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मामूली नहीं इस शख्स का कारनामा, हजारों किलोमीटर पैदल चलकर की हज यात्रा

Sat, 14 Jul 2018 11:27 AM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 14 Jul 2018 11:27 AM IST
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Know about this Muslim man who went on Haj through Walking
Mohammad khameem
कई बार आपने सुना होगा की कई लोग साइकल से या किसी अन्य साधन की मदद से मीलों का सफर तय कर रिकॉर्ड कायम करते हैं। मगर आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताएंगे जिसके बारे में जानकर आप भी चौंक पड़ेंगे। जी हां, जो इस शख्स ने कर दिखाया वह साधारण काम नहीं है। शायद इसमें उसकी सच्ची आस्था काम आई।
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makka
जी हां, इस शख्स ने 9 हजार किलोमीटर चलने का रिकॉर्ड बना दिया। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस साधारण से दिखने वाले शख्स ने पैदल चलकर हज किया है। मीडियो रिपोर्टों की मानें तो इंडोनेशिया का रहने वाले 28 वर्षीय मौहम्मद खमीम सेतियावान नामक इस आदमी ने नौ हजार किलोमीटर पैदल चल कर हज यात्रा की है। हर किसी के लिए यह खबर हैरान कर देने वाली है की इस शख्स ने पैदल चलकर हज किया है।
 
 
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makka
जी हां, हर मुसलमान ये चाहता है कि वह अपने जीवन में एकबार मक्का जरूर जाए फिर चाहे वह गरीब हो या अमीर। अपनी इस तमन्ना के आगे उसे अपने जीवन में शायद ही ओर कोई तमन्ना नजर आती हो। ऐसा ही ख्वाहिश मौहम्मद खमीम के दिल में थी जिसे उन्होंने साधारण अंदाज में नहीं बल्कि बहुत सी कठिनाइयों का सामना करते हुए पूरा कर दिखाया। यकीनन यह कोई साधारण काम नहीं। आज के युग में तो खासतौर से इसे चमत्कार कह दिया जाएगा। 

 
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Mohammad khameem
क्योंकि इतने किलोमीटर पैदल चलकर रब की चौखट पर पहुंचने की घटना को लोग सीधा ऊपरवाले के आशीर्वाद से जोड़कर देखते हैं। कहा जा रहा है कि मौहम्मद खमीम के सिर पर भी जरूर ऊपरवाले का हाथ रहा होगा जिसके चलते उसने ये असंभव काम संभव कर दिखाया।   

 
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makka
दरअसल, कई बार किस्मत भी साथ नहीं देती लेकिन जिनकी किस्मत में होता है वह व्यक्ति जरूर इस पवित्र स्थान पर जा पहुंच पाता है शायद मौहम्मद खमीम भी उन्हीं किस्मत वाले इंसानों में से एक रहे होंगे। तभी रब ने उन लोगों के बीच लेजाने की हिम्मत दी जहां हर इंसान बराबर हो जाता है। मक्का में कोई छोटा-बड़ा नहीं होता। वहां जाने वाला हर इंसान बराबरी का हक रखता है। भले ही इस दुनिया में ऐसे लोग भी हो जो इतने रहीस हो कि उनसे अपनी सारी दौलत तक न खर्ची जाती हो लेकिन ये लोग भी वहां सभी इंसानों के बराबर ही होते हैं। 

 
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