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ज्ञान की बात: जानिए शाम होने के बाद क्यों नहीं किया जाता है शवों का पोस्टमार्टम?

Thu, 29 Apr 2021 05:41 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Thu, 29 Apr 2021 05:41 AM IST
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Why Postmortem Is Not Done At Night Know Reasons
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

हम सभी के दिमाग में अक्सर ऐसे कई तरह के सवाल घुमते रहते हैं, जिनका जवाब खोजना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन ऐसी बात भी नहीं है कि जवाब खोजना नामुमकिन हो। कुछ इसी तरह का एक सवाल ये है कि आखिर शवों का पोस्टमॉर्टम शाम होने के बाद क्यों नहीं किया जाता है? आझ हम आपको इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि शवों का पोस्टमार्टम केवल दिन में क्यों होता है।

Why Postmortem Is Not Done At Night Know Reasons
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

आपको बता दें कि पोस्टमॉर्टम एक प्रकार का ऑपरेशन होता है, जिसमें शव का परीक्षण किया जाता है। शव का परीक्षण इसलिए किया जाता है, ताकि व्यक्ति की मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके। बता दें कि पोस्टमॉर्टम के लिए मृतक के सगे-संबंधियों की सहमति अनिवार्य होती है। हालांकि, कुछ मामलों में पुलिस अधिकारी भी पोस्टमॉर्टम की इजाजत दे देते हैं, जैसे की हत्या।

Why Postmortem Is Not Done At Night Know Reasons
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्यक्ति की मौत के बाद छह से 10 घंटे के अंदर ही पोस्टमॉर्टम किया जाता है, क्योंकि इससे अधिक समय होने के बाद शवों में प्राकृतिक परिवर्तन, जैसे कि ऐंठन होने लगते हैं।

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Why Postmortem Is Not Done At Night Know Reasons
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
शवों का पोस्टमॉर्टम करने का समय सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक का ही होता है। इसके पीछे वजह ये है कि रात में ट्यूबलाइट या एलईडी की कृत्रिम रोशनी में चोट का रंग लाल के बजाए बैंगनी दिखाई देता है और फॉरेंसिक साइंस में बैंगनी रंग की चोट का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।
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Why Postmortem Is Not Done At Night Know Reasons
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

प्राकृतिक और कृत्रिम रोशनी में चोट के रंग अलग दिखने से पोस्टमॉर्टम के रिपोर्ट को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। भारत के कोर्ट में मान्य जेसी मोदी की किताब जुरिस्प्रूडेंस टॉक्सिकोलॉजी में इस बात का उल्लेख भी है।

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