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दुनिया के वो पांच शहर जहां बसना हुआ आसान, इनके बारे में नहीं जानते होंगे आप
बीबीसी हिंदी
Updated Sat, 15 Sep 2018 11:09 AM IST
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जब भी आप किसी नए देश और नए शहर में जाते हैं, तो वहां बसना एक बड़ी चुनौती होती है। मगर, दुनिया में कई ऐसे शहर हैं, जिन्होंने अपने यहां बसना आसान बना दिया है। इकोनॉमिस्ट हर साल ऐसे शहरों की रैंकिंग करती है। ये हर साल 140 बड़े शहरों के हालात की समीक्षा कर के उनकी रैंकिंग करती है कि किन शहरों में रहना ज्यादा आसान हुआ है। इसके लिए शहरों को 30 से ज्यादा पैमानों पर कसा जाता है। जैसे कि सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, खान-पान का स्तर, शिक्षा व्यवस्था, सड़कें और आवाजाही के दूसरे जरिए। इस फेहरिस्त में अक्सर दुनिया के बड़े और नामवर शहर हावी रहते हैं।
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होनोलुलू, अमरीका
ये शहर हवाई सूबे की राजधानी है। पिछले एक दशक में यहां की जिंदगी बेहतर हुई है। आज हवाई द्वीप में बसा होनोलुलू, बसने के लिहाज से अमरीकी शहरों में अव्वल है। इसकी वजह यहां की शिक्षा सुविधाएं और संस्कृति है। स्थानीय लोग कहते हैं कि दुनिया की अर्थव्यवस्था के विकास के चलते उनके शहर के हालात बेहतर हुए हैं। आज यहां शहरी जीवन के विकास पर जोर दिया जा रहा है, जो पहले नहीं था। हवाई के पुराने बाशिंदे टॉड एपो कहते हैं कि, "आखिरकार सरकार और कारोबार जगत को ये समझ में आया कि होनोलुलू के शहरी जीवन में निवेश की जरूरत है।"
टॉड एपो द होवार्ड ह्यूज कॉरपोरेशन के लिए काम करते हैं। वो कहते हैं कि, "होनोलुलू एक द्वीप पर आबाद है। यहां पर दूसरे शहरों से जुड़ने और वहां की सुविधाएं लेने का विकल्प नहीं है। आज होनोलुलू के हालात बेहतर हैं तो इसमें कई लोगों की कोशिशें शामिल हैं।" होनोलुलू ने वार्ड विलेज नाम से कई सामुदायिक इलाके बसाए हैं। यहां खुदरा कारोबार की सुविधाएं भी हैं और रिहाइश भी। इसके अलावा हार्ट रेल सिस्टम में भी काफी निवेश किया गया है, जो होनोलुलू का पहला रेल सिस्टम है। ये 2020 तक चालू हो जाएगा। ये पुराने होनोलुलू से 20 मील दूर स्थित कुआलाकाई तक जाएगी।
जब दूसरे देशों के लोग यहां आकर बसते हैं, खास तौर से जापान और पूर्वी एशियाई देशों से, तो यहां की परंपरा का दूसरे देशों की संस्कृति से मेल होता है। द होवार्ड ह्यूज कॉरपोरेशन के अध्यक्ष साइमन ट्रेसी कहते हैं कि, "यहां हर शख्स एक ही नाव पर सवार है। यहां की संस्कृति खूबसूरत है। अच्छे शहर की हर खूबी यहां पर मिलेगी। यहां का माहौल तरोताजा करने वाला और सेहतमंद है।" साइमन हाल ही में न्यूयॉर्क से आकर यहां बसे हैं।
ये शहर हवाई सूबे की राजधानी है। पिछले एक दशक में यहां की जिंदगी बेहतर हुई है। आज हवाई द्वीप में बसा होनोलुलू, बसने के लिहाज से अमरीकी शहरों में अव्वल है। इसकी वजह यहां की शिक्षा सुविधाएं और संस्कृति है। स्थानीय लोग कहते हैं कि दुनिया की अर्थव्यवस्था के विकास के चलते उनके शहर के हालात बेहतर हुए हैं। आज यहां शहरी जीवन के विकास पर जोर दिया जा रहा है, जो पहले नहीं था। हवाई के पुराने बाशिंदे टॉड एपो कहते हैं कि, "आखिरकार सरकार और कारोबार जगत को ये समझ में आया कि होनोलुलू के शहरी जीवन में निवेश की जरूरत है।"
टॉड एपो द होवार्ड ह्यूज कॉरपोरेशन के लिए काम करते हैं। वो कहते हैं कि, "होनोलुलू एक द्वीप पर आबाद है। यहां पर दूसरे शहरों से जुड़ने और वहां की सुविधाएं लेने का विकल्प नहीं है। आज होनोलुलू के हालात बेहतर हैं तो इसमें कई लोगों की कोशिशें शामिल हैं।" होनोलुलू ने वार्ड विलेज नाम से कई सामुदायिक इलाके बसाए हैं। यहां खुदरा कारोबार की सुविधाएं भी हैं और रिहाइश भी। इसके अलावा हार्ट रेल सिस्टम में भी काफी निवेश किया गया है, जो होनोलुलू का पहला रेल सिस्टम है। ये 2020 तक चालू हो जाएगा। ये पुराने होनोलुलू से 20 मील दूर स्थित कुआलाकाई तक जाएगी।
जब दूसरे देशों के लोग यहां आकर बसते हैं, खास तौर से जापान और पूर्वी एशियाई देशों से, तो यहां की परंपरा का दूसरे देशों की संस्कृति से मेल होता है। द होवार्ड ह्यूज कॉरपोरेशन के अध्यक्ष साइमन ट्रेसी कहते हैं कि, "यहां हर शख्स एक ही नाव पर सवार है। यहां की संस्कृति खूबसूरत है। अच्छे शहर की हर खूबी यहां पर मिलेगी। यहां का माहौल तरोताजा करने वाला और सेहतमंद है।" साइमन हाल ही में न्यूयॉर्क से आकर यहां बसे हैं।
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बुडापेस्ट, हंगरी
हंगरी की राजधानी और सबसे बड़े शहर बुडापेस्ट में पिछले एक दशक में बुनियादी ढांचे के विकास पर बहुत जोर दिया गया है। स्थानीय लोग पिछले दस साल में आए बदलाव के गवाह हैं। बुडापेस्ट की पत्रिका द स्पॉइल्ड क्वीन की संस्थापक विक्टोरिया स्किबा कहती हैं कि, "मैं पिछले 8 साल से यहां रह रही हूं। शहर में बहुत विकास हुआ है। आज यहां बहुत से साइकिल ट्रैक बन गए हैं। बस और ट्राम की चौबीसों घंटे चलने वाली सेवाएं हैं। शहर के बहुत से हिस्सों में नई जान डाली गई है।"
पांचवीं सदी से ही हंगरी वाइन के उत्पादन के लिए मशहूर है, लेकिन आज इसकी क्राफ्ट बीयर बहुत मशहूर हो रही है। इसके अलावा बुडापेस्ट के स्ट्रीट फूड और कॉफ़ी शॉप भी बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं। बुनियादी ढांचे के विकास के चलते बहुत सी मल्टीनेशनल कंपनियों ने बुडापेस्ट को ठिकाना बनाया है। नतीजा ये कि रोजगार के हालात भी बेहतर हुए हैं।
हालांकि स्किबा की एक शिकायत है। सस्ते बार खुलने की वजह से बुडापेस्ट के कई हिस्सों में भीड़ बढ़ गई है। सैलानियों की आवाजाही बढ़ने से किराया महंगा हो गया है। यानी आज बुडापेस्ट में रहना पहले के मुकाबले महंगा पड़ता है। स्किबा सलाह देती हैं कि "जो लोग यहां पर किराए के मकान तलाश रहे हैं, उन्हें स्थानीय लोगों के फेसबुक समूहों से जुड़ना चाहिए। ये फेसबुक ग्रुप स्थानीय लोग चलाते हैं, ताकि लोगों को सस्ते घर मुहैया करा सकें।"
हंगरी की राजधानी और सबसे बड़े शहर बुडापेस्ट में पिछले एक दशक में बुनियादी ढांचे के विकास पर बहुत जोर दिया गया है। स्थानीय लोग पिछले दस साल में आए बदलाव के गवाह हैं। बुडापेस्ट की पत्रिका द स्पॉइल्ड क्वीन की संस्थापक विक्टोरिया स्किबा कहती हैं कि, "मैं पिछले 8 साल से यहां रह रही हूं। शहर में बहुत विकास हुआ है। आज यहां बहुत से साइकिल ट्रैक बन गए हैं। बस और ट्राम की चौबीसों घंटे चलने वाली सेवाएं हैं। शहर के बहुत से हिस्सों में नई जान डाली गई है।"
पांचवीं सदी से ही हंगरी वाइन के उत्पादन के लिए मशहूर है, लेकिन आज इसकी क्राफ्ट बीयर बहुत मशहूर हो रही है। इसके अलावा बुडापेस्ट के स्ट्रीट फूड और कॉफ़ी शॉप भी बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं। बुनियादी ढांचे के विकास के चलते बहुत सी मल्टीनेशनल कंपनियों ने बुडापेस्ट को ठिकाना बनाया है। नतीजा ये कि रोजगार के हालात भी बेहतर हुए हैं।
हालांकि स्किबा की एक शिकायत है। सस्ते बार खुलने की वजह से बुडापेस्ट के कई हिस्सों में भीड़ बढ़ गई है। सैलानियों की आवाजाही बढ़ने से किराया महंगा हो गया है। यानी आज बुडापेस्ट में रहना पहले के मुकाबले महंगा पड़ता है। स्किबा सलाह देती हैं कि "जो लोग यहां पर किराए के मकान तलाश रहे हैं, उन्हें स्थानीय लोगों के फेसबुक समूहों से जुड़ना चाहिए। ये फेसबुक ग्रुप स्थानीय लोग चलाते हैं, ताकि लोगों को सस्ते घर मुहैया करा सकें।"
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कुवैत सिटी, कुवैत
रहने के लिहाज से कुवैत सिटी मध्यम दर्जे का शहर है। आज संस्कृति के लिहाज से कुवैत सिटी में ज्यादा खुलापन आया है। यहां का हाईवे सिस्टम भी लगातार बेहतर हो रहा है। सऊदी अरब, इराक और फारस की खाड़ी के बीच स्थित कुवैत सिटी हमेशा से अंतरराष्ट्रीय कारोबार का बड़ा केंद्र रहा है। यहां आते ही आप को बड़े इंटरनेशनल सिटी में पहुंचने का एहसास होता है। मल्टीमीडिया कंपनी मिडवेस्ट इमर्सिव चलाने वाले आक़िब उस्मान कहते हैं कि, "जब हम बड़े हो रहे थे, तो यहां बहुत सी बंदिशें थीं। नियम-कानून सख्त थे। खास तौर से सिनेमा, खुले में संगीत बजाने को लेकर बहुत सख्ती थी। यहां म्यूजिक कंसर्ट नहीं के बराबर हुआ करते थे।"
"मैंने अपना पहला म्यूजिक कंसर्ट कुवैत नहीं बल्कि भारत में देखा था, लेकिन आज खुलापन आया है। आज कुवैत सिटी में कई संगीत समारोह होते हैं। ये मेरे लिए चौंकाने वाली बात है। ये बदलाव पिछले पांच सालों में आया है।" उस्मान के मुताबिक कुवैत सिटी में ये बदलाव इंटरनेट संस्कृति और भूमंडलीकरण की वजह से आया है। आज कुवैत में दूसरे देशों का खान-पान देखा जाने लगा है। हालांकि वो कहते हैं कि शराब पर पाबंदी होने की वजह से लोग रेस्टोरेंट में जाने में ही मन बहलाने के ज़रिए तलाशते हैं।
वैसे कुवैत भले ही आज दुनिया के साथ ज्यादा जुड़ गया हो, वित्तीय आजादी बढ़ गई हो। लोगों की औसत उम्र भी बढ़ गई है। लेकिन अभी भी कई दिक्कतें हैं। यहां केवल स्थानीय लोग ही जमीन खरीद सकते हैं। किसी विदेशी को कारोबार करने के लिए कुवैती नागरिक के साथ साझेदारी करनी होगी और उसे 51 प्रतिशत का हिस्सेदार बनाना होगा। कुवैत में न तो सेल्स टैक्स लगता है, न ही इन्कम टैक्स देना होता है। ऐसे में यहां कारोबार कर के काफी कमाई की जा सकती है।
रहने के लिहाज से कुवैत सिटी मध्यम दर्जे का शहर है। आज संस्कृति के लिहाज से कुवैत सिटी में ज्यादा खुलापन आया है। यहां का हाईवे सिस्टम भी लगातार बेहतर हो रहा है। सऊदी अरब, इराक और फारस की खाड़ी के बीच स्थित कुवैत सिटी हमेशा से अंतरराष्ट्रीय कारोबार का बड़ा केंद्र रहा है। यहां आते ही आप को बड़े इंटरनेशनल सिटी में पहुंचने का एहसास होता है। मल्टीमीडिया कंपनी मिडवेस्ट इमर्सिव चलाने वाले आक़िब उस्मान कहते हैं कि, "जब हम बड़े हो रहे थे, तो यहां बहुत सी बंदिशें थीं। नियम-कानून सख्त थे। खास तौर से सिनेमा, खुले में संगीत बजाने को लेकर बहुत सख्ती थी। यहां म्यूजिक कंसर्ट नहीं के बराबर हुआ करते थे।"
"मैंने अपना पहला म्यूजिक कंसर्ट कुवैत नहीं बल्कि भारत में देखा था, लेकिन आज खुलापन आया है। आज कुवैत सिटी में कई संगीत समारोह होते हैं। ये मेरे लिए चौंकाने वाली बात है। ये बदलाव पिछले पांच सालों में आया है।" उस्मान के मुताबिक कुवैत सिटी में ये बदलाव इंटरनेट संस्कृति और भूमंडलीकरण की वजह से आया है। आज कुवैत में दूसरे देशों का खान-पान देखा जाने लगा है। हालांकि वो कहते हैं कि शराब पर पाबंदी होने की वजह से लोग रेस्टोरेंट में जाने में ही मन बहलाने के ज़रिए तलाशते हैं।
वैसे कुवैत भले ही आज दुनिया के साथ ज्यादा जुड़ गया हो, वित्तीय आजादी बढ़ गई हो। लोगों की औसत उम्र भी बढ़ गई है। लेकिन अभी भी कई दिक्कतें हैं। यहां केवल स्थानीय लोग ही जमीन खरीद सकते हैं। किसी विदेशी को कारोबार करने के लिए कुवैती नागरिक के साथ साझेदारी करनी होगी और उसे 51 प्रतिशत का हिस्सेदार बनाना होगा। कुवैत में न तो सेल्स टैक्स लगता है, न ही इन्कम टैक्स देना होता है। ऐसे में यहां कारोबार कर के काफी कमाई की जा सकती है।
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ऑकलैंड, न्यूजीलैंड
ऑकलैंड हमेशा से ही रहने के लिहाज से अच्छा शहर माना जाता रहा है। पिछले एक दशक में यहां और भी सकारात्मक बदलाव आए हैं। खास तौर से यहां की संस्कृति में बदलाव को स्थानीय लोगों ने महसूस किया है। हैंड्स अप हॉलिडे के क्रिस्टोफर हिल कहते हैं कि, "संस्कृति के लिहाज से ऑकलैंड अमीर शहर है। इसमें लगातार बेहतरी आ रही है।"
एशियाई और पश्चिमी संस्कृति के मेल से ऑकलैंड में विकसित हुई पैसिफिका संस्कृति के चलते यहां तमाम तरह के रेस्टोरेंट खुल गए हैं। बहुत से सांस्कृतिक त्योहार होते हैं। चीन का नया साल भी यहां जोर-शोर से मनाया जाता है और दिवाली भी। ऑकलैंड में मेडिकल सुविधाएं और शिक्षा व्यवस्था भी बहुत बेहतर हुई है। हालांकि क्रिस्टोफर हिल मानते हैं कि निजी क्षेत्र के अस्पताल और स्कूल, सरकारी संस्थानों के मुकाबले बेहतर हैं। उनकी नजर में यूनिवर्सिटी और कॉलेज की पढ़ाई यहां आला दर्जे की है।
हिल मानते हैं कि ऑकलैंड में अभी सुधार की बहुत गुंजाइश है। इसका विकास योजनाबद्ध तरीक़े से नहीं हुआ है। नतीजा ये है कि यहां अक्सर ट्रैफिक जाम लगते हैं। हालांकि सार्वजनिक परिवहन प्रणाली दिनों-दिन बेहतर हो रही है। तो, अगर ऑकलैंड में बसने की सोच रहे हैं, तो हिल की सलाह पर गौर कीजिएगा। वो कहते हैं कि समुद्र तट से लगे इलाकों में ट्रैफिक बहुत बुरा होता है। शहर के बाहर के उपनगरीय इलाकों में बसना यहां के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। जैसे कि डेवनपोर्ट नाम के एक गांव से रोजाना नाव के जरिए आवाजाही की जा सकती है। वैसे, ऑकलैंड में रहना महंगा है। अपने मकान हों या किराए के, दोनों बहुत महंगे हैं। इस मामले में ये दुनिया का चौथा सबसे महंगा शहर है। सरकार यहां पर विदेशियों के मकान ख़रीदने पर रोक लगाने की सोच रही है।
ऑकलैंड हमेशा से ही रहने के लिहाज से अच्छा शहर माना जाता रहा है। पिछले एक दशक में यहां और भी सकारात्मक बदलाव आए हैं। खास तौर से यहां की संस्कृति में बदलाव को स्थानीय लोगों ने महसूस किया है। हैंड्स अप हॉलिडे के क्रिस्टोफर हिल कहते हैं कि, "संस्कृति के लिहाज से ऑकलैंड अमीर शहर है। इसमें लगातार बेहतरी आ रही है।"
एशियाई और पश्चिमी संस्कृति के मेल से ऑकलैंड में विकसित हुई पैसिफिका संस्कृति के चलते यहां तमाम तरह के रेस्टोरेंट खुल गए हैं। बहुत से सांस्कृतिक त्योहार होते हैं। चीन का नया साल भी यहां जोर-शोर से मनाया जाता है और दिवाली भी। ऑकलैंड में मेडिकल सुविधाएं और शिक्षा व्यवस्था भी बहुत बेहतर हुई है। हालांकि क्रिस्टोफर हिल मानते हैं कि निजी क्षेत्र के अस्पताल और स्कूल, सरकारी संस्थानों के मुकाबले बेहतर हैं। उनकी नजर में यूनिवर्सिटी और कॉलेज की पढ़ाई यहां आला दर्जे की है।
हिल मानते हैं कि ऑकलैंड में अभी सुधार की बहुत गुंजाइश है। इसका विकास योजनाबद्ध तरीक़े से नहीं हुआ है। नतीजा ये है कि यहां अक्सर ट्रैफिक जाम लगते हैं। हालांकि सार्वजनिक परिवहन प्रणाली दिनों-दिन बेहतर हो रही है। तो, अगर ऑकलैंड में बसने की सोच रहे हैं, तो हिल की सलाह पर गौर कीजिएगा। वो कहते हैं कि समुद्र तट से लगे इलाकों में ट्रैफिक बहुत बुरा होता है। शहर के बाहर के उपनगरीय इलाकों में बसना यहां के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। जैसे कि डेवनपोर्ट नाम के एक गांव से रोजाना नाव के जरिए आवाजाही की जा सकती है। वैसे, ऑकलैंड में रहना महंगा है। अपने मकान हों या किराए के, दोनों बहुत महंगे हैं। इस मामले में ये दुनिया का चौथा सबसे महंगा शहर है। सरकार यहां पर विदेशियों के मकान ख़रीदने पर रोक लगाने की सोच रही है।