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Kargil Vijay Diwas 2020: कहानी कारगिल युद्ध की, जब भारत ने पलट दी हारी हुई बाजी

Sun, 26 Jul 2020 11:14 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Sun, 26 Jul 2020 11:14 AM IST
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Kargil Vijay Diwas 2020: Story Of Kargil War, When India Overturned The Losing Bet
कारगिल विजय दिवस - फोटो : अमर उजाला

21 साल पहले कारगिल की पहाड़ियों पर भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ाई हुई थी। इस लड़ाई की शुरुआत तब हुई थी जब पाकिस्तानी सैनिकों ने कारगिल की ऊंची पहाड़ियों पर घुसपैठ करके अपने ठिकाने बना लिए थे। 8 मई, 1999 पाकिस्तान की 6 नॉरदर्न लाइट इंफैंट्री के कैप्टेन इफ्तेखार और लांस हवलदार अब्दुल हकीम 12 सैनिकों के साथ कारगिल की आजम चौकी पर बैठे हुए थे। उन्होंने देखा कि कुछ भारतीय चरवाहे कुछ दूरी पर अपने मवेशियों को चरा रहे थे।

Kargil Vijay Diwas 2020: Story Of Kargil War, When India Overturned The Losing Bet
कारगिल युद्ध - फोटो : सोशल मीडिया

पाकिस्तानी सैनिकों ने आपस में सलाह की कि क्या इन चरवाहों को बंदी बना लिया जाए? किसी ने कहा कि अगर उन्हें बंदी बनाया जाता है, तो वो उनका राशन खा जाएंगे जो कि खुद उनके लिए भी काफी नहीं है। उन्हें वापस जाने दिया गया। करीब डेढ़ घंटे बाद ये चरवाहे भारतीय सेना के 6-7 जवानों के साथ वहां वापस लौटे।

इतना नीचे कि कैप्टेन इफ्तेखार को पायलट का बैज तक साफ दिखाई दे रहा था। ये पहला मौका था जब भारतीय सैनिकों को भनक पड़ी कि बहुत सारे पाकिस्तानी सैनिकों ने कारगिल की पहाड़ियों की ऊंचाइयों पर कब्जा जमा लिया है।भारतीय सैनिकों ने अपनी दूरबीनों से इलाके का मुआयना किया और वापस चले गए। करीब 2 बजे वहां एक लामा हेलिकॉप्टर उड़ता हुआ आया।

Kargil Vijay Diwas 2020: Story Of Kargil War, When India Overturned The Losing Bet
कारगिल युद्ध - फोटो : सोशल मीडिया

कारगिल पर मशहूर किताब 'विटनेस टू ब्लंडर- कारगिल स्टोरी अनफोल्ड्स' लिखने वाले पाकिस्तानी सेना के रिटायर्ड कर्नल अशफाक हुसैन ने बीबीसी को बताया, "मेरी खुद कैप्टेन इफ्तेखार से बात हुई है। उन्होंने मुझे बताया कि अगले दिन फिर भारतीय सेना के लामा हेलिकॉप्टर वहां पहुंचे और उन्होंने आजम, तारिक और तशफीन चौकियों पर जम कर गोलियां चलाईं। कैप्टेन इफ्तेखार ने बटालियन मुख्यालय से भारतीय हेलिकॉप्टरों पर गोली चलाने की अनुमति मांगी लेकिन उन्हें ये इजाजत नहीं दी गई, क्योंकि इससे भारतीयों के लिए 'सरप्राइज एलिमेंट' खत्म हो जाएगा।"

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Kargil Vijay Diwas 2020: Story Of Kargil War, When India Overturned The Losing Bet
कारगिल युद्ध - फोटो : सोशल मीडिया

भारत के राजनीतिक नेतृत्व को भनक नहीं
उधर भारतीय सैनिक अधिकारियों को ये तो आभास हो गया कि पाकिस्तान की तरफ से भारतीय क्षेत्र में बड़ी घुसपैठ हुई है लेकिन उन्होंने समझा कि इसे वो अपने स्तर पर सुलझा लेंगे। इसलिए उन्होंने इसे राजनीतिक नेतृत्व को बताने की जरूरत नहीं समझी।

कभी इंडियन एक्सप्रेस के रक्षा मामलों के संवाददाता रहे जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह याद करते हैं, "मेरे एक मित्र उस समय सेना मुख्यालय में काम किया करते थे। फोन करके कहा कि वो मुझसे मिलना चाहते हैं। मैं उनके घर गया। उन्होंने मुझे बताया कि सीमा पर कुछ गड़बड़ है क्योंकि पूरी पलटन को हेलिकॉप्टर के माध्यम से किसी मुश्किल जगह पर भेजा गया है किसी घुसपैठ से निपटने के लिए। सुबह मैंने पापा को उनको सारी बात बताई उन्होंने तब के रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस को फोन किया। वे अगले दिन रूस जाने वाले थे। उन्होंने अपनी यात्रा रद्द की और इस सरकार को घुसपैठ के बारे में पहली बार पता चला।"

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कारगिल युद्ध - फोटो : ANI

मकसद था सियाचिन से भारत को अलग-थलग करना
दिलचस्प बात ये थी कि उस समय भारतीय सेना के प्रमुख जनरल वेदप्रकाश मलिक भी पोलैंड और चेक गणराज्य की यात्रा पर गए हुए थे। वहां उनको इसकी पहली खबर सैनिक अधिकारियों से नहीं, बल्कि वहां के भारतीय राजदूत के जरिए मिली। सवाल उठता है कि लाहौर शिखर सम्मेलन के बाद पाकिस्तानी सैनिकों के इस तरह गुपचुप तरीके से कारगिल की पहाड़ियों पर जा बैठने का मकसद क्या था?

इंडियन एक्सप्रेस के एसोसिएट एडिटर सुशांत सिंह कहते हैं, "मकसद यही था कि भारत की सुदूर उत्तर की जो टिप है जहां पर सियाचिन ग्लेशियर की लाइफ लाइन एनएच 1 डी को किसी तरह काट कर उस पर नियंत्रण किया जाए। वो उन पहाड़ियों पर आना चाहते थे जहां से वो लद्दाख की ओर जाने वाली रसद के जाने वाले काफिलों की आवाजाही को रोक दें और भारत को मजबूर होकर सियाचिन छोड़ना पड़े।"

सुशांत सिंह का मानना है कि मुशर्रफ को ये बात बहुत बुरी लगी थी कि भारत ने 1984 में सियाचिन पर कब्जा कर लिया था। उस समय वो पाकिस्तान की कमांडो फोर्स में मेजर हुआ करते थे। उन्होंने कई बार उस जगह को खाली करवाने की कोशिश की थी लेकिन वो सफल नहीं हो पाए थे।

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