{"_id":"5b6a958c4f1c1be2588b59e3","slug":"kanwar-yatra-2018-five-brothers-carried-parents-on-kanwar-like-shravan-kumar","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"हरियाणा के 5 'श्रवण कुमार' बने मिसाल, कंधे पर बैठाकर माता-पिता को कराई कांवड़ यात्रा","category":{"title":"Weird Stories","title_hn":"अजब गजब","slug":"weird-stories"}}
हरियाणा के 5 'श्रवण कुमार' बने मिसाल, कंधे पर बैठाकर माता-पिता को कराई कांवड़ यात्रा
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Wed, 08 Aug 2018 02:03 PM IST
विज्ञापन
Kanwar Yatra
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
त्रेता युग में जहां एक श्रवण कुमार थे, वहीं कलयुग में पांच श्रवण कुमार हैं। बात सुनने में अजीब जरूर लगे, मगर यह सच है। हरियाणा के पलवल जिले के फुलवारी गांव के रहने वाले पांच बेटे माता-पिता को कंधे पर बैठाकर हरिद्वार ले गए।
Kanwar Yatra
- फोटो : ANI
चंद्रपाल सिंह और उनकी पत्नी रूपवती के पांच बेटे-बंसीलाल, अशोक, राजू, महेंद्र व जगपाल हैं। चंद्रपाल सिंह और उनके बेटे मजदूरी करते है। पिता ने बताया कि उनकी इच्छा थी कि वह हरिद्वार से कांवड़ लेकर आए। एक साल पहले उन्होंने बेटों से कांवड़ लाने की बात बताई। पांचों बेटों ने निर्णय लिया कि इस बार वह माता-पिता को श्रवण कुमार की तरह झूले में बैठाकर कांवड़ यात्रा पर लाएंगे।
Kanwar Yatra
- फोटो : ANI
पिता चंद्रपाल सिंह ने कहा, 'श्रवण कुमार के माता-पिता की तरह हमें वैसे कोई तकलीफ नहीं है। हम देख सकते हैं, चलने-फिरने में भी सक्षम हैं। मगर हम उन लोगों को संदेश देना चाहते हैं जो अभिभावकों की इज्जत नहीं करते हैं।' इन भाइयों की तस्वीर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शेयर की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Kanwar Yatra
- फोटो : ANI
चंद्रपाल सिंह के बड़े बेटे बंसीलाल ने बताया, 'हम पांच भाइयों के अलावा गांव के पांच युवकों की मदद ली गई। 12 जुलाई को हरिद्वार में माता-पिता को गंगा स्नान कराकर कांवड़ उठाई थी। अशोक ने बताया कि वह दिन में आठ से 10 किमी की दूरी तय करते हैं। उन्होंने बताया कि पिता की इच्छा थी कि वह कांवड़ लाये, लेकिन अधिक उम्र होने के कारण हिम्मत नहीं हो रही थी। इसलिए पांचों बेटों ने उन्हें झूले में बैठाकर कांवड़ लाने का निर्णय लिया।'
विज्ञापन
Kanwar Yatra
उधर, महिला उन्नति प्रशिक्षण संस्थान ने पांच बेटों समेत 15 ऐसे लोगों को सम्मानित किया। हालांकि, कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का मानना है कि इस तरह धूप में माता-पिता को 120 किलोमीटर तक ले जाना बेवकूफी है। उनका मानना है कि अगर वे भाई अपने माता-पिता ट्रेन या बस से हरिद्वार ले जाते तो वह ज्यादा आरामदायक होता।