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150 साल से 7 लड़कियों की चीखों का गवाह है ये किला, आज भी गूंजती हैं भयानक आवाजें
amarujala.com, Presented by: राजेश सैनी
Updated Sun, 12 Nov 2017 09:20 AM IST
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Talbehat Fort of Lalitpur
ये किला आज भी 7 लड़कियों की चीखों का गवाह है। यहां के लोगों का कहना है कि वे पिछले 150 साल से इन लड़कियों की चीखों को सुन रहे हैं। इस वजह से लोग यहां पैर रखने से भी डरते हैं।
Talbehat Fort of Lalitpur
इस किले का इतिहास 150 साल पुराना बताया जाता है। इस किले के दरवाजे पर इन 7 लड़कियों की पेटिंग बनी है। इतिहासकार भी इस किले से जुड़ी खौफनाक कहानी को सच मानते हैं।
Shrill Cries Of 7 Girls Welcome here
ये है किले की खौफनाक कहानी
ललितपुर के तालबेहट का किला 1850 में मर्दन सिंह ने बनवाया था। राजा मर्दन सिंह ने 1857 की क्रांति में रानी लक्ष्मीबाई का साथ दिया था। उन्हें आज भी क्रांतिवीर के रूप में याद किया जाता है। तालबेहट के किले को मर्दन सिंह ने अपने पिता प्रहलाद सिंह के लिए बनवाया था। इतिहासकारों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन तालबेहट राज्य की 7 लड़कियां राजा मर्दन सिंह के इस किले में नेग मांगने गई थीं। तब राजा के पिता प्रहलाद किले में अकेले थे।
ललितपुर के तालबेहट का किला 1850 में मर्दन सिंह ने बनवाया था। राजा मर्दन सिंह ने 1857 की क्रांति में रानी लक्ष्मीबाई का साथ दिया था। उन्हें आज भी क्रांतिवीर के रूप में याद किया जाता है। तालबेहट के किले को मर्दन सिंह ने अपने पिता प्रहलाद सिंह के लिए बनवाया था। इतिहासकारों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन तालबेहट राज्य की 7 लड़कियां राजा मर्दन सिंह के इस किले में नेग मांगने गई थीं। तब राजा के पिता प्रहलाद किले में अकेले थे।
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Talbehat (Mardan Singh) Fort
लड़कियों की खूबसूरती देखकर उनकी नीयत खराब हो गई और उन्होंने सातों लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बना लिया। लड़कियों ने इस घटना से आहत होकर महल के बुर्ज से कूदकर जान दे दी थी। कहते हैं आज भी उन सात लड़कियों की आवाजें तालबेहट फोर्ट में सुनाई देती हैं। यह घटना अक्षय तृतीया के दिन हुई थी, इसलिए आज भी यहां यह त्योहार नहीं मनाया जाता।
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Talbehat (Mardan Singh) Fort
सातों लड़कियों को पूजता है पूरा गांव
राजा मर्दन सिंह अपने पिता प्रहलाद की हरकत से आहत हुए। अपने पिता की करतूत का पश्चाताप करने के लिये राजा मर्दन सिंह ने लड़कियों को श्रद्धांजलि के रूप में किले के मेन गेट पर सातों लड़कियों के चित्र बनवाए थे, जो आज भी मौजूद हैं। गांव की शांति के लिए महिलाएं आज भी किले के मुख्य द्वार पर बने सातों लड़कियों के चित्र की पूजा करने जाती हैं।
राजा मर्दन सिंह अपने पिता प्रहलाद की हरकत से आहत हुए। अपने पिता की करतूत का पश्चाताप करने के लिये राजा मर्दन सिंह ने लड़कियों को श्रद्धांजलि के रूप में किले के मेन गेट पर सातों लड़कियों के चित्र बनवाए थे, जो आज भी मौजूद हैं। गांव की शांति के लिए महिलाएं आज भी किले के मुख्य द्वार पर बने सातों लड़कियों के चित्र की पूजा करने जाती हैं।