{"_id":"5bd1ac01bdec224291204ae9","slug":"the-people-are-here-too-thin-and-too-fat","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"यहां पतले लोग भी अधिक हैं और मोटे भी, कारण जानकर सन्न रह जाएगा दिमाग","category":{"title":"Weird Stories","title_hn":"अजब गजब","slug":"weird-stories"}}
यहां पतले लोग भी अधिक हैं और मोटे भी, कारण जानकर सन्न रह जाएगा दिमाग
बीबीसी हिंदी
Updated Fri, 26 Oct 2018 09:05 AM IST
विज्ञापन
body
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोगों में पोषक तत्वों की कमी और मोटापे को हमेशा से पश्चिमी देशों की बीमारी माना जाता है, लेकिन असल में ऐसा कुछ नहीं है। 10 में से नौ देश स्वास्थ्य की समस्या से जूझ रहे हैं, जहां अधिक वजन वाले और कम वजन वाले लोग साथ-साथ रहते हैं। इस तरह की बीमारी को 'दोहरा बोझ' भी कहा जाता है।
thin
कहां कितना मोटापा?
दुनियाभर के देश कहीं न कहीं पोषक तत्वों की समस्या से जूझ रहे हैं। कई लोग खाने के खराब होने के कारण कुपोषण जैसी समस्या से जूझ रहे हैं, जिनकी संख्या 2016 में 81.5 करोड़ तक पहुंच चुकी है। इसमें दो साल में 5% की वृद्धि हुई है। अफ्रीका में अधिक वृद्धि हुई, जहां 20% लोग कुपोषित थे।
इसके साथ ही पिछले 40 वर्षों में मोटापे की दर तीन गुना हो गई है। विश्व स्तर पर 60 करोड़ से अधिक वयस्क मोटापे से ग्रस्त हैं जबकि 1.9 अरब अधिक वजन वाले हैं। विकासशील देशों में मोटापे से ग्रस्त लोगों की संख्या विकसित देशों के बराबर हो रही है। अधिकतर जगहों पर उनकी जरूरत के हिसाब से उन्हें आहार नहीं मिलता है।
दक्षिण अफ्रीका में तीन में से एक बच्चा मोटा या अधिक वजन वाला है जबकि हर तीसरा बच्चा कम वजन वाला है। ब्राजील में 36 प्रतिशत लड़कियां अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं जबकि 16 प्रतिशत लड़कियों को कम वजन वाली श्रेणी में रखा गया है।
ब्रिटेन में एक चौथाई वयस्क मोटापे से ग्रस्त हैं। यूरोपीय संघ में 15 से 19 साल की आयु के लोगों का वजन कम है। हालांकि 18 साल से ऊपर वाले आधे से अधिक मोटे हैं जबकि केवल इनके दो प्रतिशत लोग ही पतले या कम वजन वाले हैं।
दुनियाभर के देश कहीं न कहीं पोषक तत्वों की समस्या से जूझ रहे हैं। कई लोग खाने के खराब होने के कारण कुपोषण जैसी समस्या से जूझ रहे हैं, जिनकी संख्या 2016 में 81.5 करोड़ तक पहुंच चुकी है। इसमें दो साल में 5% की वृद्धि हुई है। अफ्रीका में अधिक वृद्धि हुई, जहां 20% लोग कुपोषित थे।
इसके साथ ही पिछले 40 वर्षों में मोटापे की दर तीन गुना हो गई है। विश्व स्तर पर 60 करोड़ से अधिक वयस्क मोटापे से ग्रस्त हैं जबकि 1.9 अरब अधिक वजन वाले हैं। विकासशील देशों में मोटापे से ग्रस्त लोगों की संख्या विकसित देशों के बराबर हो रही है। अधिकतर जगहों पर उनकी जरूरत के हिसाब से उन्हें आहार नहीं मिलता है।
दक्षिण अफ्रीका में तीन में से एक बच्चा मोटा या अधिक वजन वाला है जबकि हर तीसरा बच्चा कम वजन वाला है। ब्राजील में 36 प्रतिशत लड़कियां अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं जबकि 16 प्रतिशत लड़कियों को कम वजन वाली श्रेणी में रखा गया है।
ब्रिटेन में एक चौथाई वयस्क मोटापे से ग्रस्त हैं। यूरोपीय संघ में 15 से 19 साल की आयु के लोगों का वजन कम है। हालांकि 18 साल से ऊपर वाले आधे से अधिक मोटे हैं जबकि केवल इनके दो प्रतिशत लोग ही पतले या कम वजन वाले हैं।
fat and thin
मोटे बच्चे
जीवनशैली में बदलाव भी आंशिक रूप से मोटापा और कम पोषण के दोहरे बोझ के लिए जिम्मेदार है। भारत और ब्राजील जैसे कई निम्न और मध्यम वर्ग वाले देश आवश्यकता से अधिक खर्च कर रहे हैं, जिससे एक नया मध्यम वर्ग बना है। यह वर्ग पश्चिमी खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करता है, जिसमें शर्करा, वसा और मांस शामिल है।
ग्रामीण क्षेत्रों से शहर की तरफ आने के बाद भी लोग इस तरह का खाद्य पदार्थ ज्यादा पसंद करते हैं। उदाहरण के तौर पर एक अध्ययन में पता चला है कि चीन के ग्रामीण क्षेत्रों में 10 प्रतिशत बच्चे मोटापे से और 21 प्रतिशत कुपोषण से ग्रस्त हैं जबकि शहर में मोटापे से ग्रस्त बच्चों की संख्या 17 प्रतिशत और कुपोषण से ग्रस्त बच्चों की संख्या 14 प्रतिशत है। इसका मतलब यह हुआ कि ये लोग आहार तो लेते हैं लेकिन विटामिन और खनिजों की मात्रा पूरी नहीं लेते हैं।
जीवनशैली में बदलाव भी आंशिक रूप से मोटापा और कम पोषण के दोहरे बोझ के लिए जिम्मेदार है। भारत और ब्राजील जैसे कई निम्न और मध्यम वर्ग वाले देश आवश्यकता से अधिक खर्च कर रहे हैं, जिससे एक नया मध्यम वर्ग बना है। यह वर्ग पश्चिमी खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करता है, जिसमें शर्करा, वसा और मांस शामिल है।
ग्रामीण क्षेत्रों से शहर की तरफ आने के बाद भी लोग इस तरह का खाद्य पदार्थ ज्यादा पसंद करते हैं। उदाहरण के तौर पर एक अध्ययन में पता चला है कि चीन के ग्रामीण क्षेत्रों में 10 प्रतिशत बच्चे मोटापे से और 21 प्रतिशत कुपोषण से ग्रस्त हैं जबकि शहर में मोटापे से ग्रस्त बच्चों की संख्या 17 प्रतिशत और कुपोषण से ग्रस्त बच्चों की संख्या 14 प्रतिशत है। इसका मतलब यह हुआ कि ये लोग आहार तो लेते हैं लेकिन विटामिन और खनिजों की मात्रा पूरी नहीं लेते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
statue
मोटापे से दिल की बीमारी का खतरा
पुणे (भारत) में मधुमेह के विशेषज्ञ प्रोफेसर रंजन याज्ञनिक बताते हैं, "मधुमेह को लंबे समय से मोटापे के कारण होने वाली बीमारी कहा जाता था लेकिन भारत में हम कम वजन वाले युवाओं में भी इसे देख रहे हैं।" भारतीय लोग कम पोषक तत्व खा रहे हैं और जंक फूड से अधिक कैलोरी प्राप्त कर रहे हैं जिसके कारण पतली वसा की समस्या होती है। "जो लोग जरूरत से ज्यादा पतले होते हैं वो असल में अधिक मात्रा में ऐसी वसा लेते हैं जो शरीर में दिखाई नहीं देती।"
छिपी हुई या आंतों की वसा लीवर के साथ आंतरिक अंगों के आसपास जमा हो जाती है। आंतों में अधिक वसा के कारण टाइप 2 मधुमेह और दिल की बीमारी का ख़तरा बढ़ सकता है और यह जरूरी नहीं है कि उस व्यक्ति का वजन अधिक दिखे।
पुणे (भारत) में मधुमेह के विशेषज्ञ प्रोफेसर रंजन याज्ञनिक बताते हैं, "मधुमेह को लंबे समय से मोटापे के कारण होने वाली बीमारी कहा जाता था लेकिन भारत में हम कम वजन वाले युवाओं में भी इसे देख रहे हैं।" भारतीय लोग कम पोषक तत्व खा रहे हैं और जंक फूड से अधिक कैलोरी प्राप्त कर रहे हैं जिसके कारण पतली वसा की समस्या होती है। "जो लोग जरूरत से ज्यादा पतले होते हैं वो असल में अधिक मात्रा में ऐसी वसा लेते हैं जो शरीर में दिखाई नहीं देती।"
छिपी हुई या आंतों की वसा लीवर के साथ आंतरिक अंगों के आसपास जमा हो जाती है। आंतों में अधिक वसा के कारण टाइप 2 मधुमेह और दिल की बीमारी का ख़तरा बढ़ सकता है और यह जरूरी नहीं है कि उस व्यक्ति का वजन अधिक दिखे।
विज्ञापन
body
कई बार कुछ बच्चे बड़ों के बराबर खाना खाते हैं फिर भी उनका वजन अधिक नहीं होता जबकि कुछ कम खाते हैं फिर भी उनका वजन अधिक दिखता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वो सही मात्रा में विटामिन नहीं लेते और कुछ लोगों का मेटाबॉलिज्म धीरे काम करता जिस वजह से वो अधिक मात्रा में वसा को इकट्ठा कर लेता है। हमारा भोजन कई वजहों से प्रभावित होता है, जैसे आय, स्थानीय उपलब्धता, समय आदि। हर व्यक्ति की पोषक संबंधी जरूरतें अलग होती हैं और कई बार व्यक्ति के मेटाबॉलिज्म पर भी निर्भर करता है।