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मिलिए दुनिया के 'सबसे गरीब' पूर्व राष्ट्रपति से, रिटायरमेंट के बाद पेंशन लेने से कर दिया इंकार
फीचर टीम, अमर उजाला
Updated Fri, 17 Aug 2018 04:23 PM IST
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world's 'poorest' president
उरुग्वे के पूर्व राष्ट्रपति होजे मुहिका को दुनिया का 'सबसे गरीब राष्ट्रपति' कहा जाता है। इसकी वजह उनकी बेहद साधारण जीवनशैली है। राजनीति से रिटायर होने के बाद उन्होंने पेंशन लेने से भी इनकार कर दिया। राष्ट्रपति पद के बाद मुहिका साल 2015 से उरुग्वे की संसद में सिनेटर भी रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने टर्म पूरा होने से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 83 साल के मुहिका ने कहा कि वो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे क्योंकि इस लंबी यात्रा से वे थक चुके हैं।
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मुंहफट होने के लिए रहे बदनाम
मुहिका मुंहफट होने और कभी-कभी रचनात्मक भाषा में बात रखने के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा कि अगर उन्होंने अपने किसी सहयोगी को बहस के दौरान निजी तौर पर दुखी किया हो तो उसके लिए वो माफी चाहते हैं। साल 2013 में उन्हें अर्जेंटीना के तत्कालीन राष्ट्रपति से माफी भी मांगनी पड़ी थी। उन्होंने राष्ट्रपति क्रिस्टीना को 'बूढ़ी चुड़ैल' कह दिया था।
साथ ही क्रिस्टीना के पति और अर्जेंटीना के पूर्व राष्ट्रपति नेतोर किर्सनर के आंखों की बीमारी पर भी गलत टिप्पणी की थी। उनकी ये टिप्पणी एक न्यूज कॉन्फ्रेस के दौरान रिकॉर्ड हो गई थी जब उन्हें अंदाजा नहीं था कि माइक्रोफोन ऑन है। साल 2016 में उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मेदुरो को 'बकरी जैसा पागल' कह डाला था।
मुहिका मुंहफट होने और कभी-कभी रचनात्मक भाषा में बात रखने के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा कि अगर उन्होंने अपने किसी सहयोगी को बहस के दौरान निजी तौर पर दुखी किया हो तो उसके लिए वो माफी चाहते हैं। साल 2013 में उन्हें अर्जेंटीना के तत्कालीन राष्ट्रपति से माफी भी मांगनी पड़ी थी। उन्होंने राष्ट्रपति क्रिस्टीना को 'बूढ़ी चुड़ैल' कह दिया था।
साथ ही क्रिस्टीना के पति और अर्जेंटीना के पूर्व राष्ट्रपति नेतोर किर्सनर के आंखों की बीमारी पर भी गलत टिप्पणी की थी। उनकी ये टिप्पणी एक न्यूज कॉन्फ्रेस के दौरान रिकॉर्ड हो गई थी जब उन्हें अंदाजा नहीं था कि माइक्रोफोन ऑन है। साल 2016 में उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मेदुरो को 'बकरी जैसा पागल' कह डाला था।
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साधारण जीवनशैली
राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने विशाल राष्ट्रपति भवन में रहने से इनकार कर दिया था। तब से अब तक वो और उनकी पत्नी राजधानी मोंटेवीडियो के बाहरी इलाके के एक फार्म हाउस में रहते थे। दोनों पति-पत्नी विद्रोही ग्रुप का हिस्सा भी रहे हैं। राष्ट्रपति काल के दौरान उन्होंने अपनी अधिकांश तनख्वाह दान कर दी थी। साल 2010 में राष्ट्रपति बनने के बाद उनके पास सिर्फ एक संपत्ति थी- 1987 फोक्सवैगन बीटल कार।
हल्के नीले रंग की उनकी कार इतनी प्रसिद्ध हुई कि साल 2014 में किसी ने इसे खरीदने के लिए उन्हें 10 लाख डॉलर का ऑफर भी दिया लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने तब कहा था कि इस कार के बिना वह अपने कुत्ते को कहीं नहीं ले जा पाएंगे।
राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने विशाल राष्ट्रपति भवन में रहने से इनकार कर दिया था। तब से अब तक वो और उनकी पत्नी राजधानी मोंटेवीडियो के बाहरी इलाके के एक फार्म हाउस में रहते थे। दोनों पति-पत्नी विद्रोही ग्रुप का हिस्सा भी रहे हैं। राष्ट्रपति काल के दौरान उन्होंने अपनी अधिकांश तनख्वाह दान कर दी थी। साल 2010 में राष्ट्रपति बनने के बाद उनके पास सिर्फ एक संपत्ति थी- 1987 फोक्सवैगन बीटल कार।
हल्के नीले रंग की उनकी कार इतनी प्रसिद्ध हुई कि साल 2014 में किसी ने इसे खरीदने के लिए उन्हें 10 लाख डॉलर का ऑफर भी दिया लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने तब कहा था कि इस कार के बिना वह अपने कुत्ते को कहीं नहीं ले जा पाएंगे।
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मुहिका का इस्तीफा अचानक नहीं आया। उन्होंने पहले ही कह दिया था कि 3 अगस्त को वो संसद में आखिरी बार आएंगे। संसद के सत्र के दौरान उनके विरोधियों ने कहा कि उन्हें यकीन नहीं है कि मुहिका राजनीति से रिटायर होंगे या नहीं। सिनेटर लुइस अलबर्टो हीबर ने कहा था कि उन्होंने सुना है कि वो साल 2019 में दोबारा राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दे रहे हैं।
उन्होंने कहा, "जाहिर है कि हमें अच्छा ही लगेगा कि आप अपना खाली समय आराम करने में बिताना चाहते हैं, बजाय हमारी पार्टी के खिलाफ काम करने के। आपको शुभकामनाएं!" जहां एक तरफ उनके सहयोगियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं, वहीं सोशल मीडिया पर उनके आलोचक कह रहे हैं कि उन्हें 1960 और 70 के दशक में विद्रोही ग्रुप के सदस्य होने के लिए माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने कहा, "जाहिर है कि हमें अच्छा ही लगेगा कि आप अपना खाली समय आराम करने में बिताना चाहते हैं, बजाय हमारी पार्टी के खिलाफ काम करने के। आपको शुभकामनाएं!" जहां एक तरफ उनके सहयोगियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं, वहीं सोशल मीडिया पर उनके आलोचक कह रहे हैं कि उन्हें 1960 और 70 के दशक में विद्रोही ग्रुप के सदस्य होने के लिए माफी मांगनी चाहिए।