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बीच समुद्र में मछली ने नाव कर दी पंक्चर तो नाविकों ने खुद ऐसे बचाई अपनी जान

Sat, 13 Oct 2018 03:44 PM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 13 Oct 2018 03:44 PM IST
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marlin fish did Boat puncture in the South China Sea, Five Filipino fishermen safe

क्या आपने कभी सुना है कि मछली ने नाव पंक्चर कर दी हो, जी हां फिलिपींस के पांच नाविक दक्षिण चीन सागर में मछली पकड़ने गए थे और दुर्लभ मार्लिन नाम की मछली ने नाव ही पंक्चर कर दी। पांचों नाविक दो दिन तक समुद्र में फंसे रहे और उनका खाना-पीना भी खत्म हो गया। ये तो कहो नाविकों के पास थोड़ी-बहुत लकड़ियां बची थीं, जिन्हें जोड़कर पांचों नाविकों ने एक राफ्ट तैयार की और इसके सहारे तैरकर किनारे आए। नाव पर मौजूद जिमी बाटिलर ने अपना अनुभव साझा किया है। 

उम्मीद नहीं थी कि मछली हमारी नाव पंक्चर कर देगी : जिमी 

marlin fish did Boat puncture in the South China Sea, Five Filipino fishermen safe

जिमी का कहना है कि मैं अपने चार साथियों के साथ हफ्ते भर पहले चीन सागर में मछलियां पकड़ने निकला था। अभियान के कुछ दिन बीते ही थे कि एक सुबह हमारी नाव के करीब दुर्लभ मार्लिन प्रजाती की मछली आ गई। नुकीली चोंच वाली मार्लिन को हमने पकड़ने की कोशिश की, पर असफल हो गए। मछली जाल से बचकर नाव के नीचे आ गई और चोंच मार-मारकर नाव ही पंक्चर कर दी। 

साधारण नहीं खास थी जिमी की नाव

marlin fish did Boat puncture in the South China Sea, Five Filipino fishermen safe

जिमी ने कहा हमारी नाव कोई हल्की-फुल्की नहीं थी। ये 12 फीट लंबी और समुद्र की लेवल-5 तक की लहरों को झेल पाने में सक्षम नाव थी। लेकिन 6 फीट लंबी और 800 किलो भारी मार्लिन मछली ने इसे भी पंक्चर कर दिया। हमारी नाव में 2 बड़े पंक्चर हो चुके थे। हम कई घंटों तक तो पंचर नाव में चलते रहे, लेकिन नाव में पानी आने लगा और लहरें तेज होने से आगे बढ़ना मुश्किल हो गया। हम एक दिन तो पानी में ठहरे भी। लेकिन यात्रा खत्म होने वाली थी और हमारे पास खाना-पानी भी खत्म होने लगा। हमें आगे बढ़ना ही था। 

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marlin fish did Boat puncture in the South China Sea, Five Filipino fishermen safe

जिमी ने कहा फिर हमने अपनी नाव पर मौजूद लकड़ियों और कुछ रस्सियों को जोड़कर एक मजबूत राफ्ट तैयार की। जरूरत का सामान राफ्ट पर रखा और आगे बढ़ गए। राफ्ट से हम सफलतापूर्वक किनारे आ गए। जब हमें यकीन हो गया कि हम 12 से 15 घंटे में किनारे पर लग जाएंगे तभी हमें एक कॉमर्शियल शिप दिख गया, जिसकी मदद से हमने मदद मंगवाई। फिर एक रेस्क्यू बोट आई। उसकी मदद से हम उत्तर पश्चिम मनीला के तट पहुंच गए। वहां हम पांचों नाविकों के परिवार हमारा इंतजार कर रहे थे। पूरे सफर के दौरान ये पहला मौका था, जब हमारी आंखों में आंसू आ गए।  

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