आपने इससे पहले शायद ही किसी ड्राइवर की ऐसी विदाई देखी होगी। जी हां, तभी तो सारे मीडिया जगत में इस अनोखी विदाई के चर्चे हो रहे हैं। जब आप इस पूरी कहानी को जान लेंगे तो शायद आपकी आंखें भी नम हो जाएं। दरअसल, यह उस ड्राइवर की सेवाओं का फल था जो उसे 35 साल की सेवाओं के बदले में मिला। यह दिन था उस कर्मठ निष्ठावान ड्राइवर की विदाई का।
दरअसल, इस दिन ड्राइवर को सम्मान के साथ कार की पिछली सीट पर बैठाकर ड्राइवर की सीट पर कलेक्टर साहब जा बैठे, और गाड़ी को लेकर उसके घर की ओर चल दिए। आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसी उल्टी गंगा कैसे बह निकली। दरअसल, कलेक्टर साहब अपने ड्राइवर की रिटायरमेंट को यादगार बनाना चाहते थे।
करूर जिले के रहने वाले परामासिवम 30 अप्रैल 2018 को रिटायर हुए। उन्होंने अपने 35 साल के कार्यकाल में करीब 8 कलेक्टर और कई अन्य नौकरशाहों की गाड़ियां चलाईं। मगर, रिटायरमेंट के दिन उन्हें अधिकारी की तरह विदाई देने का जिम्मा खुद कलेक्टर साहब ने लिया। टी. अन्बाझगन नामक इस क्लेक्टर का यह कारनामा सुर्खिया बन गया। ऐसा नहीं है कि उन्होंने वाह-वाही लूटने के लिए ऐसा किया हो। क्लेक्टर ने भी निस्वार्थ भाव पूरे दिल से अपने ड्राइवर को बराबर का सम्मान दिया और अपने ड्राइवर को अनोखे अंदाज में विदा किया।
क्लेक्टर साहब ने अपने काम के घंटों का आकलन करते हुए अपने ड्राइवर के कार्य का जिक्र किया। वे बोले अगर कलेक्टर 16 घंटे काम करता है, तो उसका ड्राइवर दिन में 18 घंटे काम करता है। वह नौकरशाह से पहले उसके घर पहुंचते हैं और उन्हें घर जाने में अक्सर देरी होती है। उन्हें हर वक्त अलर्ट रहना होता है, हमारी जिन्दगी उनके हाथों में होती है। मैं उन्हें उनकी 33 सालों की सेवा के लिए सम्मानित करना चाहता हूं। उनकी अपनी पूरी जिंदगी हमें घर पहुंचाया है, अब ये हमारी बारी है कि हम उन्हें ससम्मान उनके घर पहुंचाएं।
इससे पहले अन्बाझगन ने 29 अप्रैल के दिन अपने सरकारी ड्राइवर परामासिवम के रिटायर पर पूरे ऑफिस को पार्टी दी। इसके बाद उन्होंने रिटायरमेंट के दिन परामासिवम और उनकी पत्नी के लिए खुद कार का दरवाजा खोला और उन्हें खुद कार चलाकर उनके घर तक छोड़कर आने का आग्रह किया। कलेक्टर साहब जब परामासिवम के लिए कार का दरवाजा खोलने लगे, तो पहले तो वह संकोच करने लगे, लेकिन क्लेक्टर ने उन्हें निवेदन के साथ कार में बैठने को कहा।