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विश्व की सबसे छोटी चीजों में इन्होंने बसा दी पूरी दुनिया!

Sat, 16 Apr 2016 10:18 AM IST
टीम डिजिटल
टीम डिजिटल Updated Sat, 16 Apr 2016 10:18 AM IST
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world's smallest miniatures
सबसे छोटे मिनिएचर्स - फोटो : listverse
इस लिस्ट में सबसे पहले नाम आता है ईसाई धर्म के धार्मिक ग्रंथ बाइबिल का। 2007 में नैनोटेक्नॉलोजी की मदद से टेक्निशियनों ने पूरे बाइबिल के सभी हेब्रू भाषा में लिखी गई चीजों को चीनी से भी आधे आकार के दाने जैसी चीज पर अंकित कर दिया। उस छोटे से सिलिकॉन के सतह पर उन्होंने तीन लाख शब्दों को गेलियम आयन्स की मदद से अंकित कर दिया।

सबसे छोटे मिनिएचर्स

world's smallest miniatures
- फोटो : listverse
कभी सोचा है कि माचिस की तिल्लियों से भी पूरा आर्ट का काम किया जा सकता है? तिल्लियों को संभालना और उनसे मास्टरपीस बना देना ऐसी कला है जो हर किसी के बस की बात नहीं। इसे एक तरह का फोकआर्ट माना गया है। इसे लोग प्रिजनआर्ट का भी नाम देते हैं। लेकिन प्रिजनआर्ट कहने से ये मतलब नहीं कि इन्हें बनाने वालों की सजा दी जाती थी या फिर उससे मुक्ति। माचिस से कलाकृतियां बनाने का काम 3500 बीसी से चला आ रहा है।

सबसे छोटे मिनिएचर्स

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- फोटो : listverse
खाने-पीने की चीजों से बीज निकालकर हम कितनी आसानी से फेंक देते हैं ना? पर जानते हैं ऐसे कम ही लोग हैं जो इन बीजों से ऐसी कलाकृतियां बनाते हैं कि देखने लायक होता है। मानना मुश्किल है पर ताइवान के नेशनल पैलेस म्यूजियम में जैतून के बीज पर एक आर्टिस्ट ने बोट बनाई है। इसे बोट में आपको आठ लोग साफ दिखते हैं और उनके चेहरे के भाव भी!
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सबसे छोटे मिनिएचर्स

world's smallest miniatures
- फोटो : listverse
सबसे छोटे चेसबोर्ड के बारे में जानते हैं? 2006 में इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से नवाजा गया। इसे तमिलनाडु के श्रीविल्लीपुत्तुर में रहने वाले एम मनीकंदन ने बनाया। ये बस 24 मिलिमीटर का था। इसके बाद ई-बे पर भी एक शख्स को छोटा सा चेसबोर्ड बेचते देखा गया जो 24*24 मिलिमीटर का था। इसके ऊपर 22 कैरेट सोने के छह ग्राम का काम भी था। 
 
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सबसे छोटे मिनिएचर्स

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- फोटो : listverse
पूरे एशिया के हिस्से में चावल को समृद्ध‌ि से जोड़कर देखा जाता है। ये दाने रोज के खाने का अहम हिस्सा हैं। लोग इसे उगाने के बाद इस्तेमाल में लाने से पहले इसकी पूजा करते हैं। लेकिन कला की दुनिया में भी इसको इज्जत देने का एक अलग ही तरीका अपनाया जाता है। चावल के दानों पर लिखने की कला तुर्की और भारत में काफी पुरानी है। इस्तांबुल के टोपकापी पैलेस में इस आर्ट के सबसे पहले नमूने आज भी देखने को मिलते हैं। इन पर मिनरल ऑयल से लिखा जाता है। ये बहुत कठिन कला है।
 
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