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वैज्ञानिकों ने भी मानी रामसेतु के पत्थरों में चमत्कार की बात, कहा- ये है दुनिया का आश्चर्य

Sat, 22 Dec 2018 06:44 PM IST
गौरव शुक्ला फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: गौरव शुक्ला Updated Sat, 22 Dec 2018 06:44 PM IST
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research on ramsetu bridge, scientist believe its a super human achievement
- फोटो : Social Media

भारत के दक्षिणपूर्व में रामेश्वरम और श्रीलंका के पूर्वोत्तर में मन्नार द्वीप के बीच उथली चट्टानों की एक चेन है। इस इलाके में समुद्र बेहद उथला है। समुद्र में इन चट्टानों की गहराई सिर्फ 3 फुट से लेकर 30 फुट के बीच है। इस पुल की लंबाई लगभग 48 किमी व 3 किलोमीटर चौड़ा है। रामसेतु भौतिक रूप में उत्तर में बंगाल की खाड़ी को दक्षिण में शांत और स्वच्छ पानी वाली मन्नार की खाड़ी से अलग करता है, जो धार्मिक एवं मानसिक रूप से दक्षिण भारत को उत्तर भारत से जोड़ता है।

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- फोटो : SELF

आज हम आपको रामसेतु पुल से जुड़ी कुछ खास जानकारी देंगे। जहां राम नाम लिखकर पत्थरों को पानी में फेंका गया लेकिन वे डूबने की बजाए पानी पर तैरने लगे, और ऐसे में समुद्र के ऊपर लंका तक जाने के लिए पुल का निर्माण हुआ।

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- फोटो : Wikipedia

समुद्र पर बने इस रामसेतु को दुनिया भर में 'एडम्स ब्रिज 'के नाम से भी जाना जाता है। यह पुल भारत के रामेश्वरम से शुरू होकर श्रीलंका के मन्नार को जोड़ता है। कुछ लोग इसे ईश्वर का चमत्कार मानते हैं तो साइंस इसके पीछे अपने अलग ही तर्क देता है। हालांकि कुछ वैज्ञानिक रामसेतु को एक सुपर ह्यूमन एचीवमेंट मानते हैं। इस पुल निर्माण में इस्तेमाल किए गए पत्थरों को जानने के लिए लोगों में आज भी जिज्ञासा है।

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धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब राक्षस राज रावण भगवन राम की पत्नी माता सीता का हरण कर उन्हें अपने साथ लंका ले गया तब श्रीराम ने वानरों की सहायता से समुद्र के मध्य में एक पुल का निर्माण किया, और यही पुल रामसेतु के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि इस विशाल पुल को वानर सेना ने मात्र 5 दिनों में पूरा कर दिया था। 

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कहा जाता है कि भगवन राम ने समुद्र देवता की पूजा की, लेकिन समुद्र के देवता प्रकट नहीं हुए जिसके बाद भगवान श्रीराम क्रोधित हो गए और समुद्र सूखा देने के लिए अपना धनुष उठा लिया। इससे भयभीत होकर समुद्र देवता प्रकट हुए, और बोले हे! श्रीराम आप अपनी वानर सेना की मदद से मेरे ऊपर पत्थर का पुल बनाएं। मैं इन सभी पत्थरों का वजन अपने ऊपर संभाल लूंगा इसके बाद सभी वानरों ने समुद्र में पुल का निर्माण किया।

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