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भारत की 10 भूतिया जगहें, जहां रहती हैं आत्माएं, डर के मारे कोई आसपास भी नहीं फटकता

Mon, 30 Jul 2018 11:17 AM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 30 Jul 2018 11:17 AM IST
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Top ten haunted place in india
haunted place
'अनजाने स्थान' और 'रहस्य' ये दो ऐसे शब्द हैं जिनका नाम सुनते ही लोगों की दिमाग की नसें तिलमिलाने लगती हैं। ऐसी कोई भी बात लोगों को गौर से सुनने में मदद करती हैं। इनके जरिए ही हम डरते हैं, देखने को उतारू होते हैं। यही नहीं आपने फिल्मों में भी खूब देखा होगा कि कैसे डरावने भूतहा सीन में लोग डर जाते हैं। वे जंगलों में, इमारतों में अपनी जान बचाने के प्रयास या फिर ऊपरी चक्कर को खत्म करने के लिए भाग-दौड करते हैं। लेकिन ये सब सच होता है क्या? क्या लोग वाकई में अकेले किलों में जाने से डरते हैं? क्या अमुक्त आत्माएं पुराने स्थानों में बसेरा बनाकर रहती हैं?


ऐसे कई सवाल अक्सर आपके मन को भी कौंधते होंगे। कई लोगों को मानना है कि दुनिया 21वीं सदी में प्रवेश कर चुकी है। विज्ञान काफी तरक्की कर चुका है मगर जहां तक अंधविश्वास की बात है वो अपनी जगह पर काम कर रहा है। दुनिया के तमाम देशों में पुराने राग अपनी जड़ फैलाए हुए हैं। भारत के परिपेक्ष में भी यह बात लागू होती है। यहां के लोग आज भी भूत-प्रेत, डायन आदि को मानते हैं। ऐसी कहानियों को भी बड़े चाव से सुनते हैं और कोई-कोई बच्चे तो मारे डर के मां को याद करने लगते लेते हैं। सोचिए, अगर वाकई में ये कहानियां हकीकत बनकर सामने आ जाएं तो क्या होगा?

ऐसा सोचकर कठोर से कठोर व्यक्ति भी कांपने लगता है। इतना ही नहीं कुछ जानकार मानते हैं कि भारत में ऐसी कई इमारते हैं, जो भूत-प्रेत या भटकती आत्माओं के कारण सुर्खियों में रही हैं। ऐसे स्थान हजारों वर्षों से एक भयानक श्राप को झेल रहे हैं। यहां जाने पर उूपरी चक्कर लोगों को नुकसान पहुंचा देते हैं। आज हम कुछ किस्सों को जन्म देने वाली जगहों के पीछे की कहानी बता रहे हैं...
Top ten haunted place in india
पिसावा के जंगल
पिसावा के जंगल
स्थानीय लोगों के अनुसार उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के देहात इलाके में एक ऐसी जगह भी हैं जिसके अंदर घुसने से पर्यटकों का कलेजा कांप जाता है। कारण बताया जाता है कि यहां सर्र-सर्र आवाज आती रहती है और रात में काला-काला पर्दा सा छा जाता है। इतना ही नहीं छाता तहसील के इस पिसावा नामक गांव के पास यह स्थान तरह-तरह के पेडों-हींस-करील और जीवों का बसेरा भी है। यहां हजारों की संख्या में बन्दर रहते हैं। पुराणों में लिखा गया है कि महाभारत में जब युद्ध खत्म हो गया था तो आचार्य द्रोण के महाबलशाली पुत्र अश्ववस्थामा पांण्डवों की जय के बाद से जिन झाड़ियों में प्रवेश कर गए थे वे ये ही हैं। घुमावदार जंगल के इस स्थान पर शनिवार को यज्ञ होता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां परिक्रमा के लिए आते हैं । बच्चे-बूढे़ और महिलाएं तो रोज ही मिल जाएंगे लेकिन वे भी इन झाड़ियों के भीतर नहीं जाते। आप यदि परिक्रमा या पूजन के लिए जाना चाहते हैं तो वाहन चलते हैं लेकिन यहां के प्रशासन और पदाधिकारियों ने अनदेखी कर इसकी प्रसिद्धी को अनजाना बना दिया है। 

मान्यता है कि पिसावा के पास ‘झाडी वाले बाबा’ जंगल से कोई लकडी लेकर बेच नहीं सकता, घर नहीं ले जा सकता। ये बात यहां का हर व्यक्ति जानता है। यदि भूलवश कोई ले जाने की कोशिश करता है तो उसका बुरा होता है। एक ग्रामीण ने हमें बताया कि एक बार एक घमंडी दंबग यहां से पेडों को काटकर बेचने चला था, उसके पशु मर गए थे और वृक्ष काटने वाले आदमी नांक से खूंन फेंककर भाग खड़े हुए थे। तभी से यह बात पुष्ट हो गई कि यहां से कोई लकड़ी नहीं ले जा सकता। हां, यदि आप आस्था कार्यों जैसे पुण्य-प्रसादी और भण्डारा करते हैं तो और भला होगा यहां की लकड़ी लेकर।

डेंजर इलाके में नहीं जा सकते
यहां आसपास कई पुराने खण्डहर हैं, जो पता नहीं किसने बनाए हैं। कोई अकेला व्यक्ति तो जाना दूर यहां आए लोग भी ऐसे इलाके में नहीं जाते हैं। इसके कारण खतरनाक कीट-पतंगे या ऊपरी बवाल का होना हो सकता है यह तो वहां जाने से ही स्पष्ट हो सकता है।
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मेरठ का ‘भूत बंगला’
मेरठ का ‘भूत बंगला’
उत्तर प्रदेश के ही एक जिले मेरठ में बेहद डरावना किस्सा है ‘भूत बंगले का’। यह बंगला मॉल रोड स्थित कैंट बोर्ड के सीईओ के आवास के निकट है। सीईओ के आवास और व्हीलर्स क्लब के बीच एक रास्ता अंदर की ओर जाता है। माल रोड से लगभग 650 मीटर अंदर जाने के क्रम में कई झाड़ियों से भी जूझना पड़ेगा, लेकिन घबराने की बात नहीं क्योंकि बंगले की दहलीज तक पक्की सड़क है। यहां पीले रंग के बंगले में पांव रखते ही कबूतरों की फड़फड़ाहट की आवाज एक बारगी आपको डरा तो देगी ही। हालांकि दीवारों पर इतने अपशब्द लिखे मिलेंगे कि माजरा समझने में देर नहीं लगेगी। सैकड़ों वर्ष पुराने इस बंगले का फर्श मजबूत हैं और ऊपर जाने की सीढ़ी भी दुरुस्त है। हां, दीवारें कहीं-कहीं से टूट चुकी हैं, जालियां नुची हुई हैं और धूल-गंदगी का अंबार है। कमरों में प्रवेश करने पर जूते-चप्पलों की छाप के साथ ही कोनों में दारू की बोतलें, सिगरेट, नमकीन के पैकेट और अन्य आपत्तिजनक सामान की मौजूदगी यह बताने को काफी है कि डर की आड़ में यहां क्या-क्या नहीं होता। दुनिया के लिए वीरानी की चादर ओढ़े इस भूतिया बंगले में जाम भी छलकते हैं और रंगीनियत भी होती है। इतना ही नहीं, एक कमरे में चार ईटें इस तरह से रखी हैं कि साफ जाहिर होता है कि यहां आए दिन ताश या जुआ खेला जाता है। कमरे हवादार हैं। धूप, बारिश से बचने के लिए पूरी तरह से सुरक्षित। किसी ने तो काली और नीली स्याही से बुद्ध विहार तक का नाम दे दिया है। 

बंगले में था सब एरिया मुख्यालय 1947 तक
जिस बंगले को दुनिया भर में सबसे ज्यादा डरावनी जगहों में शुमार किया गया है, आजादी मिलने तक यह सब एरिया मुख्यालय था। यहां मेरठ छावनी की हरेक गतिविधियों को अमली जामा पहनाया जाता था। उस दौर में कर्नल रैंक के अधिकारी सब एरिया कमांडर के पद पर होते थे। 1947 के बाद इस बंगले को छोड़ सब एरिया मुख्यालय सरधना रोड पर बनाया गया, जहां पूर्व में अंग्रेजी अफसरों का अस्पताल हुआ करता था।
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Top ten haunted place in india
भानगढ़ का किला
भानगढ़ का किला
भानगढ़ फोर्ट, राजस्थान के अलवर जिले में स्तिथ है। यह भारत का टॉप मोस्ट हॉन्टेड प्लेस है। इसे आम बोलचाल की भाषा में भूतों का भानगढ़ कहा जाता है। इस बारे में रोचक कहानी है कि 16 वीं शताब्दी में भानगढ़ बसता है। 300 सालों तक भानगढ़ खूब फलता-फूलता है। फिर यहां कि एक सुन्दर राजकुमारी रत्नावती पर काले जादू में महारथ तांत्रिक सिंधु सेवड़ा आसक्त हो जाता है। वो राजकुमारी को वश में करने लिए काला जादू करता है पर खुद ही उसका शिकार हो कर मर जाता है । पर मरने से पहले भानगढ़ को बर्बादी का श्राप दे जाता है और संयोग से उसके एक महीने बाद ही पड़ौसी राज्य अजबगढ़ से लड़ाई में राजकुमारी सहित सारे भानगढ़ वासी मारे जाते है और भानगढ़ वीरान हो जाता है। तब से वीरान हुआ भानगढ आज तक वीरान है और कहते है कि उस लड़ाई में मारे गए लोगो के भूत आज भी रात को भानगढ़ के किले में भटकते हैं। तांत्रिक के श्राप के कारण उन सब कि आत्मा की मुक्ति आज तक नहीं हो पाई है। देखा है जो की कुछ दूर जाकर पेड़ों में गायब हो गई। वैसे यह सर कटी लाश वाली बात काल्पनिक ज्यादा लगती है लेकिन डाउ हिल के जंगलो में जाने वाला कोई भी शख्स इस बात से इंकार नहीं करता की ये जगह हॉन्टेड हो या 

यह जगह अब पुरात्तव विभाग अधीन है और उन्होंने सूर्यास्त के बाद इसे किले में नहीं रुकने की सख्त हिदायत दे रखी है। सरकार ने भी पर्यटकों को यहां अंधेरा होने से पहले चले जाने की चेतावनी जारी कर रखी है। लोगों का मानना है कि आज भी उस तांत्रिक की आत्मा वहीं भटकती रहती है। तांत्रिक के श्राप के अनुसार वह स्थान कभी भी बस नहीं सकता। वहां रहने वाले लोगों की मृत्यु हो जाती है, लेकिन उनकी आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती।
 
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कुलधरा गांव जैसलमेर में
कुलधरा गांव, जैसलमेर 
इस सूचि में एक और राजस्थान का स्थान है। जैसलमेर जिले का कुलधरा गांव जो की पिछले 170 सालों से वीरान पड़ा हैं। कुलधरा गांव पालीवाल ब्राहम्णों का गांव था। कुलधरा गांव के हजारों लोग अपने गांव की एक लड़की को अय्याश दीवान सालम सिंह से बचाने के लिए, एक ही रात मे इस गांव को खाली कर के चले गए थे और जाते-जाते श्राप दे गए थे कि यहां फिर कभी कोई नहीं बस पायेगा। तब से गांव वीरान पड़ा हैं। कहा जाता है कि यह गांव रूहानी ताकतों के कब्जे में हैं, कभी हंसता खेलता यह गांव आज एक खंडहर में तब्दील हो चुका है। टूरिस्ट प्लेस में बदल चुके कुलधरा गांव में घूमने आने वालों के मुताबिक यहां रहने वाले पालीवाल ब्राह्मणों की आहट आज भी सुनाई देती है। उन्हें वहां हरपल ऐसा अनुभव होता है कि कोई आसपास चल रहा है। बाजार के चहल-पहल की आवाजें आती हैं, महिलाओं के बात करने उनकी चूडियों और पायलों की आवाज हमेशा ही वहां के माहौल को भयावह बनाते हैं। प्रशासन ने इस गांव की सरहद पर एक फाटक बनवा दिया है जिसके पार दिन में तो सैलानी घूमने आते रहते हैं लेकिन रात में इस फाटक को पार करने की कोई हिम्मत नहीं करता हैं। मई 2013 मे दिल्ली से आई भूत-प्रेत व आत्माओं पर रिसर्च करने वाली पेरानार्मल सोसायटी की टीम ने कुलधरा गांव में रात बिताई और यहां पर पारलौकिक गतिविधिया रिकॉर्ड की।
 
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