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बिहार में बुराइयों का बैंड बजा रही छोटे से गांव की 10 महिलाएं, तरीका बेहद अनोखा

Thu, 28 Jun 2018 06:43 PM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 28 Jun 2018 06:43 PM IST
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music band of women in bihar starting for social awareness

इस बैंड की अगुवाई महिलाओं के बीच 'सुधा दीदी' के नाम से मशहूर सुधा वर्गीस करती हैं, जो 'नारी गूंज' नाम का एक एनजीओ चलाती हैं। भारत को आजाद हुए सात दशक बीत चुके हैं लेकिन अब भी इस देश में कई सामाजिक बुराइयां महिलाओं को आजादी महसूस करने से रोकती हैं। समय-समय पर महिलाएं खुद इन विरोधों का अनोखे तरीके से सामना करती हैं जो इन बुराइयों को उनके सामने झुकने पर मजबूर कर देती हैं। ऐसा ही एक कदम बिहार की राजधानी पटना के बाहरी हिस्से में बसे छोटे से गांव की महिलाओं ने भी उठाया। यहां महिलाओं ने एक समूह बना कर म्यूजिक बैंड बनाया है। 'सरगम बैंड' नाम का यह बैंड बिहार जैसे राज्य में सामाजिक बुराइयों को तोड़ रहा है।

music band of women in bihar starting for social awareness

पटना के दानापुर में धिबरा गांव की 10 महिलाएं ‘सरगम बैंड’ की सदस्य हैं। इस बैंड में शामिल महिलाओं की उम्र करीब 30 साल है। महिलाओं का यह बैंड शादी और सामाजिक कार्यक्रमों में शिरकत करता है। इस बैंड की अगुवाई 'सुधा दीदी' के नाम से मशहूर सुधा वर्गीस करती हैं, जो 'नारी गूंज' नाम का एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) चलाती हैं। सुधा का कहना है कि रविदास समुदाय की ये महिलाएं खुद की खास पहचान बनाने में लगी हैं और सरगम बैंड उनके लिए एक पहचान बनाने का जरिया है।

music band of women in bihar starting for social awareness

समाज में इतना बड़ा बदलाव कभी भी आसान नहीं होता। सुधा को भी बैंड की शुरुआत करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। सुधा का कहना है, ‘2016 में मुझे यह विचार सूझा जब मैं रविदास समुदाय की महिलाओं के लिए काम कर रही थी। अधिकतर महिलाएं खेतिहर मजदूर थीं। मैं उनकी सामाजिक और आर्थिक तरक्की के बारे में सोचना चाहती थी।’

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music band of women in bihar starting for social awareness

सुधा ने बताया, ‘जब मैंने धिबरी की महिलाओं के साथ अपने विचार साझा किए तब शुरुआत में कई चौंकाने वाली प्रतिक्रिया सामने आई। यह हैरान करने वाला नहीं था। किसी ने भी यहां महिलाओं के संगीत बैंड के बारे में नहीं सुना था। जो काम उन्हें करने के लिए कहा जा रहा था वह मर्दों का काम माना जाता है।’हालांकि, सुधा ने बताया कि महिलाओं ने हिम्मत से काम लिया और अब तो वे दूसरे प्रयोग करने के लिए भी तैयार हैं। देखें वीडियो-

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