी। पहले इसे जनरल स्टोर के रूप में शुरु किया गया था । उनके भाई का शिपिंग का कारोबार था और इसी के तहत जापान से डॉल्स इम्पोर्ट की जाती थीं। लाने ले जाने के दौरान डॉल्स के पार्ट टूट-फूट जाते थे, जिसे हारोल्ड ठीक किया करते थे। धीरे-धीरे उन्होंने जनरल स्टोर को एक डॉल अस्पताल का स्वरूप दे दिया। फिलहाल इस डॉल अस्पताल का संचालन हारोल्ड के पोते जियोफ कर रहे हैं।
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इस अस्पताल में डॉल्स को ठीक करने के लिए बेहतरीन एक्सपर्ट्स हैं। खास बात यह है कि एक आम हॉस्पिटल की तरह ही अलग अलग वार्ड बने हुए हैं जहां पर अलग-अलग स्पेशलिस्ट सेवा देते हैं। यहां पर मॉर्डन और एन्टीक डॉल्स के भी अलग अलग सेक्शन बने हुए है। अस्पताल की शुरुआत में यहां पर केवल डॉल्स ही ठीक की जाती थी पर जब 1930 में हारोल्ड चैपमैन के बेटे ने यहां काम संभाला तो उन्होंने यहां पर अन्य चीजों की भी रिपेयरिंग भी शुरू कर दी जैसे कि टेडी बियर, सॉफ्ट टॉयज, अम्ब्रेला, हैंड बैग आदि। लेकिन यहां की स्पेशिलिटी डॉल्स रिपेयरिंग ही है।
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गुड़ियों के इस अस्पताल की शुरुआत तो 1913 में ही हो गई थी लेकिन डॉल्स रिपेयरिंग का उनका काम 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध के समय चमका था, क्योंकि युद्ध के चलते हर देश में उस चीज़ की कमी हो गई थी जो दूसरे देशों से आती थी इसीलिए ऑस्ट्रेलिया में भी नई डॉल्स की बेहद कमी हो गई थी क्योकि वहां पर अधिकतर डॉल्स जापान से आती थीं। इसके चलते जिसके पास जो डॉल्स थी उसे उससे ही काम चलाना पड़ रहा था और जब वो खराब हो जाती तो उन्हें रिपेयर कराने के अलावा कोई रास्ता नहीं होता था।
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