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गलती से भारत अा गया था पाकिस्तानी, बोला- भारत बहुत अच्छा है, मुझे यहीं रहने दो
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 24 Jul 2018 04:04 PM IST
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Pakistani prisoner
पाकिस्तान में रहने वाले आवाम को लेकर ज्यादातर लोगों का मानना है कि वे हिंदुस्तान को पसंद नहीं करते लेकिन इस पाकिस्तानी शख्स ने जो बात कही उसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। जी हां, यह शख्स पाकिस्तान से भारत की सीमा में गलती से आ गया था जिसके बाद से इसे भारतीय सेना ने बंदी बना लिया था, लेकिन जब उसे अटारी-बाघा बॉर्डर पर रिहा किया गया तो उसने चौंकाने वाली बात बताई।
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जी हां, पाकिस्तानी के रहने वाले 16 वर्षीय आसिफ अली ने सोमवार को रिहाई के बाद कहा 'मैं गलती से बॉर्डर पार कर भारत आ गया था जिसके बाद मैं यहां 14 महीने रहा। सचकहूं तो मैं यहां से वापस ही नहीं जाना चाहता। मुझे भारत बहुत अच्छा लगा। मुझे यहां नौकरी भी मिल गई थी। इसके बाद आसिफ ने कहा कि मैं भारत सरकार से अनुरोध करता हूं कि वह मुझे यहीं रहने दे।
ऐसा नहीं है कि ये पहली बार हुआ हो। जी हां, इससे पहले भी ऐसा हो चुका है। मीडिया रिपोर्टों की मानें तो इसी साल फरवरी में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के सहायक कमांडेंट निर्मल जीत सिंह ने एक पाकिस्तानी नागरिक कैलाश राजधन को पाकिस्तानी रेंजर्स के डिप्टी सुपरीटेंडेंट फैजल के सुपुर्द किया था। ये अप्रैल 2014 की बात है जब राजधन को जाली भारतीय नोटों के साथ अटारी बॉर्डर से गिरफ्तार किया गया था।
ऐसा नहीं है कि ये पहली बार हुआ हो। जी हां, इससे पहले भी ऐसा हो चुका है। मीडिया रिपोर्टों की मानें तो इसी साल फरवरी में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के सहायक कमांडेंट निर्मल जीत सिंह ने एक पाकिस्तानी नागरिक कैलाश राजधन को पाकिस्तानी रेंजर्स के डिप्टी सुपरीटेंडेंट फैजल के सुपुर्द किया था। ये अप्रैल 2014 की बात है जब राजधन को जाली भारतीय नोटों के साथ अटारी बॉर्डर से गिरफ्तार किया गया था।
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पाकिस्तान के सिंध प्रांत के गोथकी का कैलाश राजधन अप्रैल 2014 में परिवार के साथ वीजा पर भारत आया था। अटारी सीमा पर प्रवेश करने पर जब उसके सामानों की जांच हुई तो कस्टम अधिकारियों को उसके सामान से भारतीय जाली करेंसी मिली। वहीं अमृतसर जेल में बंद पाकिस्तानी नागरिक फातिमा, उसकी बहन मुमताज और 10 साल की बेटी हिना को 2 नवंबर, 2017 को रिहा कर उनके वतन वापस भेज दिया गया। वे 12 साल तक भारत की जेल में थे। वतन वापसी से पूर्व फातिमा ने कहा, 'पीएम मोदी के विशेष प्रयासों से यह सब संभव हुआ।
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10 पाक कैदियों को किया गया रिहा
25 जून, 2017 को भी भारत सरकार ने 10 पाकिस्तानी कैदियों को रिहा किया। रिहा किए गए कैदियों में 4 मछुआरों समेत एक महिला व पाकिस्तान के छह सिविलियन नागरिक शामिल थे। हालांकि, बच्ची का नाम कैदियों में शामिल नहीं था तो इसके चलते बार्डर पर तकनीकी अड़चनें कुछ समय के लिए पैदा हो गई थी। बाद में अधिकारियों ने इस 5 साल की बच्ची को भी महिला कैदी के साथ उसके वतन भेज दिया।
25 जून, 2017 को भी भारत सरकार ने 10 पाकिस्तानी कैदियों को रिहा किया। रिहा किए गए कैदियों में 4 मछुआरों समेत एक महिला व पाकिस्तान के छह सिविलियन नागरिक शामिल थे। हालांकि, बच्ची का नाम कैदियों में शामिल नहीं था तो इसके चलते बार्डर पर तकनीकी अड़चनें कुछ समय के लिए पैदा हो गई थी। बाद में अधिकारियों ने इस 5 साल की बच्ची को भी महिला कैदी के साथ उसके वतन भेज दिया।
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इन 16 नागरिकों को पाकिस्तान जेल ने लेने से किया इन्कार
पाकिस्तान के 16 कैदी तो अमृतसर सेंट्रल जेल में ऐसे बंद हैं जिन्हें उनके मुल्क ने स्वीकारने से ही मना कर दिया है। दरअसल, पाकिस्तान ने इन्हें अपना नागरिक मानने से ही इंकार कर दिया है। यह जानकारी पिछले साल केंद्र सरकार ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट को दी थी। केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि जेल में 38 विदेशी कैदी बंद थे, जिनमें से 16 को वापस उनके देश भेजा जा चुका है और दो कैदियों की मौत हो चुकी है। बाकि बचे 20 कैदियों में से 16 कैदी पाकिस्तान, दो बांग्लादेश और एक-एक कैदी नेपाल और म्यांमार के हैं।
पाकिस्तान के 16 कैदी तो अमृतसर सेंट्रल जेल में ऐसे बंद हैं जिन्हें उनके मुल्क ने स्वीकारने से ही मना कर दिया है। दरअसल, पाकिस्तान ने इन्हें अपना नागरिक मानने से ही इंकार कर दिया है। यह जानकारी पिछले साल केंद्र सरकार ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट को दी थी। केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि जेल में 38 विदेशी कैदी बंद थे, जिनमें से 16 को वापस उनके देश भेजा जा चुका है और दो कैदियों की मौत हो चुकी है। बाकि बचे 20 कैदियों में से 16 कैदी पाकिस्तान, दो बांग्लादेश और एक-एक कैदी नेपाल और म्यांमार के हैं।